Home Top News Strait of Hormuz से परमाणु हथियार तक, US-Iran के बीच समझौते पर जारी हाई वोल्टेज ड्रामा

Strait of Hormuz से परमाणु हथियार तक, US-Iran के बीच समझौते पर जारी हाई वोल्टेज ड्रामा

by Preeti Pal 30 May 2026, 9:44 AM IST
30 May 2026, 9:44 AM IST
Strait of Hormuz से लेकर परमाणु हथियार तक, US-Iran के बीच शांति समझौते पर जारी है हाई वोल्टेज ड्रामा

US-Iran: मिडिल ईस्ट में लंबे टाइम से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की चर्चा तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच चल रही प्रोब्लम को खत्म करने की दिशा में बड़ा प्रोग्रेस हुआ है. ऐसे में वॉर को लेकर जल्द ही एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है. हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को जल्दबाज़ी करार देते हुए साफ कहा है कि अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है.

हटेगी नाकाबंदी!

शुक्रवार को ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में लागू नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जा रही है. इसके अलावा जल्द ही ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने व्हाइट हाउस में एक बड़ी बैठक भी की, जिसमें नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े सीनियर ऑफिसर्स शामिल थे. बताया गया कि ये बैठक करीब दो घंटे तक चली, लेकिन इसके बाद भी किसी अंतिम फैसले की अनाउंसमेंट नहीं की गई.

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कुछ शर्ते भी शामिल

सोशल मीडिया पर किए गए अपने बयान में ट्रंप ने ईरान के सामने कुछ कड़ी शर्तें रखीं. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अपनी क्षमता पूरी तरह खत्म करनी होगी. उसे ये वादा करना होगा कि वो कभी भी परमाणु बम नहीं बनाएगा. साथ ही ट्रंप ने डिमांड की, कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को तुरंत पूरी तरह खोल दिया जाए. इससे दोनों दिशाओं में जहाजों का आना-जाना बिना किसी रोक-टोक के हो सके. अपने खास अंदाज़ में ट्रंप ने एक और मैसेज दिया. उन्होंने कहा कि नौसैनिक नाकाबंदी में फंसे जहाज अब घर लौटने की तैयारी कर सकते हैं. इसके साथ उन्होंने मजाकिया अंदाज़ में कहा, अपनी पत्नियों, पतियों, माता-पिता और परिवारों को मेरी तरफ से हेलो कहना. आपके फेवरेट राष्ट्रपति की तरफ से.

ईरान का रिएक्शन

लेकिन ट्रंप के बयान के कुछ ही देर बाद ईरान ने इसका विरोध किया. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि बातचीत अभी जारी है. अभी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है. उन्होंने कहा कि ईरान पिछले 47 सालों से किसी भी देश की “यह करना ही होगा” जैसी भाषा स्वीकार नहीं करता. वो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है.

अमेरिका पर नहीं भरोसा

ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक कदमों को शुरू से ही अवैध बताया. ईरान ने कहा कि ये अप्रैल में लागू हुए सीजफायर की भावना के खिलाफ था. वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने भी कहा कि अमेरिका की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक, सीजफायर का फ्यूचर सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि जमीन पर होने वाली कार्रवाई से तय होगा. फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है. दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये डिप्लोमेटिक एफर्ट सच में शांति का रास्ता खोल पाएगा या फिर ये सिर्फ एक और राजनीतिक बयानबाज़ी बनकर रह जाएगा.

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