Home Top News क्या है H-1B Visa, जिसके लिए ट्रंप वसूलते ₹95 लाख? अब कोर्ट से भारतीयों को मिली खुशखबरी

क्या है H-1B Visa, जिसके लिए ट्रंप वसूलते ₹95 लाख? अब कोर्ट से भारतीयों को मिली खुशखबरी

by Amit Dubey 9 June 2026, 3:57 PM IST (Updated 9 June 2026, 3:58 PM IST)
9 June 2026, 3:57 PM IST (Updated 9 June 2026, 3:58 PM IST)
H-1B Visa

H-1B Visa: अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को उनके ही देश के कोर्ट से एक बार फिर से झटका लगा है. पिछले साल सितंबर में ट्रंप ने एक फैसला लेते हुए सभी को हैरान कर दिया था कि वे H-1B Visa के लिए आवेदन फीस को बढ़ाकर 1 लाख अमेरिकी डॉलर कर रहे हैं. अभी के हिसाब से एक लाख डॉलर का मतलब 95 लाख भारतीय रुपये से अधिक की राशि. वैसे आमतौर पर H-1B Visa के आवेदन प्रोसेस के लिए 38 हजार रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये तक (460 अमेरिकी डॉलर से लेकर 3000 अमेरिकी डॉलर) की फीस लगती रही है. इसकी फीस उस कंपनी की साइज और सेलेक्शन की प्रक्रिया पर भी निर्भर करती है, जिसमें आप नौकरी करने वाले हैं.

फीस बढ़ाने से सबसे अधिक परेशानी भारतीयों को हुई, जो अमेरिका में काम करने को लेकर H-1B Visa की कुल 100 फीसदी हिस्सेदारी का 71 प्रतिशत हैं. मतलब कि अमेरिकी सरकार साल में जो H-1B Visa जारी करती है, उनके करीब 71 प्रतिशत के भागीदार भारतीय रहते हैं. ट्रंप के द्वारा H-1B वीजा के लिए आवेदन शुल्क को बढ़ाकर 1 लाख अमेरिकी डॉलर करने पर भारतीयों समेत दुनिया के कई लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था.

अब इसमें भारत सहित दुनिया के उन तमाम लोगों को राहत मिली है, जो H-1B वीजा लेने वाले हैं. यह राहत उन्हें अमेरिका की एक अदालत से मिली है. जानकारी के अनुसार, H-1B वीजा पर ट्रंप के द्वारा लगाई गई 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख 47 हजार 670 रुपये) की फीस को रद्द कर दिया गया है. सोमवार को एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा उच्च कुशल श्रमिकों (Highly Skilled Workers) के लिए एच-1बी वीजा पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को रद्द कर दिया.

बता दें कि इससे पहले ट्रंप को फरवरी 2026 में टैरिफ को लेकर कोर्ट से झटका लगा था. तब 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ आदेश के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. इस फैसले में ट्रंप के टैरिफ वाले आदेश को असंवैधानिक करार दिया गया था. इसके बाद अमेरिका के द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर 10 फीसदी का नया और अस्थायी ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया गया. भारत पर यह 10 फीसदी का ही है. ट्रंप अपनी मनमानी करते हुए भारत समेत दुनिया के कई देशों पर 50 फीसदी तक का टैरिफ लगा दिए थे.

अब ट्रंप को ताजा झटका H-1B Visa की बढ़ाई गई फीस को कोर्ट के द्वारा गैरकानूनी बताना है. आइए जानते हैं कि क्या है H-1B Visa, जिसके लिए ट्रंप आगे भी वसूलने वाले थे 1 लाख अमेरिकी डॉलर. इसके साथ ही जानेंगे कि कोर्ट का आया फैसला भारतीयों के लिए कैसे राहत देने वाली खबर है. शुरुआत हम कोर्ट के उस फैसले से ही करेंगे कि आखिरकार यह मामला कोर्ट के पास कैसे गया और अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप के खिलाफ आए इस फैसले पर क्या कहा.

नेतन्याहू ने ट्रंप को दिखाया ठेंगा! इजरायली एयर फोर्स ने ईरान पर किया जवाबी हमला

ट्रंप के फैसले को कोर्ट में मिली थी चुनौती

ट्रंप के द्वारा एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को कोर्ट में चुनौती दी गई थी. वादी पक्ष की ओर से कैलिफोर्निया समेत कुल 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इस नीति को चुनौती दी थी. उन्होंने अस्पतालों और राज्य विश्वविद्यालयों जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों को होने वाले भारी नुकसान का भी हवाला दिया था. इस चुनौती पर सुनवाई करते हुए सोमवार को मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने अपना फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा के लिए आवेदन पर लगाया गया 100000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क गैरकानूनी था क्योंकि इसे कांग्रेस (अमेरिकी संसद)की मंजूरी नहीं मिली थी.

अपने फैसले में जज सोरोकिन ने माना कि एक लाख अमेरिकी डॉलर का यह भुगतान एक अनधिकृत टैक्स की तरह था. प्रशासन ने इसे इमिग्रेशन एंड नेशनालिटी एक्ट के तहत एक “जुर्माना” कहा था. कोर्ट ने साफ किया कि टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ संसद (कांग्रेस) के पास है.

क्या है H-1B वीजा?

अमेरिकी सरकार H-1B वीजा के जरिए हाई स्किल्ड विदेशी प्रोफेशनल्स को अपने यहां नौकरी देती है. मतलब कि अगर आपको अमेरिका में नियम के तहत तय क्षेत्र में काम करना है तो आपको इसके लिए सबसे पहले H-1B वीजा लेना होगा. इसके लिए आपके पास संबंधित क्षेत्र में ग्रेजुएशन या जरूरी हाई डिग्री की योग्यता होनी चाहिए. आसान शब्दों में कहें तो H-1B वीजा उन विदेशी लोगों के लिए है जो अमेरिका में नौकरी करना चाहते हैं या कर रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, H-1B वीजा वैसे तो तीन साल के लिए जारी होता है लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे 6 साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है. आप इस वीजा के लिए तभी आवेदन कर सकते हैं जब आपको किसी अमेरिकी कंपनी या वहां की संस्थान से नौकरी का ऑफर आया हो.

ईरान-इजरायल की नई जंग, मार्केट-रुपया धड़ाम; ट्रंप को नेतन्याहू का ‘ठेंगा दिखाना’ कितना खतरनाक?

हर साल कितना जारी होता है H-1B Visa?

H-1B Visa की बात करें तो इसे अमेरिका ने विदेशी स्किल्ड वर्कर्स के लिए वर्ष 1990 में शुरू किया था. साल 2004 में यह तय हुआ कि हर साल करीब 85 हजार H-1B Visa जारी किया जाएगा. इसकी निगरानी अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के द्वारा की जाती है. साल 2017 में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B Visa के आवेदन को लेकर कड़ाई से जांच शुरू कर दी क्योंकि उनका यह भी मानना है कि इस वीजा का इस्तेमाल अमेरिकी को नुकसान देता है.

ट्रंप ने क्यों बढ़ाई थी आवेदन फीस?

सितंबर 2025 में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B Visa की फीस को बढ़ाने का फैसला किया था. तब उन्होंने 19 सितंबर को H-1B Visa की आवेदन फीस को बढ़ाकर सालाना 1 लाख अमेरिकी डॉलर करने का अहम निर्णय लिया था. इसको लेकर ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर साइन भी किया था.

इसके तहत अमेरिका की ट्रंप सरकार ने बताया था कि H-1B Visa की यह फीस कोई सालाना फीस नहीं है. यह केवल एक बार ली जाने वाली फीस है, जो आवेदन करने के समय ली जाएगी. सरकार ने यह भी साफ किया था कि जिनके पास पहले से ही H-1B Visa है, उनसे यह फीस नहीं ली जाएगी. यहां तक कि जो वीजा धारक अमेरिका से बाहर भी थे तो उन्हें दोबारा वापस आने पर इसके लिए ये फीस नहीं ली जाएगी. ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि यह फीस (H-1B Visa आवेदन के लिए एक लाख डॉलर) केवल नए वीजा लेने पर ही लागू होगी. पुराने वीजा को रिन्यू कराने पर भी यह फीस नहीं ली जाएगी.

अमेरिका में बीते दिनों H-1B Visa की मांग पहले से भी अधिक हो गई है. इसको देखते हुए सरकार ने कई कदम उठाए. इनमें से एक था कि इसकी आवेदन फीस को ही बढ़ा दी जाए ताकि अधिक जरूरत वाले और हाई स्किल्ड वाले ही अप्लाई कर सकें. वहीं, H-1B Visa को लेकर प्रेसिडेंट ट्रंप हमेशा से ये आरोप लगाते रहे हैं कि इस वीजा के जरिए अमेरिका में गैर अमेरिकी लोग, अमेरिकी लोगों की नौकरियां खा जा रहे हैं.

वहीं, सितंबर 2025 में इस वीजा की फीस बढ़ाने का फैसला लेने के बाद व्हाइट हाउस के स्टाफ सचिव विल शार्फ ने कहा था, “सबसे अधिक दुरुपयोग की जाने वाली वीजा सिस्टम में से एक H-1B वीजा गैर-अप्रवासी वीजा प्रोग्राम है. इसका उद्देश्य उन हाई स्किल्ड प्रोफेशनल्स को अमेरिका आने का अनुमति देना है जो उन क्षेत्रों में काम करते हैं जहां अमेरिकी काम नहीं करते.” उन्होंने आगे कहा था, “इस घोषणा से कंपनियों द्वारा H-1B वीजा के आवेदकों को प्रायोजित करने के लिए दी जाने वाली फीस बढ़कर 1 लाख डॉलर हो जाएगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि वे जिन लोगों को ला रहे हैं वे वास्तव में अत्यधिक कुशल हैं और उनकी जगह अमेरिकी कर्मचारी नहीं ले सकते. “

भारतीयों को बड़ी राहत! ट्रंप को कोर्ट से लगा एक और झटका; H-1B वीजा की 1 लाख डॉलर फीस रद्द

कोर्ट के फैसले को व्हाइट हाउस देगा चुनौती

मिली जानकारी के अनुसार, कोर्ट के फैसले को व्हाइट हाउस चुनौती देने का मन बना रहा है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, “एच-1बी कार्यक्रम का दशकों से दुरुपयोग किया जा रहा था और राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार इसे ठीक करने के लिए कार्रवाई की.” उन्होंने आगे कहा, “वाशिंगटन में एक संघीय न्यायाधीश पहले ही लगभग इसी तरह के आदेश को बरकरार रख चुके हैं और प्रशासन को विश्वास है कि अपील पर यह आदेश पलट दिया जाएगा.”

USA कोर्ट से भारतीयों को मिली बड़ी खुशखबरी

USA कोर्ट के इस फैसले से भारतीयों को बड़ी खुशखबरी के साथ राहत मिली है. अमेरिका में भारतीय प्रवासी संगठनों ने एच-1बी वीजा आवेदनों पर लगने वाले एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को रद्द करने के संघीय अदालत के आदेश का स्वागत किया है. फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) के नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कांड ने पीटीआई को बताया, “हम मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत के 100,000 अमेरिकी डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क को रद्द करने के फैसले का स्वागत करते हैं, जो रोजगार-आधारित आव्रजन प्रणाली में पूर्वानुमान और निष्पक्षता को बहाल करता है.”

बता दें कि एच-1बी वीजा से सबसे ज्यादा लाभ भारतीयों को होता है, जो दुनिया भर से बेहतरीन प्रतिभाओं को आकर्षित करता है. भारत के उच्च कुशल पेशेवर भारी संख्या में एच-1बी वीजा लेकर चले जाते हैं, जो कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) द्वारा हर साल 65,0000 अनिवार्य है और इसके अलावा 20,000 उन लोगों के लिए हैं जिन्होंने अमेरिका से उच्च शिक्षा प्राप्त की है.

70 फीसदी से अधिक भारतीय H-1B वीजा धारक

अमेरिका के द्वारा हर साल 85 हजार H-1B Visa जारी किया जाता है. इसको पाने में सबसे अधिक भारतीयों की हिस्सेदारी होती है. रिपोर्ट के अनुसार, H-1B Visa की कुल 100 फीसदी हिस्सेदारी में अकेले भारतीय प्रवासियों की 70 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी होती है. इस वीजा का सबसे अधिक इस्तेमाल टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और अमेजन जैसी दिग्गज टेक कंपनियां करती हैं. इसके जरिए वे भारतीयों को अमेरिका में अपने यहां नौकरी देती रही हैं. कोर्ट के इस फैसले से टेक क्षेत्र में अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों को काफी बड़ी राहत मिली है. इसके अलावा अमेरिका के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इस वीजा के जरिए बहुत से विदेशी नागरिक वहां रहकर नौकरी करते हैं जिन्हें अब राहत मिली है.

आंकड़ों के अनुसार,H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों के बाद दूसरा स्थान चीन के लोगों का है. 11 फीसदी से अधिक चीनी नागरिक इस वीजा का इस्तेमाल करते हैं. इनके अलावा फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया के भी नागरिक शामिल हैं.

ओमान तट पर मर्चेंट जहाज पर बड़ा मिसाइल हमला, ICG से जानें कैसे बचाए गए 24 भारतीय

कोर्ट के फैसले पर क्या बोले अमेरिकी सांसद?

कोर्ट के फैसले पर अमेरिकी सांसदों ने खुशी जाहिर की है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सांसदों, जिनमें कुछ रिपब्लिकन भी शामिल हैं, ने एच-1बी वीजा आवेदनों पर लगने वाले एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को रद्द करने के संघीय अदालत के आदेश का स्वागत किया है. रिपब्लिकन सांसदों ने स्वास्थ्यकर्मियों और शिक्षकों के लिए एच-1बी वीजा पर ध्यान केंद्रित किया, जिनकी विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कमी है, न कि आईटी क्षेत्र पर, जिसे इस वीजा श्रेणी से लाभ होता है.

अलास्का से रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने कहा, “राज्य के ग्रामीण और दूरदराज के हिस्सों में कई स्कूल जिले अपने समुदायों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों को लाने के लिए एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर निर्भर हैं.” उन्होंने कहा कि अलास्का में एच-1बी वीजा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है और उन्होंने यह भी बताया कि अदालत का आदेश ऐसे महत्वपूर्ण समय पर आया है जब स्कूल अगले पतझड़ से पहले भर्तियां कर रहे हैं.

उत्तरी वर्जीनिया के डेमोक्रेट सांसद डॉन बेयर ने X पर एक पोस्ट में कहा, “मुझे खुशी है कि अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के गैरकानूनी एच-1बी वीजा शुल्क को रोक दिया है, जिससे देश भर में पहले से ही कम कर्मचारियों वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर काफी नई लागत और अनावश्यक बोझ पड़ रहा था.”

वहीं, रिपब्लिकन सांसद माइक लॉलर ने अदालत के आदेश का स्वागत किया और कहा कि वह स्वास्थ्यकर्मियों को इस शुल्क से छूट देने के लिए कानून पर काम कर रहे हैं. सांसद ने कहा, “मैं स्वास्थ्यकर्मियों को इस शुल्क से छूट दिलाने के लिए काम कर रहा हूं, जो स्वास्थ्य सेवा में कर्मचारियों की मौजूदा कमी को और बढ़ा देता है. इसीलिए मैंने चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा कार्यबल अधिनियम के लिए द्विदलीय एच-1बी वीजा पेश किया. हम इस विधेयक को कांग्रेस में पारित कराने के लिए प्रयासरत हैं, ऐसे में यह फैसला स्वागत योग्य खबर है.”

क्या अब होगा शांति समझौता? ईरान और इजरायल का सीजफायर! दोनों ने एक-दूसरे पर रोका हमला

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?