Home Latest News & Updates 49 साल पहले पीएम ने खत्म किया था भारत का सर्वोच्च सम्मान, जानें भारत रत्न की अनसुनी कहानी

49 साल पहले पीएम ने खत्म किया था भारत का सर्वोच्च सम्मान, जानें भारत रत्न की अनसुनी कहानी

by Neha Singh 12 July 2026, 8:00 PM IST (Updated 12 July 2026, 8:07 PM IST)
12 July 2026, 8:00 PM IST (Updated 12 July 2026, 8:07 PM IST)
Bharat Ratna

Bharat Ratna Suspension: भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है. यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने साइंस, आर्ट, लिटरेचर, पब्लिक सर्विस और देश के लिए उत्कृष्ट योगदान दिया है. यह लाखों भारतीयों के लिए गर्व की बात है. हालांकि, बहुत कम ही लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब इस अवॉर्ड को खत्म कर दिया गया था. करीब 49 साल पहले लिए गए इस फैसले ने देश भर में एक बड़ी बहस छेड़ दी थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उस समय में ऐसे बयान दिये थे, जिन्होंने राजनीति में हंगामा खड़ा कर दिया था.

इस स्टोरी में, हम जानेंगे कि भारत रत्न कब शुरू हुआ, किन हालात में इसे बंद कर दिया गया और आखिर में यह फिर से देश के सबसे बड़े सिविलियन सम्मान के तौर पर कैसे वापस आया. यह भारत रत्न की दिलचस्प और कम चर्चित कहानी है, जिसे हर भारतीय को जरूर जानना चाहिए.

क्यों बंद हुआ था भारत रत्न

1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद देश की राजनीति अस्थिर हो गई थी. आम चुनाव हुए तो कांग्रेस बुरी तरह हार गई. पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी, जिसका नेतृत्व जनता पार्टी ने किया. मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने. सत्ता में आने के बाद 13 जुलाई, 1977 को नई सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया और भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री समेत सभी नागरिक पुरस्कारों को खत्म कर दिया. मोरारजी देसाई का मानना ​​था कि नागरिकों को सम्मान देने वाली कोई भी सरकार पूरी तरह से निष्पक्ष नहीं हो सकती और उस पर भेदभाव या राजनीतिक असर पड़ सकता है. ऐसे पुरस्कार लोकतांत्रिक शासन में व्यक्तिपूजा को बढ़ावा देते हैं.

सरकार ने तर्क दिया कि लोग इन अवॉर्ड्स को अपने नाम के साथ टाइटल के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, जो बराबरी के अधिकार का उल्लंघन करता है और समाज में भेदभाव पैदा करता है. उनका मानना ​​था कि जनता खुद किसी व्यक्ति के काम का सम्मान करती है, इसलिए सरकारी अवॉर्ड की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए.

इंदिरा गांधी ने फिर शुरू किया अवार्ड

इस फैसले का नतीजा यह हुआ कि किसी को भी कोई भी नागरिक सम्मान देना बंद कर दिया गया. यह भारतीय इतिहास का एक अनोखा दौर था, जब देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान देने की परंपरा कुछ सालों के लिए पूरी तरह से रुक गई थी. हालांकि, यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रही. जनवरी 1980 में आम चुनावों के बाद, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में वापस आई. नई सरकार का मानना ​​था कि देश के लिए असाधारण योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित करना जरूरी है. इससे समाज को बेहतरीन काम करने की प्रेरणा मिलेगी और अपने महान लोगों के योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता मिलेगी. इसी सोच को ध्यान में रखते हुए, 25 जनवरी, 1980 को सरकार ने भारत रत्न और दूसरे सिविलियन सम्मान को देना फिर से शुरू कर दिया. इन अवॉर्ड की परंपरा फिर से शुरू हुई. हालांकि कुछ सालों तक किसी को भी भारत रत्न नहीं दिया गया, लेकिन यह अवॉर्ड कभी पूरी तरह से बंद नहीं हुआ.

दोबारा हुआ विवाद

1992 के मध्य में इस पुरस्कार को फिर से रोक दिया गया, जब दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं, एक केरल उच्च न्यायालय में और दूसरी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में, पुरस्कारों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई. तर्क दिया गया कि ये अवॉर्ड्स भारतीय संविधान के आर्टिकल 18(1) का उल्लंघन करते हैं. संविधान का यह आर्टिकल “टाइटल्स को खत्म करने” का प्रावधान है, जो सरकार को मिलिट्री और एजुकेशनल क्षेत्रों को छोड़कर किसी भी नागरिक को कोई खास टाइटल देने से रोकता है. मुकदमा खत्म होने के बाद दिसंबर 1995 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुरस्कारों की वैधता को बरकरार रखा गया और तब से यह बिना रुके जारी हैं.

कब हुई थी शुरुआत

भारत रत्न 2 जनवरी, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा शुरु किया गया था. शुरुआत में यह अवॉर्ड सिर्फ कला, साहित्य, विज्ञान और पब्लिक सर्विस में शानदार योगदान के लिए दिया जाता था. बाद में, इसका दायरा बढ़ाकर इसमें इंसानियत के किसी भी क्षेत्र में असाधारण कामयाबी हासिल करने वाले लोगों को शामिल किया गया. भारत रत्न किसी प्रोफेशन तक सीमित नहीं है. इसे साइंटिस्ट, टीचर, कलाकार, खिलाड़ी, सोशल वर्कर, राजनेता और दूसरे क्षेत्रों में शानदार योगदान देने वालों को दिया जा सकता है.

पुरस्कार पाने वालों को राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक सनद (प्रमाणपत्र) और एक पवित्र अंजीर के पत्ते के आकार का पदक मिलता है. भारत रत्न पाने वालों को वरीयता के भारतीय क्रम में सातवां स्थान मिलता है. यह पुरस्कार गैर-भारतीयों को भी मिल सकता है. 1992 में नेल्सन मंडेला जैसे विदेशी नागरिक को भी यह अवॉर्ड दिया गया, जिससे यह साफ हो गया कि भारत भी उन विदेशी हस्तियों को सम्मानित कर सकता है जिन्होंने इंसानियत के लिए शानदार योगदान दिया है. भारत के प्रधानमंत्री भारत रत्न के लिए राष्ट्रपति को नामों की सिफारिश करते हैं. एक साल में केवल तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न से सम्मानित किया जा सकता है.

भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति को मिलती हैं ये सुविधाएं

भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति को राष्ट्रपति एक खास सर्टिफिकेट (सनद) और पीपल के पत्ते के आकार का एक तांबे, कांसे और प्लैटिनम से बना पदक देते हैं. पदक के पीछे की तरफ चांदी या कांसे का बना अशोक स्तंभ होता है और उसके नीचे ‘सत्यमेव जयते’ लिखा होता है. इस सम्मान का इस्तेमाल नाम के पहले या बाद में टाइटल के तौर पर नहीं किया जा सकता. कई लोगों को लगता है कि भारत रत्न मिलने वाले को कैश प्राइज भी मिलता है, लेकिन ऐसा नहीं है. भारत रत्न और पद्म पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति को कोई भी कैश प्राइज नहीं मिलता है. बल्कि उन्हें देश के सबसे बड़े VVIPs जैसी सुविधाएं जीवनभर के लिए मिलती हैं.

उन्हें एयर इंडिया की फ्लाइट्स में लाइफटाइम फ्री एग्जीक्यूटिव क्लास ट्रैवल, इंडियन रेलवे में फ्री AC-1 ट्रैवल और एयरपोर्ट्स पर सिक्योरिटी चेक से छूट मिलती है. उन्हें देश के ऑफिशियल सरकारी प्रोटोकॉल (टेबल ऑफ प्रिसिडेंस) में 7A रैंक दिया गया है, जो उन्हें चीफ जस्टिस और पूर्व राष्ट्रपति के ठीक बाद रखता है. इसके अलावा उन्हें पार्लियामेंट मीटिंग्स और रिपब्लिक डे जैसे नेशनल सेरेमनी में स्पेशल गेस्ट के तौर पर सबसे आगे की लाइन में सीट भी दी जाती है. अवॉर्ड पाने वालों को मैरून रंग के डिप्लोमैटिक पासपोर्ट दिए जाते हैं, जिससे उन्हें विदेश यात्रा के दौरान इंडियन एम्बेसी से VIP मदद मिलती है. भारत के किसी भी राज्य में ट्रैवल करने पर, उन्हें राज्य सरकार द्वारा “स्टेट गेस्ट” का स्टेटस दिया जाता है, जिसके तहत राज्य सरकार उनके रहने, खाने और सिक्योरिटी का पूरा खर्च उठाती है. इसके अलावा, उन्हें खतरे या जरूरत के आधार पर, गृह मंत्रालय सले Z या Z प्लास कैटेगरी की सुरक्षा दी जाती है.

अब तक 53 लोगों को मिला भारत रत्न

भारत सरकार ने अब तक 53 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया है.

वर्षप्राप्तकर्तामुख्य पद / क्षेत्र
1954सी. राजगोपालाचारीभारत के अंतिम गवर्नर-जनरल और स्वतंत्रता सेनानी
1954डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनभारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति
1954डॉ. सी. वी. रमननोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक वैज्ञानिक (रमन प्रभाव)
1955डॉ. भगवान दासप्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी
1955डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैयामहान सिविल इंजीनियर और मैसूर के दीवान
1955जवाहरलाल नेहरूभारत के प्रथम प्रधानमंत्री
1957गोविंद वल्लभ पंतस्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री
1958डॉ. धोंडो केशव कर्वेमहान समाज सुधारक (महिला कल्याण और शिक्षा)
1961डॉ. बिधान चंद्र रॉयविख्यात चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री
1961पुरुषोत्तम दास टंडनस्वतंत्रता सेनानी और हिंदी भाषा के प्रमुख समर्थक
1962डॉ. राजेंद्र प्रसादभारत के प्रथम राष्ट्रपति
1963डॉ. जाकिर हुसैनभारत के तीसरे राष्ट्रपति और शिक्षाविद्
1963डॉ. पांडुरंग वामन काणेविख्यात भारतविद् (Indologist) और संस्कृत विद्वान
1966लाल बहादुर शास्त्री (मरणोपरांत)भारत के दूसरे प्रधानमंत्री
1971इंदिरा गांधीभारत की पहली महिला प्रधानमंत्री
1975वी. वी. गिरिभारत के चौथे राष्ट्रपति
1976के. कामराज (मरणोपरांत)स्वतंत्रता सेनानी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री
1980मदर टेरेसानोबेल शांति पुरस्कार विजेता और समाज सेविका
1983आचार्य विनोबा भावे (मरणोपरांत)भूदान आंदोलन के प्रणेता और स्वतंत्रता सेनानी
1987खान अब्दुल गफ्फार खानस्वतंत्रता सेनानी (प्रथम गैर-भारतीय / “फ्रंटियर गांधी”)
1988एम. जी. रामचंद्रन (मरणोपरांत)अभिनेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री
1990डॉ. बी. आर. अंबेडकर (मरणोपरांत)भारतीय संविधान के निर्माता और समाज सुधारक
1990नेल्सन मंडेलादक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति और रंगभेद विरोधी नेता
1991राजीव गांधी (मरणोपरांत)भारत के पूर्व प्रधानमंत्री
1991सरदार वल्लभभाई पटेल (मरणोपरांत)भारत के प्रथम गृह मंत्री (लौह पुरुष)
1991मोरारजी देसाईभारत के पूर्व प्रधानमंत्री
1992जे. आर. डी. टाटाविख्यात उद्योगपति और परोपकारी
1992सत्यजीत रेविश्व प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक
1992मौलाना अबुल कलाम आजाद (मरणोपरांत)भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी
1997गुलजारीलाल नंदा (मरणोपरांत)भारत के पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री
1997अरुणा आसफ़ अली (मरणोपरांत)स्वतंत्रता सेनानी और प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता
1997डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाममहान वैज्ञानिक (“मिसाइल मैन”) और 11वें राष्ट्रपति
1998एम. एस. सुब्बुलक्ष्मीविख्यात कर्नाटक शास्त्रीय संगीत गायिका
1998चिदंबरम सुब्रमण्यमपूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री (हरित क्रांति के राजनीतिक प्रणेता)
1999जयप्रकाश नारायण (मरणोपरांत)स्वतंत्रता सेनानी और संपूर्ण क्रांति के समाजवादी नेता
1999प्रो. अमर्त्य सेननोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री
1999पंडित रविशंकरविश्व प्रसिद्ध सितार वादक और संगीतकार
1999गोपीनाथ बोरदोलोई (मरणोपरांत)असम के प्रथम मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी
2001लता मंगेशकरभारत की स्वर कोकिला और पार्श्व गायिका
2001उस्ताद बिस्मिल्लाह खानविश्व प्रसिद्ध शहनाई वादक
2009पंडित भीमसेन जोशीमहान हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत गायक
2014सचिन तेंदुलकरमहान भारतीय क्रिकेटर (सबसे युवा प्राप्तकर्ता)
2014प्रो. सी. एन. आर. रावविख्यात वैज्ञानिक (रसायन विज्ञान)
2015अटल बिहारी वाजपेयीभारत के पूर्व प्रधानमंत्री
2015पंडित मदन मोहन मालवीय (मरणोपरांत)महान शिक्षाविद् और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के संस्थापक
2019प्रणब मुखर्जीभारत के 13वें राष्ट्रपति
2019नानाजी देशमुख (मरणोपरांत)प्रसिद्ध समाज सुधारक और जनसंघ नेता
2019भूपेन हजारिका (मरणोपरांत)विख्यात गीतकार, संगीतकार और गायक
2024जननायक कर्पूरी ठाकुर (मरणोपरांत)बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी नेता
2024लालकृष्ण आडवाणीभारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री
2024चौधरी चरण सिंह (मरणोपरांत)भारत के 5वें प्रधानमंत्री और किसान नेता
2024पी. वी. नरसिम्हा राव (मरणोपरांत)भारत के 9वें प्रधानमंत्री (आर्थिक सुधारों के जनक)
2024डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन (मरणोपरांत)महान कृषि वैज्ञानिक (भारत में हरित क्रांति के जनक)

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