Himachal News: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक प्रतिभाशाली छात्र ने अपनी मेहनत और इनोवेशन से बड़ी उपलब्धि हासिल की है. राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर (बड़ू) के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र सर्वेश शर्मा ने भारतीय सेना की सीमा निगरानी से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए एक अत्याधुनिक ड्रोन तैयार किया है. सर्वेश के प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय की ओर से 3.50 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर की गई है. सर्वेश जिला हमीरपुर के गांव बाहनवीं के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल से की है. सीमित संसाधनों के बावजूद सर्वेश ने तकनीक के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है.
सर्वेश की टीम ने जीता चौथा पुरस्कार
सर्वेश ने IIT जोधपुर और कोनार्क कोर की ओर से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की ओपन कार्ड बोर्ड ड्रोन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों की करीब 50 टीमों ने भाग लिया था. इसमें विभिन्न टीमों ने अपने इनोवेटिव आइडिया पेश किए. इसी प्रतियोगिता के दौरान भारतीय सेना की बॉर्डर सर्विलांस से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई. सर्वेश की टीम ने प्रतियोगिता में 10 लाख रुपए का चौथा पुरस्कार हासिल किया. इसके बाद सर्वेश ने सेना की सीमा निगरानी से जुड़ी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ड्रोन विकसित करने पर काम शुरू किया.
अब सेना के लिए तैयार होगा ‘रुद्रा ऐज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’
सर्वेश ने इसके बाद रक्षा मंत्रालय के डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) के प्रोजेक्ट के तहत स्टार्टअप के लिए आवेदन किया था. अब इस प्रोजेक्ट के लिए 3.50 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर कर दी गई है. प्रोजेक्ट के तहत सर्वेश अब ‘रुद्रा ऐज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ ड्रोन विकसित करने पर काम करेगा. दावे के मुताबिक, इसे सीमा पर निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है. इसकी प्रमुख विशेषताओं में दुश्मन के रडार से बचने और जैमर के प्रभाव को निष्प्रभावी करने की क्षमता बताई गई है. रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोडक्शन विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं सीईओ दिनेश माहौर ने सोमवार को प्रोजेक्ट के लिए बजट को मंजूरी प्रदान की.
20 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए सर्वेश को 20 दिन का समय दिया गया है. इसके बाद प्रोजेक्ट का इनक्यूबेशन सेंटर आईआईटी रुड़की में होगा. सर्वेश आईआईटी रुड़की की लैब में इस प्रोजेक्ट पर आगे का काम करेगा. प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए करीब 20 महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. सर्वेश की इस उपलब्धि से उसके परिवार के साथ-साथ राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर और पूरे हिमाचल प्रदेश में खुशी का माहौल है. कॉलेज के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर, कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष समीर भारती और अन्य शिक्षकों ने सर्वेश को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी है.
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