India And UNSC: दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) की भूमिका बहुत ही खास हो जाती है. इस अंतरराष्ट्रीय संगठन/परिषद के कई उद्देश्य हैं, जिनमें दुनिया की शांति और सुरक्षा बनाए रखना और विभिन्न देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना भी है.
अभी आप देख सकते हैं कि कैसे पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के संघर्ष की वजह से संकट और अशांति है. दोनों देशों के बीच हमले जारी हैं. वहीं, इजरायल और खाड़ी देशों पर भी ईरान कई बार हमला कर चुका है. आज मंगलवार को ईरान समर्थित यमन के हूति विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एक इंटरनेशल एयरपोर्ट को निशाना बनाया और मिसाइल-ड्रोन से अटैक कर दिया.
दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अस्थायी सदस्य के लिए अपनी दावेदारी पेश की है. यह दावेदारी 2028-29 के लिए है. अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने UNSC के अस्थायी सदस्य के रूप में भारत की दावेदारी को पेश किया है. इसके साथ ही उन्होंने देश के शांति नजरिये को भी दुनिया के सामने रखा. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.
अब आइए जानते हैं कि आखिरकार क्या है UNSC, जिसके अस्थायी सदस्य के लिए भारत ने पेश की अपनी दावेदारी. इसके साथ ही इस संगठन के स्थायी सदस्यों के बारे में भी जानेंगे, जिनके पास वीटो पावर है. यह एक ऐसा पावर है, जिसके इस्तेमाल से दुनिया के बड़े से बड़े फैसले पलट दिए जाते हैं. शुरुआत हम संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भाषण की बड़ी बातों से करेंगे.
India formally launches its campaign for United Nations Security Council 2028-2029. pic.twitter.com/RUnu1akAYe
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 13, 2026
भारत का दृष्टिकोण शांति पर आधारित- विदेश मंत्री
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अस्थायी सदस्य के लिए अपनी दावेदारी पेश की है. यह वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए है. इस पहले भारत UNSC का आठ बार अस्थायी सदस्य रह चुका है. भारत की दावेदारी पेश करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई बड़ी और मुख्य बातें कहीं. उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर भी इसकी जानकारी दी है.
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, “यूनाइडेट नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल 2028-29 के लिए भारत का कैंपेन लॉन्च करते हुए खुशी हो रही है. उन्होंने बताया कि भारत का दृष्टिकोण शांति (SHANTI) पर आधारित है – मानदंडों, विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र विकास सुनिश्चित करना.
Pleased to launch India’s campaign for the @UN Security Council 2028-29.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 13, 2026
Underlined 🇮🇳’s approach rooted in SHANTI – Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity.
We will prioritise :
➡️ Strengthening the Voice of Global South, and factoring its concerns… pic.twitter.com/pGOHJho5fC
विदेश मंत्री ने कहा कि हम निम्नलिखित को प्राथमिकता देंगे:
- वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाना और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर उनकी चिंताओं को ध्यान में रखना. वैश्विक दक्षिण को हमारे साझा भविष्य के निर्धारण में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए.
- लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि और प्रभावी बहुपक्षवाद को बढ़ावा देना. भारत का दृष्टिकोण संवाद, सहयोग और मतभेदों को दूर करने पर केंद्रित होगा.
- भविष्य के लिए तैयार शांतिरक्षा प्रणाली, जो बेहतर सुसज्जित, तकनीकी रूप से सक्षम, यथार्थवादी रूप से निर्धारित और मुख्य उद्देश्यों पर केंद्रित हो. महिला, शांति एवं सुरक्षा एजेंडा से प्रेरित होकर, हम महिला शांतिरक्षकों की भूमिका का हमेशा समर्थन करेंगे.
- समावेशिता, सुरक्षा और जनहित पर आधारित एआई का मानव-केंद्रित दृष्टिकोण. हम इसके दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरों का मुकाबला करने के लिए भी दृढ़ संकल्पित हैं.
- अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री समझौता ज्ञापन (UNCLOS) के अनुसार एक स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देना. समुद्री व्यापार के सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह को बनाए रखना, समुद्री डकैती से लड़ना, नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपदा जोखिम न्यूनीकरण (एचएडीआर) मिशनों को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता होगी.
- प्रभावी और निरंतर प्रयासों के माध्यम से आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करना भी हमारी प्राथमिकता है. आतंकवादी समूहों को सूचीबद्ध करने के लिए वस्तुनिष्ठ और साक्ष्य-आधारित प्रस्तावों के साथ एक पारदर्शी प्रतिबंध व्यवस्था समय की आवश्यकता है. एक सुधारित, प्रतिनिधि और परिणामोन्मुखी सुरक्षा परिषद में वैश्विक दक्षिण की आवाज का होना आवश्यक है.

भारत दो वर्ष के लिए बनेगा UNSC का सदस्य
भारत ने यूएनएससी (UNSC) के अस्थायी सदस्य के लिए दावेदारी पेश की है. विदेश मंत्री जयशंकर ने UNSC सदस्य देशों से भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील की है. भारत UNSC का सदस्य निर्वाचित होने के बाद दो वर्षों तक इसका अस्थायी सदस्य बनेगा. बता दें कि इससे पहले भी भारत इसका अस्थायी सदस्य रहा है.
जी हां, भारत अब तक आठ बार UNSC का अस्थायी सदस्य रह चुका है. आखिरी बार भारत 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल हुआ था, जो 15 देशों के इस शक्तिशाली निकाय में उसकी आठवीं उपस्थिति थी. इससे पहले वह 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में भी अस्थायी सदस्य रह चुका है.
क्या है UNSC?
अब सबसे पहले बात UNSC की करेंगे. UNSC का पूरा नाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद है. यह संयुक्त राष्ट्र का सबसे अहम और शक्तिशाली अंग है. इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के तहत संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों की स्थापना की गई है, जिनमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है. यूएन अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद को देता है, जो शांति को खतरा होने पर कभी भी बैठक कर सकती है.

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17 जनवरी 1946 को UNSC का पहला सत्र
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का पहला सत्र 17 जनवरी 1946 को लंदन के वेस्टमिंस्टर स्थित चर्च हाउस में आयोजित किया गया था. अपनी पहली बैठक के बाद से, सुरक्षा परिषद का स्थायी कार्यालय न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में है. इसने कई शहरों की यात्रा भी की है, जिनमें 1972 में इथियोपिया के अदीस अबाबा, पनामा के पनामा सिटी और 1990 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में सत्र आयोजित करना शामिल है.
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इसके प्रत्येक सदस्य देश का एक प्रतिनिधि हर समय उपस्थित रहना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा परिषद की बैठक कभी भी हो सके.
UNSC के चार अहम उद्देश्य
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, UNSC के चार अहम उद्देश्य हैं.
- अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए
- विभिन्न देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना
- अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में और मानवाधिकारों के सम्मान को बढ़ावा देने में सहयोग करना
- राष्ट्रों की गतिविधियों में सामंजस्य स्थापित करने का केंद्र बनना
संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य सुरक्षा परिषद के निर्णयों को स्वीकार करने और उनका पालन करने के लिए सहमत हैं. यद्यपि संयुक्त राष्ट्र के अन्य अंग सदस्य देशों को सिफारिशें देते हैं, लेकिन केवल सुरक्षा परिषद के पास ही निर्णय लेने का अधिकार है, जिनका पालन करने के लिए सदस्य देश चार्टर के तहत बाध्य हैं.

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UNSC के स्थायी और अस्थायी सदस्य
अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं. इनमें पांच स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य हैं. भारत ने अस्थायी सदस्य के लिए ही अपनी दावेदारी पेश की है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों में चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) और अमेरिका शामिल हैं. इन पांचों के पास ही वीटो पावर है.
वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यों में कुल 10 देश शामिल हैं. इनके नाम हैं- बहरीन, कोलंबिया, कांगो, डेनमार्क, ग्रीस, लातविया, लाइबेरिया, पाकिस्तान, पनामा और सोमालिया. ये दो वर्षों के लिए अस्थायी सदस्य बनाए जाते हैं, इसलिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यों के नाम समय के साथ बदलते रहेंगे, लेकिन स्थायी सदस्य नहीं बदलते हैं.
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वीटो पावर का अधिकार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के निर्माताओं ने यह परिकल्पना की थी कि पांच देश – चीन, फ्रांस, सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (यूएसएसआर) [जिसका 1990 में रूसी संघ ने स्थान लिया], यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका – संयुक्त राष्ट्र की स्थापना में अपनी प्रमुख भूमिकाओं के कारण, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे.
उन्हें सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य राज्यों का विशेष दर्जा दिया गया, साथ ही “वीटो का अधिकार” नामक विशेष मतदान शक्ति भी प्रदान की गई. मसौदा तैयार करने वालों ने यह सहमति व्यक्त की कि यदि पांच स्थायी सदस्यों में से कोई भी 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में नकारात्मक मत देता है, तो प्रस्ताव या निर्णय को मंजूरी नहीं दी जाएगी.
सभी पांच स्थायी सदस्यों ने कभी न कभी वीटो के अधिकार का प्रयोग किया है. यदि कोई स्थायी सदस्य किसी प्रस्तावित प्रस्ताव से पूरी तरह सहमत नहीं है, लेकिन वीटो नहीं करना चाहता, तो वह मतदान से अनुपस्थित रह सकता है, जिससे प्रस्ताव को नौ आवश्यक मत प्राप्त होने पर पारित किया जा सकेगा. बता दें कि ये स्थायी सदस्य अपनी वीटो शक्तियों को इस्तेमाल करके दुनिया के बड़े से बड़े फैसलों को बदल सकते हैं.

रूस और चीन द्वारा वीटो प्रयोग में काफी बढ़त
फरवरी 2024 की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2011 के बाद से रूस और चीन द्वारा वीटो के प्रयोग में काफी वृद्धि हुई है. इनमें से अधिकांश सीरियाई संघर्ष के कारण हुए हैं. 2011 से रूस ने 19 वीटो का प्रयोग किया है, जिनमें से 14 सीरिया से संबंधित थे. इस अवधि के दौरान चीन द्वारा प्रयोग किए गए 9 वीटो में से आठ सीरिया से संबंधित थे और एक वेनेजुएला से संबंधित था.
2011 के बाद से रूस द्वारा प्रयोग किए गए शेष वीटो यूक्रेन संघर्ष से संबंधित दो प्रस्तावों, स्ब्रेबेनिका नरसंहार की 20वीं वर्षगांठ पर एक प्रस्ताव, यमन पर प्रतिबंधों से संबंधित एक प्रस्ताव और वेनेजुएला से संबंधित एक प्रस्ताव के विरुद्ध थे. वहीं,अमेरिका ने 2020 के बाद से 14 वीटो का प्रयोग किया है, जिनमें से दो को छोड़कर बाकी सभी इजरायल/फिलिस्तीन से संबंधित मुद्दों पर थे.
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