Weather change: भारत में पारंपरिक रूप से मई का महीना चिलचिलाती धूप और भीषण लू (Heat wave) के लिए जाना जाता है. लेकिन वर्तमान में देश का मौसम पूरी तरह अप्रत्याशित और विरोधाभासी हो गया है. एक तरफ देश के कुछ हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ अचानक आ रहे विनाशकारी आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है. 13 मई को उत्तर प्रदेश, दिल्ली-NCR, बिहार और मध्य प्रदेश सहित 14 से अधिक राज्यों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवा और बिजली गिरने से भारी जान-माल का नुकसान हुआ. मई में कभी अचानक ठंडक का अहसास होना और उसके तुरंत बाद जून में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चेतावनी यह बदलता मिजाज वैज्ञानिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है.
- मई में भीषण आंधी, तूफान और बारिश के वैज्ञानिक कारण
- अलनीनो का भारत पर प्रभाव
- मई में ‘ठंड’ और जून में ‘अंगारे’: ऐसा क्यों हो रहा है?
- मौसम परिवर्तन के अन्य प्रमुख कारक
- वैश्विक तापमान में वृद्धि और ग्रीनहाउस गैसें
- आर्द्रता में वृद्धि दिल के मरीजों के लिए खतरनाक
- मानव जीवन पर चौतरफा प्रभाव
- क्या है अल नीनो?
- भारत के लिए यह चिंता का विषय क्यों है?
मई में भीषण आंधी, तूफान और बारिश के वैज्ञानिक कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मई के महीने में इस उथल-पुथल के पीछे कई जटिल वायुमंडलीय प्रणालियों (Weather Systems) की परस्पर क्रिया है. इसमें पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) मुख्य कारक है. भूमध्य सागर से उठने वाली ये ठंडी हवाएं आमतौर पर सर्दियों में उत्तर भारत में बारिश लाती हैं. इस बार मई के मध्य में भी तीव्र पश्चिमी विक्षोभ लगातार सक्रिय हैं, जो मैदानी इलाकों के मौसम को बार-बार बदल रहे हैं.
ये भी पढ़ेंः असम में तूफान से भारी तबाही: गुवाहाटी में बाढ़ जैसे हालात, एक की मौत, बिहू उत्सव में भगदड़
मई की तेज गर्मी के कारण मैदानी इलाकों की धरती अत्यधिक गर्म हो जाती है, जिससे वहां कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Zone) बनता है. इसी समय अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी से भरी हवाएं जब इस गर्म हवा से टकराती हैं तो विशाल कपासी मेघ (Cumulonimbus Clouds) बनते हैं. यही तीव्र आंधी, बिजली चमकने और अचानक भारी बारिश का मुख्य कारण है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में एक साथ सक्रिय हुए चक्रवाती तंत्रों के कारण हवाओं का रुख लगातार बदल रहा है, जिससे तटीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में मौसम अस्थिर बना हुआ है.

अल नीनो का भारत पर प्रभाव
प्रशांत महासागर की सतह के गर्म होने की घटना को अलनीनो कहा जाता है, इस बार भारत के मौसम को बेहद प्रभावित कर रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर की गहराई में तापमान तेजी से बढ़ रहा है. इस ‘सुपर अलनीनो’ या तेजी से विकसित हो रहे अलनीनो के कारण सामान्य मौसमी चक्र पूरी तरह टूट गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और वैश्विक एजेंसियों के अनुसार, अलनीनो के सक्रिय होने से जून से सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने की आशंका बढ़ गई है. इसके चलते देश के बड़े हिस्से में सूखे जैसी स्थिति या बारिश में लंबा सूखा अंतराल देखने को मिल सकता है. अलनीनो और वैश्विक तापमान में वृद्धि मिलकर मौसम को अत्यधिक उग्र बना रहे हैं, जिसके कारण मई में बेमौसम की भारी बारिश और ओले गिर रहे हैं.
मई में ‘ठंड’ और जून में ‘अंगारे’: ऐसा क्यों हो रहा है?
यह विरोधाभास कि मई में कभी-कभी रातें ठंडी हो रही हैं और जून में अत्यधिक गर्मी का अनुमान है, सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का परिणाम है. लगातार आ रहे आंधी-तूफान और बादलों की मोटी परत के कारण सूरज की किरणें सीधे धरती तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे अधिकतम तापमान में गिरावट आती है और कुछ दिनों के लिए मई में मौसम सामान्य से ठंडा हो जाता है. जैसे ही ये अस्थिर मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ेंगी, वैसे ही सौर विकिरण और अलनीनो का संयुक्त प्रभाव देश पर हावी हो जाएगा. जून में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अत्यधिक तीव्र और लंबी अवधि वाली लू चलने का पूर्वानुमान है, जो मानव के लिए असहनीय होगा.
ये भी पढ़ेंः भीषण लू और गर्मी से कैसे बचें? इन योगाभ्यासों को आज ही करें शुरू, अपनाएं दिनभर का यह हेल्दी रूटीन
मौसम परिवर्तन के अन्य प्रमुख कारक
मौसम में आ रहे इन बदलावों के पीछे प्रकृति और इंसानी गतिविधियों से जुड़े कई अन्य कारक हैं, जो सीधे तौर पर हमारे दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं.

वैश्विक तापमान में वृद्धि (Global Warming) और ग्रीनहाउस गैसें
औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी गैसें पृथ्वी के वायुमंडल में गर्मी को रोक रही हैं. इसके कारण हीटवेव की बारंबारता बढ़ गई है, जिससे डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और श्रम उत्पादकता में भारी गिरावट (विशेषकर निर्माण और कृषि क्षेत्रों में) हो रही है. जंगल, डामर की सड़कें और पेड़ों की कमी के कारण शहर ग्रामीण इलाकों की तुलना में रात के समय भी ठंडे नहीं हो पाते और अत्यधिक गर्म बने रहते हैं. इससे शहरी आबादी में मानसिक तनाव, अनिद्रा और बिजली की खपत (एसी/कूलर का उपयोग) अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे ऊर्जा संकट पैदा होता है.
आर्द्रता में वृद्धि दिल के मरीजों के लिए खतरनाक
तापमान बढ़ने के साथ-साथ हवा में नमी धारण करने की क्षमता बढ़ रही है. जब उच्च तापमान के साथ उच्च आर्द्रता मिलती है, तो उसे ‘वेट बल्ब तापमान’ कहा जाता है. ऐसी स्थिति में मानव शरीर का पसीना नहीं सूखता, जिससे शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता. यह स्थिति दिल के मरीजों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो रही है.पृथ्वी के ध्रुवों के गर्म होने के कारण ऊपरी वायुमंडल में चलने वाली ‘जेट स्ट्रीम’ हवाएं अपनी सामान्य दिशा से भटक रही हैं. इसके कारण मौसम प्रणालियां एक ही स्थान पर लंबे समय तक ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे या तो हफ्तों तक लगातार सूखा पड़ता है या फिर कुछ ही घंटों में अत्यधिक भारी बारिश हो जाती है.
ये भी पढ़ेंः तपती गर्मी के बीच दिल्ली-NCR में इंद्रदेव की मेहरबानी, ओले और बारिश ने पलटा मौसम का मिजाज
मानव जीवन पर चौतरफा प्रभाव
मौसम के इस बदलते चक्रव्यूह का असर जीवन के हर पहलू पर पड़ रहा है. मई में ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से कटी हुई और तैयार फसलें (जैसे आम, दलहन और सब्जियां) बर्बाद हो रही हैं. वहीं जून का सूखा खरीफ फसलों (धान, कपास) की बुआई को प्रभावित करेगा. अनियमित वर्षा और जून की भीषण गर्मी के कारण भूजल स्तर और जलाशयों का पानी तेजी से सूखेगा, जिससे पेयजल की भारी किल्लत हो सकती है.
क्या है अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. स्पेनिश भाषा में अल नीनो का अर्थ ‘छोटा लड़का’ या ‘बाल यीशु’ होता है, क्योंकि पेरू के मछुआरों ने सबसे पहले क्रिसमस के आसपास समुद्र के इस असामान्य तापमान को महसूस किया था. यह घटना पूरी दुनिया के मौसम चक्र को बदल देती है, जिसके परिणामस्वरूप कहीं भयंकर सूखा पड़ता है तो कहीं अत्यधिक वर्षा और बाढ़ आती है.

यह कैसे घटित होता है?
सामान्य दिनों में प्रशांत महासागर में पूर्व से पश्चिम की ओर मजबूत व्यापारिक पवनें चलती हैं. ये हवाएं गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ ले जाती हैं, जिससे दक्षिण अमेरिका (पेरू) के तट पर नीचे से ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर आता है. अल नीनो वर्ष में ये व्यापारिक पवनें कमजोर पड़ जाती हैं या अपनी दिशा बदल लेती हैं. इसके कारण गर्म पानी पश्चिम की ओर न जाकर भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र (पेरू के निकट) में ही जमा रहता है और समुद्र का तापमान बढ़ जाता है. समुद्र के गर्म होने से वायुमंडलीय दबाव बदलता है, जिससे बादलों और बारिश का पूरा पैटर्न ही बदल जाता है. यह चक्र आमतौर पर हर 2 से 7 साल में एक बार प्रकट होता है.
ये भी पढ़ेंः दिल्ली की गर्मी में फिर आया उबाल! पर No टेंशन; अगले दो दिन झमाझम बारिश के आसार
भारत के लिए यह चिंता का विषय क्यों है?
अल नीनो के कारण नमी से भरी मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे भारत में वर्षा का स्तर सामान्य से काफी कम रह जाता है. भारत की लगभग आधी खेती सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर है. अल नीनो के कारण सूखा पड़ने से धान, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आती है. अल नीनो वैश्विक तापमान को बढ़ा देता है, जिससे भारत में गर्मी के महीनों में रिकॉर्डतोड़ तापमान और जानलेवा लू का प्रकोप बढ़ जाता है.
ये भी पढ़ेंः केरल में 40°C के पार पहुंचा पाराः सड़कें हुईं सूनी, सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक धूप में न निकलने की चेतावनी
उधर, 13 मई की शाम नागपुर के भीलगांव इलाके में अचानक बारिश और तेज हवाओं के दौरान बिजली गिरने से 15 वर्षीय लड़के की मौत हो गई. घटना में उसका दोस्त घायल हो गया. घटना शाम करीब 5:45 बजे यशोधरा नगर पुलिस सीमा के तहत हस्तिनापुर रोड पर हुई. एक अधिकारी ने बताया कि दोनों लड़कों ने बारिश से बचने के लिए एक नीम के पेड़ के नीचे शरण ली थी, तभी अचानक पेड़ पर बिजली गिरी. मृतक की पहचान भीलगांव के तिवारी नगर निवासी उज्ज्वल सुनील भेलावे (15) के रूप में हुई और वह 10वीं कक्षा का छात्र था. वह मौके पर मर गया. उसका दोस्त देवांश कपूरचंद पारधी (14) कक्षा 9 का छात्र, घायल हो गया. उसे पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

भारत में मई और जून का यह बदलता मौसम महज़ एक अस्थायी घटना नहीं, बल्कि वैश्विक जलवायु संकट की एक गंभीर चेतावनी है. इससे निपटने के लिए दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाना अब अनिवार्य हो चुका है.
ये भी पढ़ेंः हीट वेव से जंग: लू से अब नहीं जाएगी किसी की जान, केंद्र ने तैयार किया देश के लिए मास्टर प्लान
Follow Us On: Facebook | X | LinkedIn | YouTube | Instagram
