Home Latest News & Updates 2027 से पहले पंजाब कांग्रेस में बदलाव की आहट! नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों से गरमाई सियासत

2027 से पहले पंजाब कांग्रेस में बदलाव की आहट! नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों से गरमाई सियासत

by Live Times 2 June 2026, 5:40 PM IST
2 June 2026, 5:40 PM IST
2027 से पहले पंजाब कांग्रेस में बदलाव की आहट! नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों से गरमाई सियासत

Punjab Politics: पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की चर्चाएं तेज हैं. दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की लगातार बैठकों, निकाय चुनावों में खराब प्रदर्शन और नेताओं के बीच बढ़ती गुटबाजी ने इस बहस को और हवा दे दी है. हालांकि कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष बदलने की अटकलों को खारिज किया है, लेकिन पार्टी के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर मंथन जारी है. दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर चार दिनों के भीतर दूसरी हाईलेवल बैठक हुई, जिसमें पंजाब कांग्रेस की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई.

संगठन को एकजुट रखना चुनौती

बैठक में पंजाब प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल रहे. माना जा रहा है कि कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन बनाना है. वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा दोनों सिख समुदाय से आते हैं. ऐसे में पार्टी के भीतर हिंदू और सिख नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने के लिए संगठनात्मक फेरबदल की चर्चा चल रही है. इन अटकलों को हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने भी बल दिया है.

चुनाव में कांग्रेस की गुटबाजी आई सामने

चुनावों में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 958 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 1399 सीटों से घटकर 397 सीटों तक सिमट गई. वहीं भाजपा ने भी अपनी स्थिति मजबूत करते हुए 49 से बढ़कर 172 सीटें हासिल कर लीं. इन परिणामों ने कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरियों और अंदरूनी चुनौतियों को उजागर कर दिया है. पार्टी के भीतर लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के अलग-अलग शक्ति केंद्र होने की चर्चा होती रही है. दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान नेताओं के बीच मतभेदों की खबरों ने भी नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को और तेज कर दिया.

सूत्रों के मुताबिक यदि भविष्य में संगठनात्मक बदलाव होता है तो पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला प्रदेश अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा प्रताप बाजवा, परगट सिंह, अरुणा चौधरी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और चरणजीत सिंह चन्नी की भूमिकाओं को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जारी हैं.

बयानबाजी से बचने की सलाह

हालांकि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी बड़े बदलाव के बजाय सामूहिक नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती पर जोर देता दिखाई दे रहा है. राहुल गांधी पहले ही पंजाब के नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने और टीम भावना के साथ काम करने की सलाह दे चुके हैं. ऐसे में कांग्रेस की प्राथमिकता गुटबाजी खत्म कर संगठन को मजबूत बनाना और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत रणनीति तैयार करना है. आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस के भीतर कई अहम राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं.

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  • खुशबू सिंह की रिपोर्ट

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