Home राज्यDelhi विवेक विहार हादसों से नहीं लिया सबक, यमुनापार में धड़ल्ले से खड़ी हो रहीं अवैध बहुमंजिला इमारतें

विवेक विहार हादसों से नहीं लिया सबक, यमुनापार में धड़ल्ले से खड़ी हो रहीं अवैध बहुमंजिला इमारतें

by Live Times 2 June 2026, 6:44 PM IST
2 June 2026, 6:44 PM IST
विवेक विहार हादसों से नहीं लिया सबक, यमुनापार में धड़ल्ले से खड़ी हो रहीं अवैध बहुमंजिला इमारतें

Delhi News: विवेक विहार में आग लगने से छह लोगों की मौत और सैदुलाजाब में इमारत गिरने से हुई मौतों ने दिल्ली में अवैध निर्माण के खतरनाक खेल को बेनकाब कर दिया है. लेकिन इन हादसों के बाद भी राजधानी में मौत का यह कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा. यमुनापार के कई इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं. दिल्ली के अशोक नगर और सीलमपुर इलाकों में मंगलवार को लाइव टाइम्स की टीम पहुंची. पहले टीम सीलमपुर पहुंची, जहां कई बहुमंजिला इमारतें खस्ताहाल स्थिति में खड़ी हैं. इन इमारतों में दरारें साफ दिखाई दे रही थीं और कई जगह निर्माण मानकों की अनदेखी के आरोप हैं.

हर वक्त बना रहता है खतरा

संकरी गलियों और कमजोर ढांचे वाली ये इमारतें किसी भी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना के दौरान गिर सकती हैं. ऐसे में यहां रहने वाले सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में है. सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार एजेंसियां इन खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई कब करेंगी. इसके बाद टीम न्यू अशोक नगर इलाके में पहुंची, जहां बड़ी संख्या में ऐसे बहुमंजिला मकान खड़े हैं जो निर्माण नियमों पर सवाल खड़े करते हैं. इलाके में कई इमारतें पांच, छह और उससे अधिक मंजिल तक बनी हुई दिखाई देती हैं. जबकि एमसीडी के नियमों के अनुसार सामान्य रिहायशी प्लॉटों पर निर्माण की एक निर्धारित सीमा तय है और भवन निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शे का पालन करना अनिवार्य होता है.

जिम्मेदारों पर अनदेखी का आरोप

आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है. आग लगने या भूकंप जैसी आपदा की स्थिति में यहां बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है. इसके बावजूद इलाके में लगातार ऊंची इमारतों का निर्माण जारी है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन निर्माण कार्यों की निगरानी करने वाली एजेंसियां क्या कर रही हैं और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई कब होगी.

इस मामले में एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, भवन निर्माण से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों की नियमित रूप से निगरानी की जाती है और शिकायत मिलने पर संबंधित संपत्तियों को नोटिस जारी किए जाते हैं. एमसीडी का कहना है कि जहां भी अवैध निर्माण पाया जाता है, वहां सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई नियमानुसार की जाती है.

अधिकारियों के खिलाफ तय हो जवाबदेही

अधिकारियों ने यह भी कहा कि लोगों से अपील की जाती है कि वे भवन निर्माण से पहले स्वीकृत नक्शा और सभी आवश्यक अनुमतियां जरूर प्राप्त करें. साथ ही, अवैध निर्माण की जानकारी मिलने पर संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके. आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली में अवैध निर्माण की समस्या लंबे समय से चली आ रही है और इसके लिए संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए. पार्टी का आरोप है कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद कई जगह निर्माण कार्य जारी रहते हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है. आप नेताओं का कहना है कि अवैध निर्माण के मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

पार्टी का कहना है कि लोगों की जान से जुड़ा यह मुद्दा राजनीति से ऊपर है और सभी एजेंसियों को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए. साथ ही, जिन इलाकों में खतरनाक और जर्जर इमारतें हैं, उनका सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके. विवेक विहार की आग और सैदुलाजाब में इमारत गिरने जैसे हादसे सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन लापरवाहियों की चेतावनी है जो कभी भी सैकड़ों परिवारों की जिंदगी उजाड़ सकती हैं.

सीलमपुर से लेकर न्यू अशोक नगर तक का हाल

सीलमपुर से लेकर न्यू अशोक नगर तक कई इलाकों में ऐसी इमारतें खड़ी हैं जिनकी मजबूती और वैधता दोनों पर सवाल हैं. बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन अगली त्रासदी का इंतजार कर रहा है या फिर समय रहते इन ‘मौत की इमारतों’ पर कार्रवाई होगी. क्योंकि जब इमारतें गिरती हैं, तो सिर्फ दीवारें नहीं टूटतीं, बल्कि कई घरों के सपने और अपनों की जिंदगी भी मलबे में दब जाती है. अब देखना यह है कि जिम्मेदार एजेंसियां चेतावनी को गंभीरता से लेती हैं या फिर किसी नए हादसे के बाद एक बार फिर जांच और कार्रवाई के दावे ही सुनाई देंगे.

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  • शालिनी झा की रिपोर्ट

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