Pete Hegseth: बीते साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकी हमला हुआ था. इसमें आतंकियों ने निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाकर एक नेपाली नागरिक सहित कुल 26 भारतीयों की बर्बर हत्या कर दी थी. इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर आतंक के आकाओं, उनके ठिकाने और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था. आखिर में पाकिस्तानी सेना के डीजीएमओ ने भारतीय सेना के डीजीएमओ को फोन कर ऑपरेशन को रोकने की गुजारिश की थी, उसके बाद भारत ने पाक के खिलाफ अपने ऑपरेशन को लेकर सीजफायर का ऐलान किया था.
भारत हमेशा यह कहते रहा है कि यह सीजफायर दोनों देशों के बीच आपसी सहमती से हुई, लेकिन अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप दावा करते हैं कि उन्होंने ही इसे करवाया था. वे यहां तक कह चुके हैं कि अगर वे ऐसा नहीं करते तो युद्ध परमाणु हथियार तक पहुंच जाता. यहां तक कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की हत्या तक हो जाती. इन दावों को भारत ने बार-बार खारिज किया है. वहीं, इस बीच अमेरिका ने एक बार फिर से भारत-पाक सीजफायर को लेकर अपना राग अलापा है. अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इसके लिए ट्रंप के पहल का समर्थन किया है. हालांकि, इस दौरान उन्होंने हिंद प्रशांत को लेकर भारत की तारीफ भी की है.
पीट हेगसेथ ने क्या कहा?
शनिवार को अमेरिकी वॉर सचिव पीट हेगसेथ (US Secretary of War Pete Hegseth) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में मदद करने का श्रेय दिया और नई दिल्ली को वाशिंगटन की हिंद-प्रशांत रणनीति में एक प्रमुख भागीदार बताया. सिंगापुर में शांगरी-ला संवाद (Shangri-La Dialogue) में बोलते हुए, हेगसेथ ने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद बनी सहमति का जिक्र किया और तनाव कम करने में ट्रंप की भूमिका की सराहना की. हेगसेथ ने कहा, “आपने देखा कि राष्ट्रपति ने भारत और पाकिस्तान, दो परमाणु सक्षम देशों के बीच शांति समझौता कराने में कितनी कुशलता दिखाई.”
ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उन्होंने पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद शांति स्थापित करने में मदद की. हालांकि, भारत लगातार यही कहता रहा है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर हुआ था और उसने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को खारिज कर दिया है.
अमेरिका ने शनिवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों एक-दूसरे को सुरक्षा संबंधी चिंताओं के नजरिए से देखते रहेंगे. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे से आने वाले खतरों को समझ सकेंगे. इनमें से कुछ को हम शायद अलग तरह से देखते हैं और देश आईसीबीएम (अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल) से निपटने के लिए नए हथियार विकसित करना चाहेंगे, लेकिन हम कम से कम अभी के लिए किसी भी देश पर उंगली नहीं उठा रहे हैं और उन्हें हमारे लिए खतरा नहीं बता रहे हैं.”
भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं पर क्या बोले हेगसेथ?
30 मई को सिंगापुर शिखर सम्मेलन में एक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए हेगसेठ ने भारत की बढ़ती सैन्य और औद्योगिक क्षमताओं पर भी अपनी बात कही. उन्होंने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक तेजी से महत्वपूर्ण सुरक्षा भागीदार के रूप में वर्णित किया. उन्होंने कहा कि भारत अपने सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण कर रहा है और विशेषकर हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है. हेगसेठ ने यह भी बताया कि भारत उच्च स्तरीय सैन्य अभियानों को संचालित करने के लिए औद्योगिक और रसद क्षमता का निर्माण कर रहा है. उन्होंने कहा, “हमने क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ सह-उत्पादन करने की भी प्रतिबद्धता जताई है.”
Strait of Hormuz से परमाणु हथियार तक, US-Iran के बीच समझौते पर जारी हाई वोल्टेज ड्रामा
News Source: PTI
