Home Top News भारत की बढ़ी समुद्री ताकत: रक्षा मंत्री ने देश को समर्पित किया अत्याधुनिक ‘INS महेंद्रगिरी’

भारत की बढ़ी समुद्री ताकत: रक्षा मंत्री ने देश को समर्पित किया अत्याधुनिक ‘INS महेंद्रगिरी’

by Sanjay Kumar Srivastava 11 July 2026, 3:10 PM IST
11 July 2026, 3:10 PM IST
हवा, सतह और समुद्र के नीचे दुश्मनों को धूल चटाएगा नया युद्धपोतः देश को समर्पित हुआ अत्याधुनिक 'INS महेंद्रगिरि'

INS Mahendragiri : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम नेवल डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में अत्याधुनिक युद्धपोत ‘INS महेंद्रगिरी’ को भारतीय नौसेना के ईस्टर्न फ्लीट में शामिल किया.’प्रोजेक्ट 17A’ के तहत बना यह छठा स्वदेशी युद्धपोत भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता में एक बड़ा मील का पत्थर है. ईस्टर्न नेवल कमांड में अधिकारियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि यह शक्तिशाली युद्धपोत हवा, सतह (दुश्मन के जहाजों) और समुद्र के नीचे मौजूद पनडुब्बियों से आने वाले सभी खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम है. यह युद्धपोत देश की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा.

युद्धपोत में हैं ये खूबियां

एक ‘ब्लू-वॉटर’ युद्धपोत के तौर पर यह न केवल तट के पास बल्कि दूर और गहरे समुद्र में भी हफ्तों तक भारत के समुद्री हितों की रक्षा कर सकता है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), भारतीय नौसेना, INS महेंद्रगिरी के क्रू और देशवासियों को बधाई देते हुए सिंह ने कहा कि यह युद्धपोत भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. लगभग 6,670 टन के फुल-लोड डिस्प्लेसमेंट और 28 नॉट की अधिकतम गति वाला INS महेंद्रगिरि एक मल्टी-मिशन स्टील्थ फ्रिगेट है, जो सभी तरह के समुद्री ऑपरेशन करने में सक्षम है. इसमें एडवांस्ड स्टील्थ फीचर्स, बेहतर सर्वाइवेबिलिटी, कम रडार सिग्नेचर और हाई-लेवल ऑटोमेशन जैसी खूबियां हैं.

निर्माण में स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत की डिज़ाइन क्षमता, निर्माण में उत्कृष्टता और रक्षा इकोसिस्टम की बढ़ती ताकत को दर्शाता है. INS महेंद्रगिरी पर ब्रह्मोस सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल लगाई जा सकती है, जो दुनिया की सबसे तेज़ और सबसे घातक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है. इसमें मल्टी-फ़ंक्शन रडार, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो लॉन्चर, इंटीग्रेटेड एंटी-सबमरीन डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सुइट और क्लोज़-इन वेपन सिस्टम जैसी कई प्रणालियां लगी हैं.

दुश्मनों को धूल चटाएगा नया युद्धपोत

उन्होंने कहा कि यह फ्रिगेट हवा, सतह और समुद्र के नीचे मौजूद खतरों से निपटने के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा मिशन, खोज और बचाव अभियान, मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशन को भी प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकता है. साथ ही, यह हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भी लंबे समय तक तैनात रह सकता है. इसे ‘ब्लू-वॉटर वॉरशिप’ बताते हुए सिंह ने कहा कि INS महेंद्रगिरी हवा, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों से होने वाले खतरों का मुकाबला कर सकता है. साथ ही, यह न केवल तट के पास बल्कि दूर और गहरे समुद्र में भी हफ़्तों तक भारत के समुद्री हितों की रक्षा कर सकता है.

महेंद्रगिरि पर्वत के नाम पर रखा गया नाम

पूर्वी घाट की महेंद्रगिरी पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया यह युद्धपोत, इस नाम वाला पहला भारतीय नौसैनिक पोत है. महेंद्रगिरि पर्वत की चोटी पर बैठे ‘गोशॉक’ (एक तरह का बाज़) वाले अपने प्रतीक चिह्न का ज़िक्र करते हुए सिंह ने कहा कि यह तेज़ नज़र, असाधारण धैर्य और निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता का प्रतीक है. ये सभी गुण एक फ्रंटलाइन नौसैनिक युद्धपोत में होने चाहिए. रक्षा मंत्री ने कहा कि महेंद्रगिरी के कमीशन होने से भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता और मज़बूत हुई है. साथ ही, यह भारत के एक प्रमुख स्वदेशी युद्धपोत-निर्माता देश के रूप में उभरने को दर्शाता है.

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News Source: PTI

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