Bullet Train: दिल्ली से आगरा महज 59 मिनट में पूरी हो सकेगी. प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है. इससे व्यापार के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन परियोजना के ‘नॉर्थ कॉरिडोर’ (उत्तरी गलियारे) को मंजूरी दे दी है. इससे कई लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है. वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्य का पूरा कॉन्सेप्ट यानी पिलर से लेकर गर्डर तक भारत में ही तैयार किया जाएगा.
बुलेट ट्रेन से बदल जाएगी जिंदगी
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ होगा, जिसे भारत के युवाओं और वेल्डरों द्वारा बनाया जाएगा. वाराणसी और नई दिल्ली के बीच नई ‘वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस’ सेवा को हरी झंडी दिखाने से पहले वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर को मंजूरी दी है, जो कई लोगों की जिंदगी बदल देगा. बुलेट ट्रेन को लेकर प्रधानमंत्री का जो विजन है, उससे युवाओं, मध्यम आय वर्ग और छोटे उद्योगों से जुड़े कारीगरों को बहुत फायदा होगा. इस पहल के लिए लोग प्रधानमंत्री मोदी को अगले 100 सालों तक याद रखेंगे.
दिल्ली से आगरा महज 59 मिनट में
उन्होंने नॉर्थ कॉरिडोर के रूट के बारे में विस्तार से बताया. यह रूट दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ेगा और गुवाहाटी तक जाएगा. वैष्णव के अनुसार, यात्रा के समय में काफी कमी आएगी: दिल्ली से कानपुर की यात्रा में 1 घंटा 45 मिनट, दिल्ली से आगरा में 59 मिनट और दिल्ली से लखनऊ में 2 घंटे 12 मिनट का समय लगेगा. इसके अलावा, लखनऊ से वाराणसी की यात्रा में 1 घंटा 21 मिनट लगेंगे, जबकि वाराणसी से दिल्ली की यात्रा में 3 घंटे 35 मिनट का समय लगेगा. शनिवार को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी से नई ‘वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस’ सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो वाराणसी और नई दिल्ली के बीच चलेगी.
रात के लिए वंदे भारत स्लीपर बेहतरीन सेवा
उन्होंने कहा कि वंदे भारत स्लीपर रात भर के सफर के लिए एक बेहतरीन सेवा है. इसे बहुत सावधानी से डिज़ाइन किया गया है. डिज़ाइन प्रक्रिया के दौरान हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखा गया है. लोको पायलटों के लिए शौचालय की सुविधा है. बीच की तथा ऊपरी बर्थ तक पहुंचने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है. अगर आप ट्रेन के अंदर देखेंगे, तो पाएंगे कि इसमें एक अलग पैंट्री एरिया और सामान रखने के लिए अलग जगह दी गई है. बर्थ पर चढ़ने के लिए लगाई गई सीढ़ियों को लेकर भी पूरा ध्यान रखा गया है, ताकि यात्री आसानी से ऊपर चढ़ सकें. ऊपरी और निचली बर्थ पर मौजूद यात्रियों के लिए अलग-अलग चार्जिंग पॉइंट दिए गए हैं. हर चीज़ को यात्रियों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है. इसके अलावा, ट्रेन क्रू और लोको स्टाफ के लिए भी अलग सीटें हैं. अगर आप कोच के आखिरी हिस्से को देखेंगे तो वहां स्टाफ के लिए विशेष रूप से जगह बनाई गई है.
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News Source: ANI
