Modi Cabinet: संसद के मॉनसून सत्र से पहले मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में बड़े फेरबदल की संभावना है.यह फेरबदल पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में बीजेपी की नई टीम की घोषणा के साथ ही किया जाएगा. इस बदलाव में कुछ केंद्रीय मंत्रियों को संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भविष्य NEET पेपर लीक, CBSE के डिजिटल मार्किंग सिस्टम में अनियमितता और अन्य विवादों के कारण अनिश्चित माना जा रहा है. अगर फेरबदल होता है, तो यह जुलाई में संसद के मॉनसून सत्र से पहले हो सकता है. संसद का यह सत्र आमतौर पर महीने के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है. फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त शेड्यूल को ध्यान में रखकर तय की जा सकती है.
अहम मंत्रालयों में आएंगे नए लोग
प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स के तीन दिन के दौरे पर हैं. उनके 6 से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जाने की भी संभावना है. जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का भी 1 से 3 जुलाई के बीच नई दिल्ली आने का कार्यक्रम है. सूत्रों का कहना है कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व में यह राय बन रही है कि अहम मंत्रालयों में नए लोगों को लाने की ज़रूरत है. इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्य, जाति और वफ़ादारी जैसे कारकों के आधार पर कैबिनेट में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं. दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को पहले ही क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पार्टी इकाइयों की कमान संभालने की ज़िम्मेदारी दी जा चुकी है.
‘एक व्यक्ति, एक पद’ के नियम पर चलेगी पार्टी
इस बात की पूरी संभावना है कि बीजेपी अपने ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के नियम का पालन करेगी, जिससे उन्हें सरकार से हटना पड़ सकता है. दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को बीजेपी ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों के लिए दोबारा नामांकित नहीं किया था. उच्च सदन में उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया. जहां कुरियन पहले ही अपने पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं, वहीं बिट्टू अभी भी मंत्री बने हुए हैं. पता चला है कि शीर्ष नेतृत्व ने उनसे आगामी पंजाब चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है. कांग्रेस के पूर्व नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते बिट्टू प्रभावशाली जाट सिख समुदाय का एक जाना-माना चेहरा हैं. अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए मोदी सरकार में इन राज्यों से और प्रतिनिधियों को जगह मिल सकती है.
शिंदे गुट को कैबिनेट मंत्री पद की उम्मीद
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ज़बरदस्त जीत के बाद राज्य के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. इस बात की भी संभावना है कि बागी तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को मंत्री पद मिल सकता है. जहां 20 बागी TMC सांसदों ने पश्चिम बंगाल की ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया’ में विलय की घोषणा की और सत्ताधारी NDA के प्रति अपना समर्थन जताया, वहीं शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं. यह भी कहा जा रहा है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के एक वरिष्ठ पदाधिकारी को कैबिनेट मंत्री के तौर पर शामिल किया जा सकता है.
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अटकलें तेज
सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले सात राज्यसभा सांसदों में से एक या दो चेहरों को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है. हालांकि, TMC और शिवसेना (UBT) के अलग हुए गुटों के सदस्यों को शामिल करने का कोई भी फ़ैसला लोकसभा स्पीकर के फ़ैसले पर निर्भर करेगा, क्योंकि उनकी मूल पार्टियों ने ‘दल-बदल विरोधी कानून’ के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की है. 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात के बाद फेरबदल की चर्चा तेज़ हो गई. दो दिन बाद 25 जून को जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राष्ट्रपति से मुलाक़ात की, तो इन अटकलों को और बल मिला.
कुछ को मिल सकती है राज्यपाल की जिम्मेदारी
दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है. यह देखना बाकी है कि उच्च सदन में उनके दोबारा नामांकन को लेकर पार्टी आलाकमान क्या फ़ैसला करता है. तीन राज्यपालों थावर चंद गहलोत (कर्नाटक), मंगूभाई पटेल (मध्य प्रदेश) और लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (उत्तराखंड) का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है. गहलोत और पटेल का कार्यकाल जुलाई में और गुरमीत सिंह का सितंबर में समाप्त होगा.ऐसी संभावना है कि सरकार से बाहर होने वाले कुछ मंत्रियों को राज्यपाल की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है.
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News Source: PTI
