Ministers Removal: मोदी सरकार मॉनसून सत्र में 130वां संविधान संशोधन बिल लाने की तैयारी में है, जिसके तहत गंभीर अपराधों में 30 दिनों तक हिरासत में रहने वाले मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री को 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा. इस प्रस्तावित कानून को लेकर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है. पार्टी ने रविवार को स्पष्ट किया कि वह संसद में इस बिल का पुरज़ोर विरोध करेगी.
कांग्रेस को भरोसा है कि सरकार के पास इसे पास कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं होगा. इन प्रावधानों की जांच कर रही संसदीय समिति 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को मंज़ूरी दे सकती है, जिसके बाद इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र में पेश किया जा सकता है. संसद में पेश होने से पहले केंद्रीय कैबिनेट भी इस कानून को मंज़ूरी दे सकती है.
बिल का मकसद विरोधियों को परेशान करना
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि प्रस्तावित कानून का मकसद विरोधियों को राजनीतिक रूप से परेशान करना है. रमेश ने यह भी भरोसा जताया कि गृह मंत्री अमित शाह महिलाओं के लिए आरक्षण देने के मकसद से परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाएंगे. रमेश ने PTI वीडियो से कहा कि वे 130वां संविधान संशोधन बिल लाने की कोशिश करेंगे, जिसका हम विरोध करेंगे. यह एक खतरनाक बिल है जिसे अगस्त 2025 में पेश किया गया था और बाद में इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया था. इसका ज़्यादातर विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था.
जब तक दोष साबित नहीं, तब तक निर्दोष
कांग्रेस नेता ने कहा कि बिल में यह प्रावधान है कि अगर कोई मंत्री किसी ऐसे आपराधिक अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक जेल में रहता है जिसमें पांच साल से ज़्यादा की सज़ा हो सकती है, तो 31वें दिन उसे पद से हटा दिया जाएगा. रमेश ने कहा कि यह बहुत अजीब बात है. मेरा मतलब है कि अदालती कार्यवाही अभी चल रही है. भारत में, जब तक दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है. हम सभी जानते हैं कि मोदी-गृह मंत्री अमित शाह के शासनकाल में जांच एजेंसियां कैसे काम कर रही हैं. बिल का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह कुछ और नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध और राजनीतिक बदले की भावना है. रमेश ने कहा कि इसका मकसद विरोधियों को राजनीतिक रूप से परेशान करना है.
कांग्रेस करेगी विरोध
रमेश ने कहा कि हो सकता है कि वे इसे इस सेशन में यानी मॉनसून सेशन के दौरान फिर से पेश करने की कोशिश करें. हम इसका विरोध करेंगे. हम उस परिसीमन बिल का विरोध करेंगे जो 16 अप्रैल को एक स्पेशल सेशन के दौरान आया था. 17 अप्रैल को गृह मंत्री को बहुत शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी क्योंकि परिसीमन पर संविधान संशोधन के लिए उन्हें सिर्फ़ 298 सांसदों का समर्थन मिला था, जबकि उन्हें 352 वोटों की ज़रूरत थी. कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि 17 अप्रैल से ही शाह अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने TMC और शिवसेना (UBT) को तोड़ा.
17 जुलाई को संसदीय समिति सौंप सकती है रिपोर्ट
सूत्रों ने बताया कि संविधान (130वां संशोधन) बिल, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) बिल पर बनी संयुक्त समिति की रिपोर्ट को 17 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में मंज़ूरी मिलने की संभावना है. इस समिति की अध्यक्षता BJP सांसद अपराजिता सारंगी कर रही हैं. BJP और उसके सहयोगी दलों के दबदबे वाली 31 सदस्यों की इस कमेटी में विपक्ष के केवल तीन सदस्य हैं. NCP-SP की सुप्रिया सुले, AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और YSRCP के एस. निरंजन रेड्डी.
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News Source: PTI
