E85 Fuel Benefits and Disadvantages: भारत बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को कम करने के लिए ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ रहा है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सोलर एनर्जी के साथ ही सरकार अब ग्रीन फ्यूल को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दे रही है. भारत सरकार ने 2023 में E20 फ्यूल लॉन्च किया था और तीन सालों के बाद ही अब सीधा E85 लॉन्च किया है. यह इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना और मक्का जैसी दूसरी कृषि फसलों से बनता है. सरकार का कहना है कि E85 जैसे बायोफ्यूल न सिर्फ भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता कम करेंगे, बल्कि वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करेंगे.
ऐसे समय में जब दुनिया भर में युद्ध के कारण कच्चे तेल और नैचुरल गैस की किल्लत हो रही है, भारत भी इस संकट से जूझ रहा है. इसलिए बायोफ्यूल को लाना भारत के लिए एक अहम रणनीति माना जा रहा है. हालांकि, इस ग्रीन फ्यूल को लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी हैं, जैसे- क्या E85 फ्यूल आम ग्राहक के लिए सस्ता होगा, E85 फ्यूल आ जाने के बाद आपकी E20 वाली गाड़ियों का क्या होगा, E85 फ्यूल पेट्रोल-डीजल की तुलना में कितना इकोफ्रेंडली है. E85 फ्यूल का एक पहलू यह भी है कि इससे गाड़ी की माइलेज में कमी आ जाती है. ऐसे में यह आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है. चलिए समझते हैं कि आखिर यह E85 फ्यूल क्या है, सरकार का इसको लेकर क्या प्लान है और आम आदमी को इससे क्या फायदा या नुकसान होगा.

क्या है E85 फ्यूल
केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे पर नई दिल्ली में इंडियनऑयल के एक रिटेल आउटलेट पर E85 फ्यूल को लॉन्च किया है. E85 फ्यूल एक हाई-इथेनॉल ब्लेंड है जिसे फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए डिजाइन किया गया है. यह फ्यूल शुरू में कुछ खास पेट्रोल पंपों पर मिलेगा और इसका इस्तेमाल सिर्फ फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में ही किया जा सकेगा. इसकी शुरुआत देश भर के 48 पब्लिक सेक्टर फ्यूल स्टेशनों से होगी. उन्होंने कहा कि सरकार दिसंबर 2026 तक इसे 500 आउटलेट तक और दिसंबर 2027 तक लगभग 5,000 आउटलेट तक बढ़ाने की योजना बना रही है.
फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों में ही इस्तेमाल हो सकता है E85
E85 में 80-85 प्रतिशत इथेनॉल और 14-19 प्रतिशत पेट्रोल होता है और इसका इस्तेमाल सिर्फ उन फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों में किया जा सकता है जो E20 से E100 तक के इथेनॉल ब्लेंड पर चल सकती हैं. पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि E85 इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से 2030-31 तक भारत का कुल इथेनॉल ब्लेंडिंग लेवल लगभग 26 परसेंट तक बढ़ने में मदद मिलेगी. सरकार ने फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए इसकी कीमत भी पेट्रोल से कम रखी है.
उन्होंने इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के बारे में चिंताओं को भी दूर करने की कोशिश की, यह कहते हुए कि E85 खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए है और E20 के नेशनल स्टैंडर्ड फ्यूल बनने के बाद से इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े किसी भी इंजन फेलियर की कोई रिपोर्ट नहीं आई है. मंत्री ने राज्य सरकारों से E85 फ्यूल और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए फायदेमंद टैक्सेशन पॉलिसी के जरिए इस बदलाव में मदद करने की अपील की और इथेनॉल को भारत की एनर्जी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम हिस्सा बताया.

पेट्रोल से सस्ता होगा E85
यह नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले 20 रुपये प्रति लीटर कम कीमत पर मिलेगा, जिसका मकसद घरेलू तौर पर बनाए गए इथेनॉल का फायदा कंज्यूमर्स को देना है. मिनिस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, E85 पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां आम पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले लाइफसाइकल ग्रीनहाउस गैस एमिशन को करीब 61 परसेंट तक कम कर सकती हैं. इथेनॉल की ज्यादा ऑक्टेन रेटिंग से इंजन की परफॉर्मेंस भी बेहतर होती है और पार्टिकुलेट एमिशन काफी कम होता है, जिससे इंजन ज्यादा साफ-सुथरा चलता है.
फॉरेन एक्सचेंज में हुई बचत
पुरी ने कहा कि भारत ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट के उतार-चढ़ाव से कंज्यूमर्स को बचाते हुए एनर्जी सिक्योरिटी, अफोर्डेबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी के बीच सफलतापूर्वक बैलेंस बनाया है. फरवरी 2026 के बाद से घरेलू फ्यूल की कीमतों में दुनिया भर में सबसे कम बढ़ोतरी देखी गई है. मंत्री ने कहा कि भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 2014 के 1.53 परसेंट से बढ़ाकर अभी 20 परसेंट कर दिया है, जिससे यह तय समय से पांच साल पहले अपना टारगेट हासिल कर लिया है. उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम से फॉरेन एक्सचेंज में 1.84 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की बचत हुई है और कच्चे तेल के इंपोर्ट में लगभग 302 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है.
किसानों को होगा फायदा
पुरी ने कहा कि अगर भारत में बिकने वाले सभी नए टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों में से आधे फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी पर शिफ्ट हो जाते हैं, तो सालाना इथेनॉल की डिमांड 312 करोड़ लीटर से ज़्यादा बढ़ सकती है, जिससे किसानों को करीब 12,403 करोड़ रुपये की एक्स्ट्रा इनकम होगी. इस बदलाव से सालाना करीब 15,151 करोड़ रुपये फॉरेन एक्सचेंज भी बच सकता है और कार्बन डाइऑक्साइड एमिशन में 66.4 लाख मीट्रिक टन की कमी आ सकती है. ब्राजील से तुलना करते हुए, जहां 80 परसेंट से ज़्यादा हल्की गाड़ियां फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी पर चलती हैं, पुरी ने कहा कि भारत पायलट प्रोजेक्ट से एक स्ट्रक्चर्ड नेशनल फ्लेक्स-फ्यूल इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है.

E85 फ्यूल से गाड़ी की माइलेज कितनी कम होगी
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, E20 फ्यूल से गाड़ी की माइलेज में 6 से 7 % की गिरावट आती है. यानी आपकी गाड़ी पेट्रोल के मुकाबले कम दूरी तय कर पाती है. अब E85 फ्यूल में इथेनॉल 85 प्रतिशत तक होने के कारण गाड़ी का माइलेज और कम हो जाएगा. अमेरिका की सरकारी संस्था US Environmental Protection Agency (EPA) के मुताबिक, यूएस में E85 फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों का माइलेज पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों के मुकाबले 20 से 30 प्रतिशत कम है. अब समझिए ऐसा क्यों होता है.
पेट्रोल से जितना ऊर्जा घनत्व मिलता है, उतना इथेनॉल से नहीं मिलता. इथेनॉल पर्यावरण के लिए साफ है, लेकिन इसकी कैलोरिफिक वैल्यू (फ्यूल से मिलने वाली ऊर्जा) कम होती है. इंजन को एक निर्धारित दूरी तय करने के लिए पेट्रोल से ज्यादा इथेनॉल जलाना पड़ता है. यानी पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल की ज्यादा खपत होती है. उदाहरण के साथ समझें तो, अगर आपकी मोटरसाइकल एक लीटर पेट्रोल पर 15 किलोमीटर चलती है, तो एक लीटर E85 फ्यूल डलवाने के बाद आपकी बाइक केवल 10 से 12 किलोमीटर ही चल पाएगी. यानी आपकी गाड़ी का माइलेज कम हो जाएगा.
क्या सच में पैसे बचाएगा E85 फ्यूल
माइलेज कम होने का मतलब है कि आपको ज्यादा बार फ्यूल भरवाने की जरूरत होगी. जितना ज्यादा आप फ्यूल भरवाएंगे, उतना ही आपका खर्च भी बढ़ेगा. यानी E85 की कीमत कम होने का यह मतलब नहीं है कि आम आदमी को सीधा आर्थिक फायदा होगा. E85 से आम आदमी को कुछ खास फायदा नहीं होगा. इसे एक उदाहरण से समझिए. मान लीजिए की आपकी गाड़ी एक लीटर पेट्रोल में 15 किलोमीटर चलती है और E85 फ्यूल में 10 से 12 किलोमीटर चलेगी. तो इससे फायदा नहीं बल्कि नुकसान हो सकता होने की संभावना है.
| फ्यूल का प्रकार | फ्यूल की कीमत (प्रति लीटर) | गाड़ी का माइलेज (किमी/लीटर) | 50 किमी के लिए जरूरी फ्यूल | कुल खर्च (50 किमी का) | आम आदमी को फायदा / नुकसान |
|---|---|---|---|---|---|
| नॉर्मल पेट्रोल | ₹100 | 15 किमी/लीटर | ~3.33 लीटर | ₹333.33 | — |
| E85 (बेहतर स्थिति) | ₹80 (₹20 सस्ता) | 12 किमी/लीटर | ~4.17 लीटर | ₹333.33 | ₹0 (बराबर खर्च) |
| E85 (औसत स्थिति) | ₹80 (₹20 सस्ता) | 11 किमी/लीटर | ~4.55 लीटर | ₹364.00 | ₹30.67 का नुकसान |
| E85 (खराब स्थिति) | ₹80 (₹20 सस्ता) | 10 किमी/लीटर | 5.00 लीटर | ₹400.00 | ₹66.67 का नुकसान |
इस टेबल को पढ़कर आप अनुमान लगा सकते हैं कि जितना आपकी गाड़ी का माइलेज घटेगा, आपको उतना ही नकुसान होगा. 12 किलोमीटर की माइलेज में आपका खर्च बराबर रहेगा और 10 किलोमीटर के माइलेज पर आपको 67 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है.
भारत में किन कंपनियों ने लॉन्च की हैं फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां
भारत में E85 फ्यूल पर चलने वाली फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियां अभी बहुत की सीमित संख्या में लॉन्च की गई हैं. भारत में अब सभी नई कारें और मोटरसाइकिलें E20 फ्यूल ट्यूनिंग के साथ आ रही हैं. यानी अब गाड़ियों का इंजन 20 प्रतिशत तक के इथेनॉल को आसानी से झेल सकता है. वहीं सरकार ने साफ कहा है कि E85 से E100 फ्यूल केवल फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों के लिए कम्पैटिबल है. शुद्ध फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां, जो 85% से लेकर 100% तक एथेनॉल पर चल सकती हैं, भारत के बाजार में अभी बिल्कुल शुरुआती दौर में हैं. केवल इन व्हीकल कंपनियों ने फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की शुरुआत की है.

Maruti Suzuki– Maruti Suzuki ने जून 2026 में कमर्शियल सेगमेंट के लिए देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, Wagon R फ्लेक्स-फ्यूल लॉन्च की है.
इसके अलावा, गिक्सर SF 250 FFV बाइक पहले से ही मार्केट में मौजूद है, जो E85 फ्यूल पर चल सकती है.
Hero MotoCorp – हाल ही में लॉन्च हुई Splendor + Flex Fuel और HF Deluxe Flex Fuel मोटरसाइकिल E85 फ्यूल कम्पैटिबल हैं, यानी वे इस फ्यूल पर चल सकती हैं.
इसके अलावा Toyota (Innova Hycross), Tata (Punch) और Hyundai (Creta) जैसी कंपनियों ने अपने प्रोटोटाइप और मॉडल दिखाए हैं जो जल्द ही बड़े पैमाने पर सड़कों पर दिखाई देंगे. समय के साथ और बढ़ती जरूरत को देखते हुए और भी कंपनियां E85 कम्पैटिबल वाली गाड़ियों को लॉन्च कर सकती हैं.
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