Home Latest News & Updates 4 साल पुराने मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 67 लाख देने का आदेश

4 साल पुराने मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 67 लाख देने का आदेश

by Sachin Kumar 11 July 2026, 2:07 PM IST (Updated 11 July 2026, 2:09 PM IST)
11 July 2026, 2:07 PM IST (Updated 11 July 2026, 2:09 PM IST)
Delhi tribunal 67 lakh compensation man killed bus accident

Delhi News : दिल्ली एक्सीडेंट मामले को लेकर ट्रिब्यूनल ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने 33 साल के मोबाइल फोन टेक्नीशियन परिजनों को 67.48 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश सुनाया है. साल 2021 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक बस की टक्कर से टेक्नीशियन की मौत हो गई थी. पीठासीन अधिकारी मनीष शर्मा ने शकील अहमद के परिवार की ओर दायर क्लेम याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान ट्रिब्यूनल ने दुर्घटना करने वाली बस की बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 67,48,200 देने का आदेश दिया.

लापरवाही से चलने का माना दोषी

ट्रिब्यूनल ने 6 जुलाई को सुनाए अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादी नंबर एक को उस समय दुर्घटना करने वाले वाहन को लापरवाही से चलने का दोषी ठहराने के लिए बाध्य है. इसके घटना की वजह से व्यक्ति की मौत हो गई. ट्रिब्यूनल ने माना कि 16 दिसंबर, 2021 को सीलमपुर रेड लाइट के पास एक बस की टक्कर में शकील अहमद का एक्सीडेंट हो गया और इसके बाद मौत हो गई. वहीं, मृतक के परिजनों ने कोर्ट में मुआवजे का दावा कर दिया.

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गलत तरीके से कर रहा था बस को ओवरटेक

बस के ड्राइवर और मालिक ने लापरवाही से इनकार करते हुए दावा किया था कि मरने वाला व्यक्ति गलत तरीके से ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था. इसी बीच वह बस टकरा गया. हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी अपनी बात के समर्थन में कोई सबूत नहीं पेश कर पाया. ट्रिब्यूनल ने माना कि दुर्घटना बस को तेज और लापरवाह तरीके से चलाने के कारण हुई. मुआवजे का भुगतान करने के लिए बीमा कंपनी को जिम्मेदार ठहराया.

30 हजार महीने की कर रहा था कमाई

वहीं, मुआवजा का निर्देश देते समय ट्रिब्यूनल ने इस सबूत को स्वीकार कि मरने वाला व्यक्ति एक्सपर्ट मोबाइल फोन रिपेयर टेक्नीशियन के तौर पर काम कर रहा था. हर महीने 30 हजार रुपये कमाता था. ट्रिब्यूनल ने उन रिकॉर्ड्स पर ध्यान दिया जिनसे पता चलता था कि वह अपने एम्प्लॉयर के साथ बिजनेस के सिलसिले में चीन गया था. ट्रिब्यूनल ने कहा कि मुआवजा देने के लिए याचिकाकर्ता की आय की गणना करते समय आखिरी बार मिली सैलेरी पर ध्यान रखा जाएगा और मरने वाले व्यक्ति की आय की गणा करते समय भी इसे ही आधार माना जाएगा. घटना के समय मरने वाले व्यक्ति की आय 30 हजार रुपये महीना था.

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