Home Top News सभी CAPF कर्मियों के लिए लागू होंगी समान सेवा शर्तें, हंगामे के बीच राज्यसभा में बिल पास

सभी CAPF कर्मियों के लिए लागू होंगी समान सेवा शर्तें, हंगामे के बीच राज्यसभा में बिल पास

by Sanjay Kumar Srivastava
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सभी CAPF कर्मियों के लिए लागू होंगी समान सेवा शर्तें, हंगामे और बहिष्कार के बीच ध्वनिमत से राज्यसभा में बिल पास

CAPF Bill: राज्यसभा ने बुधवार को विपक्ष के हंगामे और बहिष्कार के बीच ध्वनि मत से ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ को अपनी मंजूरी दे दी.

CAPF Bill: राज्यसभा ने बुधवार को विपक्ष के हंगामे और बहिष्कार के बीच ध्वनि मत से ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ को अपनी मंजूरी दे दी. इस विधेयक में पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के लिए मौजूदा अलग-अलग सेवा नियमों के स्थान पर एक एकीकृत और सुव्यवस्थित कानूनी ढांचे को मंजूरी दी गई है. इस कानून से अब सभी CAPF कर्मियों के लिए समान सेवा शर्तें लागू हो सकेंगी. विपक्ष के विरोध और सदन से वॉकआउट के बावजूद चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने स्पष्ट किया कि इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य बलों की दक्षता और जवानों के मनोबल को बढ़ाना है. उन्होंने उन चिंताओं को खारिज कर दिया जिनमें इसे राज्यों के अधिकारों का हनन बताया जा रहा था.

भर्ती प्रक्रिया होगी पारदर्शी

राय ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे और मजबूत करेगा. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी और सेवाओं के प्रबंधन को बेहतर करेगी. इस कानून से अब सभी CAPF कर्मियों के लिए समान सेवा शर्तें लागू हो सकेंगी. विधेयक में प्रावधान है कि CAPF में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति के लिए 50 प्रतिशत पद महानिरीक्षक स्तर पर और न्यूनतम 67 प्रतिशत पद अतिरिक्त महानिदेशक स्तर पर प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे. प्रस्तावित कानून को सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में यह कहकर खारिज कर दिया था कि केंद्र सरकार द्वारा सीएपीएफ में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड के स्तर तक आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जाए.

हर छह महीने में होगी कैडर समीक्षा

इसके अलावा सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (SAG) को उत्तरोत्तर कम किया जाना चाहिए और छह महीने में कैडर समीक्षा करने के लिए कहा जाना चाहिए. इसी फैसले के बाद केंद्र ने इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया. विपक्ष ने विधेयक को संसद के एक चुनिंदा पैनल को भेजने की मांग करते हुए बहिर्गमन किया. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सदस्य चाहते थे कि विधेयक संसद की एक चयन समिति के पास जाए. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी के बीच सदन का वाकआउट किया. खड़गे को जवाब देते हुए सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष पर संसदीय प्रक्रियाओं का अनादर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि विपक्ष को बहस में कोई दिलचस्पी नहीं है. संसदीय प्रक्रिया के प्रति उनके मन में कोई सम्मान नहीं है.

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News Source: PTI

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