India-China border talks: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ((Wang Yi) सोमवार को दो दिवसीय भारत यात्रा पर आ रहे हैं. इस दौरान वह NSA अजीत डोबाल के साथ विवादित सीमा पर स्थायी शांति और सौहार्द पर चर्चा करेंगे.
India-China border talks: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ((Wang Yi) सोमवार को दो दिवसीय भारत यात्रा पर आ रहे हैं. इस दौरान वह NSA अजीत डोबाल के साथ विवादित सीमा पर स्थायी शांति और सौहार्द पर चर्चा करेंगे. वांग की यात्रा को मोटे तौर पर दोनों पड़ोसियों द्वारा अपने संबंधों के पुनर्निर्माण के लिए चल रहे प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जो 2020 में घातक गलवान घाटी संघर्ष के बाद गंभीर तनाव में आ गए थे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना करके 50 प्रतिशत करने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ते तनाव के मद्देनजर यह यात्रा अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, जिसमें रूसी तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त जुर्माना भी शामिल है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी करेंगे मुलाकात
मामले से परिचित लोगों ने बताया कि दोनों पक्षों द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर समग्र स्थिति की समीक्षा के अलावा नए विश्वास-निर्माण उपायों पर विचार-विमर्श किए जाने की उम्मीद है. हालांकि दोनों पक्षों ने घर्षण बिंदुओं से सैनिकों को हटा लिया है, लेकिन उन्होंने सीमा से अग्रिम पंक्ति के बलों को वापस बुलाकर स्थिति को कम करना बाकी है. प्रत्येक पक्ष के पास वर्तमान में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में एलएसी के साथ लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक हैं. चीनी विदेश मंत्री विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे. यह पता चला है कि दोनों पक्ष 31 अगस्त और 1 सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के लिए जमीन तैयार करने के अवसर का भी उपयोग करेंगे. योजना के अनुसार, पीएम मोदी 29 अगस्त के आसपास जापान की यात्रा पर जाएंगे. जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच घातक झड़पों के बाद उनके द्विपक्षीय संबंध गंभीर तनाव में आ गए थे.
दोनों देशों के बीच जल्द होगी सीधी उड़ान सेवा
एनएसए डोभाल ने पिछले दिसंबर में चीन की यात्रा की थी और वांग के साथ विशेष प्रतिनिधि वार्ता की थी. इससे कुछ सप्ताह पहले प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी ने रूसी शहर कज़ान में एक बैठक में दोनों पक्षों के बीच विभिन्न वार्ता तंत्रों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया था. पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ और उस वर्ष जून में गलवान घाटी में हुई झड़पों के परिणामस्वरूप द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया. पिछले साल 21 अक्टूबर को हुए एक समझौते के तहत डेमचोक और देपसांग के अंतिम दो घर्षण बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह गतिरोध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया. मोदी-शी की बैठक भारत और चीन द्वारा देपसांग और डेमचोक के लिए एक विघटन समझौते को मजबूत करने के दो दिन बाद हुई. दोनों पक्षों ने संबंधों के पुनर्निर्माण के लिए कई पहल भी शुरू कीं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करना और नई दिल्ली द्वारा चीनी नागरिकों को पर्यटक वीजा जारी करना शामिल है. दोनों पक्ष दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू करने पर भी चर्चा कर रहे हैं. चीन एससीओ का वर्तमान अध्यक्ष है.
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