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आतंकवाद पर घिरा तो UN में रोने लगा पाकः हरीश के तीखे तेवरों ने वैश्विक मंच पर ऐसे उड़ाईं धज्जियां

by Sanjay Kumar Srivastava 9 June 2026, 8:00 PM IST
9 June 2026, 8:00 PM IST
आतंकवाद पर घिरा तो UN में रोने लगा पाकिस्तानः भारतीय राजनयिकों के तीखे तेवरों ने वैश्विक मंच पर ऐसे उड़ाईं धज्जियां

United Nations: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सोमवार को भारत ने पाकिस्तान के ‘कश्मीर राग’ और दुष्प्रचार को पूरी तरह से ध्वस्त कर उसे वैश्विक आतंकवाद का मुख्य केंद्र करार दिया है. संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंचों पर पाकिस्तान द्वारा लगातार फैलाए जा रहे झूठ का जवाब देते हुए भारतीय प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक बयानों के पीछे अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने और वैश्विक समुदाय को गुमराह करने की एक सोची समझी रणनीति काम कर रही है.

UN में पाकिस्तान का दुष्प्रचार

पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) जैसी वैश्विक संस्थाओं को अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग करता है. पाकिस्तान के इस निरंतर दुष्प्रचार के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण काम करते हैं.

आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाएं

पाकिस्तान इस समय गहरे आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती महंगाई का सामना कर रहा है. इन बुनियादी समस्याओं से अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तानी सेना और उसकी सरकार हर समय ‘भारत विरोधी’ और ‘कश्मीर राग’ अलापती रहती है ताकि देश में राष्ट्रवाद की झूठी भावना बनी रहे.

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कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश

अगस्त 2019 में भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. वह दुनिया को यह दिखाने की कोशिश करता है कि कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय विवाद है, जबकि भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित सभी मामले पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है.

अपनी आतंकवादी छवि सुधारने का प्रयास

दुनिया जानती है कि पाकिस्तान आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह है. वैश्विक मंच पर भारत के खिलाफ मानवाधिकार की दुहाई देकर पाकिस्तान पीड़ित होने का दिखावा करता है ताकि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) जैसी संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं के सामने अपनी छवि सुधार सके.

संयुक्त राष्ट्र में भारत का करारा जवाब

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान के हर झूठ का जोरदार खंडन किया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने हाल के सत्रों में पाकिस्तान के कार्यों को ‘नफरत की संगठित फैक्ट्री’ करार दिया है जो केवल भारत के खिलाफ शत्रुता पैदा करने के लिए धार्मिक शब्दावली का दुरुपयोग करता है.

पाकिस्तान का दुष्प्रचार: पाक कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताता है. जम्मू-कश्मीर भारत का एक अखंड और संप्रभु हिस्सा है. मानवाधिकार उल्लंघन का झूठा दावा करता है.

पाकिस्तान को ऐतिहासिक तथ्यों से खेलना बंद करना चाहिए

भारतीय राजदूत ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान द्वारा की गई खोखली बयानबाजी और झूठे दावे इतिहास के बुनियादी तथ्यों को नहीं बदल सकते. जम्मू-कश्मीर में हुए लोकतांत्रिक चुनाव और वहां का आर्थिक विकास इसकी गवाही देते हैं.

पाकिस्तान के लिए लोकतंत्र एक अज्ञात शब्द है

भारत ने UNSC की खुली बहस में पाकिस्तान को आईना दिखाया और कहा कि जिस देश में लोकतंत्र एक ‘विदेशी अवधारणा’ है और जहां सेना शासन करती है, उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.

पीओके में मानवाधिकारों का उल्लंघन

भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान में भयावह मानवाधिकार उल्लंघन, सेना की क्रूरता और सार्वजनिक विद्रोह का मुद्दा उठाकर पाकिस्तान को बैकफुट पर ला दिया है. पाकिस्तान न सिर्फ कूटनीतिक मोर्चे पर दुष्प्रचार करता है, बल्कि वह भारतीय धरती पर आतंकवाद को बढ़ावा देने की अपनी पुरानी हरकतों से भी बाज नहीं आ रहा है. हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (बैसरन घाटी) में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई, जिसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंची. इस हमले के तार सीधे तौर पर सीमा पार बैठे आकाओं से जुड़े पाए गए.

आतंकी संगठनों का नाम बदलना

अंतर्राष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए पाकिस्तान अपने पालतू आतंकवादी संगठनों को नए धार्मिक और भ्रामक नाम जैसे ‘फितना अल हिंदुस्तान’ देकर बचाने की कोशिश करता है, जिसे भारत ने पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है.

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वैश्विक प्रतिबंधों का उल्लंघन

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित 20 से अधिक आतंकवादी संगठन और उनके नेता अभी भी पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के संरक्षण में खुलेआम घूम रहे हैं और भारत के खिलाफ साजिश रच रहे हैं.

‘बदला हुआ भारत’: आतंकवाद के खिलाफ सख्त सैन्य नीति

भारत की वर्तमान आतंकवाद-विरोधी नीति में अब केवल राजनयिक विरोध शामिल नहीं है. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय संप्रभुता और नागरिकों पर कोई भी आतंकवादी हमला युद्ध की घोषणा माना जाएगा. भारत ने सीमा पार आतंकियों के ठिकानों को तबाह करने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई है. भारतीय रक्षा मंत्रालय और सेना ने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ जैसे दंडात्मक और केंद्रित हवाई हमलों के माध्यम से पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया है.

आत्मरक्षा का अधिकार

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दृढ़ता से कहा कि भारत को किसी भी गैर राज्य या आतंकवादी संगठन द्वारा किए गए हमलों के खिलाफ खुद को बचाने के लिए सीमा पार कार्रवाई करने का पूर्ण अंतरराष्ट्रीय अधिकार है. पाकिस्तान वर्तमान में (2025-2026 कार्यकाल के लिए) सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है, लेकिन वह इस गरिमामय मंच का उपयोग केवल अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों और विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है. इसके विपरीत, वैश्विक समुदाय ने पाकिस्तान के इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.

सुरक्षा परिषद् द्वारा निंदा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने स्वयं जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि आतंकवादियों के वित्तपोषकों और प्रायोजकों को न्याय के दायरे में लाया जाए.

पड़ोसी देशों से भी विवाद

पाकिस्तान न केवल भारत के लिए बल्कि उसके अन्य पड़ोसियों (जैसे अफगानिस्तान) के लिए भी एक समस्या बना हुआ है. अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी सेना की बमबारी और हवाई हमलों में बच्चों और महिलाओं की मौत ने उसके क्रूर चेहरे को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है.

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पाकिस्तान का दोहरा चरित्र सामने

पाकिस्तान चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब उसके खोखले दावों और ‘दोहरे मानकों’ को समझ चुका है. भारत ने अपनी आर्थिक ताकत, मजबूत लोकतंत्र और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के साथ वैश्विक मंच पर साबित कर दिया है कि कश्मीर मुद्दा कोई अंतरराष्ट्रीय विवाद नहीं है बल्कि पाकिस्तान द्वारा जबरन कब्जा किया गया क्षेत्र (पीओके) है और इसे खाली करना ही एकमात्र एजेंडा बचा है. यदि पाकिस्तान को एक सामान्य देश के रूप में मान्यता देनी है तो उसे अपनी नफरत की फैक्ट्री बंद करनी होगी और आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल करना बंद करना होगा.

पाकिस्तान के सैन्य हवाई हमलों की निंदा

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतानेनी ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान के सैन्य हवाई हमलों के अभियान से बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हो रहे हैं. हिंसा के ऐसे कृत्य अफगानिस्तान की संप्रभुता पर एक ज़बरदस्त हमला और क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं. अफगान क्षेत्र पर पाकिस्तानी हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत ने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राज्य संप्रभुता के सिद्धांत का घोर उल्लंघन हैं.

पर्वतानेनी ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि इस साल के पहले तीन महीनों में ही 372 नागरिक मारे गए हैं और 397 घायल हुए हैं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मेज पर कहा कि कोई आस्था, कोई कानून और कोई नैतिकता ऐसे कार्यों को उचित नहीं ठहरा सकती. पाकिस्तान की बात सुनने के बाद भारत ने दृढ़ता से दोहराया कि किसी नरसंहार को सैन्य अभियान का जामा पहनाने से अपराधी बरी नहीं हो जाता. नागरिकों को मारना, अपंग करना और अनाथ करना आतंकवाद का मुकाबला नहीं है.

पड़ोसियों को दोषी ठहराना पुरानी आदत

पर्वतानेनी ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने के दौरान बेरहमी से हवाई हमले करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता के उच्च सिद्धांतों का समर्थन करना पाखंड का आदर्श उदाहरण है. उन्होंने कहा कि अपनी विफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोषी ठहराना पाकिस्तान की पुरानी आदत है. दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की यह कोशिश नाकाम होगी।

नफरत की फैक्ट्री है ‘फितना अल हिंदुस्तान’

भारत ने अपनी सीमाओं के अंदर के समूहों को ‘फितना अल हिंदुस्तान’ के रूप में संदर्भित करना शुरू करने के पाकिस्तान के निर्देशों को भी दृढ़ता से खारिज कर दिया. इसे भारत के खिलाफ ‘नफरत की संगठित फैक्ट्री’ का परिणाम बताया. पर्वतानेनी ने इस तरह के कदम को आधिकारिक तौर पर प्रायोजित गलत सूचना और धार्मिक शब्दावली का जामा पहनाकर दुष्प्रचार बताया.’फितना अल हिंदुस्तान’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तानी सरकार बलूचिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के लिए करती है.

भारतीय दूत ने कहा कि यह पाकिस्तान के महत्वपूर्ण राज्य से आने वाली नफरत की एक संगठित फैक्ट्री का परिणाम है, जिसका उद्देश्य अपने नागरिकों को सत्ता में बने रहने और राष्ट्रीय संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए भारत के साथ स्थायी शत्रुता की स्थिति में रखना है. उन्होंने कहा कि 27वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से सेना द्वारा वास्तविक तख्तापलट इसकी सबसे हालिया अभिव्यक्ति है.

पर्वतानेनी पिछले साल नवंबर में प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन का संदर्भ दे रहे थे, जो पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर को किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट देता है. इसके अलावा, भारत ने पाकिस्तान द्वारा अफगान व्यापारियों पर थोपे गए व्यापार और पारगमन आतंकवाद की भी निंदा की और इसे विश्व व्यापार संगठन के मानदंडों का उल्लंघन बताया.

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