Iran-Israel War : इजराइल और ईरान के बीच हुई सीधी सैन्य झड़प ने दुनिया को यह एहसास करा दिया कि छद्म युद्ध अब खुली टकराहट में बदल सकता है. ईरान ने 7 देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया.
- अरुण गंगवार की रिपोर्ट
Iran-Israel War : इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने मिडिल ईस्ट की नींद उड़ा दी है. शनिवार की सुबह जहां एक तरफ अमेरिका-इजराइल ने मिलकर तेहरान पर मिसाइल से हमला किया और दूसरी तरफ कुछ देर बाद ही ईरान ने चुनौती देने के बाद 7 देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया. कई वीडियो सामने आए हैं जिसमें देखा गया है कि ईरान ने घातक हमले किए हैं. इसी बीच इजराइल ने भी ‘Lion’s Roar’ ऑपरेशन का एलान कर दिया है. वहीं, इससे पहले जून 2025 में इजराइल और ईरान के बीच हुई सीधी सैन्य झड़प ने दुनिया को यह एहसास करा दिया कि छद्म युद्ध अब खुली टकराहट में बदल सकता है. यह पहला बड़ा मौका था जब दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने दिखीं. इस टकराव ने एक तरफ इज़रायल की तकनीकी और एयर पावर की क्षमता को उजागर किया, तो दूसरी ओर ईरान की मिसाइल और ड्रोन ताकत को भी दुनिया के सामने दिखीं.
इसी बीच अब सवाल यह कि अमेरिका ने खुलकर इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करना शुरू कर दिया है. साथ ही ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है और 7 देशों में पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया. क्या अब ये लड़ाई सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित रहेगी या विश्व युद्ध की घंटी है? ऐसे में ये जानना जरूरी है कि युद्द में उतर चुके देशों की सेनाएं आखिर कितनी ताकतवर हैं!
ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स 2025
ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स के अनुसार 2025 में इज़रायल लगभग 15वें और ईरान 16वें स्थान पर हैं. इस इंडेक्स में कम ‘पावर स्कोर’ बेहतर सैन्य क्षमता को दर्शाता है. दोनों देशों की रैंकिंग लगभग बराबर है, जो यह संकेत देती है कि क्षेत्रीय स्तर पर दोनों शक्तियां बेहद सक्षम हैं. लेकिन उनकी ताकत की प्रकृति अलग है. इज़राइल तकनीक, एयर पावर और इंटेलिजेंस में आगे है, जबकि ईरान आकार, जनसंख्या और क्षेत्रीय नेटवर्क में बढ़त रखता है.
जनसंख्या और मानव संसाधन
ईरान की आबादी लगभग 8.8 करोड़ से अधिक है, जबकि इज़रायल की आबादी करीब 95 लाख के आसपास है. साथ ही ईरान के पास 6 लाख सक्रिय और 3.5 लाख रिजर्व सैनिक है. दूसरी तरफ इजराइल 1.7 लाख सक्रिय और 4.5 लाख रिजर्व सैनिक हैं. इजराइल में अनिवार्य सैन्य सेवा लागू है, जिससे उसके रिजर्व सैनिक अत्यधिक प्रशिक्षित और तुरंत सक्रिय किए जा सकते हैं. यही वजह है कि कम आबादी के बावजूद इज़रायल की सेना तेज प्रतिक्रिया और उच्च समन्वय के लिए जानी जाती है. लेकिन सवाल यह भी है कि गाज़ा में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण इजराइल की पैदल सेना ईरान के खिलाफ ज्यादा ताकत न दिखा पाए.
दोनों देशों का रक्षा बजट
बजट के मामले में इजराइल ईरान से काफी आगे है. इजराइल जहां सेना के साजो सामान पर 25–30 अरब डॉलर वार्षिक खर्च करता है. वहीं, ईरान अपनी सेना पर 10–15 अरब डॉलर खर्च करता है. हालांकि, ईरान की सैन्य क्षमता पर सबसे ज्यादा असर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से पड़ता है. इसके अलावा इजराइल अपनी सेना पर अधिक खर्च करने के साथ रक्षा प्रणालियों के लिए भी मशहूर है, जिसमें मुख्य रूप से Iron Dome, David’s Sling और Arrow शामिल है. इन प्रणालियों ने ईरान से आए अधिकांश रॉकेट और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया था.
इज़रायल की टेक्नोलॉजिकल में बढ़त
- इज़रायल के पास लगभग 600 सैन्य विमान हैं, जिनमें आधुनिक मल्टीरोल फाइटर जेट और प्रिसीजन स्ट्राइक क्षमता शामिल है.
- ईरान के पास लगभग 500 विमान हैं, लेकिन उनमें से कई पुराने मॉडल के हैं. प्रतिबंधों के कारण स्पेयर पार्ट्स और अपग्रेड में दिक्कतें आई हैं.
- हालांकि, ईरान ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति की है. उसकी लंबी दूरी की मिसाइलें इज़रायल के अंदर तक मार करने में सक्षम मानी जाती हैं.
थल सेना और हथियार
- ईरान के पास 1500+ टैंक, बड़ी संख्या में आर्टिलरी और रॉकेट लॉन्चर हैं.
- इज़रायल के पास 1200–1300 टैंक, उन्नत सक्रिय सुरक्षा प्रणाली हैं.
ईरान का ‘Axis of Resistance’ नेटवर्क
- Hezbollah (लेबनान).
- Hamas (गाज़ा).
- इराक और सीरिया में शिया मिलिशिया.
- यमन में हौती विद्रोही.
अमेरिकी सैन्य क्षमता
- 13 लाख सक्रिय सैनिक और 8 लाख रिजर्व.
- रक्षा बजट 997 अरब डॉलर है.
- 13,000 एयरक्राफ्ट.
- 11 एयरक्राफ्ट कैरियर.
- 5000 से ज्यादा परमाणु हथियार.
इस युद्ध में अगर प्रत्यक्ष रूप से अमेरिका की एंट्री होती है तो समीकरण पूरी तरह से बदल जाएंगे. यूनाइटेड स्टेट्स दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकत है. अमेरिकी की सबसे बड़ी ताकत ग्लोबल प्रोजेक्शन है, जो दुनिया के किसी भी हिस्से में तेजी से सैन्य कार्रवाई कर सकता है. दूसरी तरफ Russia और China ईरान के साथ रणनीतिक रिश्ते रखते हैं, लेकिन वे खुलकर युद्ध में उतरने से बचते दिखते हैं. दोनों देश अमेरिका से सीधी टकराहट से बचना चाहते हैं. लेकिन दोनों देश बैकडोर से तकनीक, खुफिया सहयोग या हथियार मदद कर सकते हैं. लेकिन खुली सैन्य भागीदारी फिलहाल असंभव दिखती है.
निष्कर्ष
US–Israel बनाम ईरान का संभावित युद्ध सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं होगा. यह पश्चिम एशिया के भविष्य, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, और महाशक्ति संतुलन का सवाल होगा. ईरान के पास आकार, जनसंख्या और क्षेत्रीय नेटवर्क की ताकत है. वह लंबी लड़ाई झेलने की क्षमता रखता है. इज़रायल तकनीक, एयर पावर और इंटेलिजेंस में बहुत आगे है. उसकी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस और तेज प्रतिक्रिया क्षमता उसे शुरुआती बढ़त देती है. लेकिन अमेरिका असली गेम चेंजर है. अगर United States पूरी ताकत से मैदान में उतरता है, तो सैन्य संतुलन इज़रायल के पक्ष में झुक जाएगा. फिर भी युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि आर्थिक स्थिरता, जनसमर्थन, क्षेत्रीय गठजोड़ और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी निर्णायक होते हैं. यही वजह है कि फिलहाल सभी पक्ष सीमित टकराव तक ही खुद को रोकने की कोशिश कर रहे हैं.
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