Passport Ranking of India: भारतीय पासपोर्ट की ताकत और घट गई है. भारत का पासपोर्ट एक पायदान नीचे फिसल गया है. रेजीडेंसी और सिटिजनशिप एडवाइजरी फर्म ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस (GCS) ने ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) की सालानी रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक अब भारतीय पासपोर्ट 125वें स्थान पर आ गया है. दूसरी ओर, कुछ देश हर साल पासपोर्ट रैंकिंग में टॉप पर रहते हैं.
भारत की पासपोर्ट रैंकिंग ने सभी का ध्यान खींचा है. लेकिन सवाल है कि भारत इस रेस में इतना पीछे क्यों है. दरअसल किसी भी देश के पासपोर्ट की ताकत इस बात से तय होती है कि उसके नागरिक कितने देशों में बिना वीजा या आसान वीजा प्रोसेस से ट्रैवल कर सकते हैं. इसीलिए हर साल जारी होने वाली ग्लोबल पासपोर्ट रैंकिंग पर कड़ी नजर रखी जाती है. इस आर्टिकल में हम आसान भाषा में समझेंगे कि पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है, इसके क्या मानक हैं, भारत 125वें स्थान पर क्यों है और इसके पीछे मुख्य कारण क्या हैं. साथ ही जानेंगे कि पासपोर्ट रैंकिंग में दुनिया के सबसे ज्यादा ताकतवर 10 देश कौन से हैं और सबसे कमजोर दस देश कौन से हैं.

क्या होती है पासपोर्ट रैंकिंग लिस्ट और इसे कौन जारी करता है
पासपोर्ट रैंकिंग लिस्ट एक ऐसी ग्लोबल लिस्ट होती है, जो दुनियाभर के देशों के पासपोर्ट की ताकत को मापती है. रेजीडेंसी और सिटिजनशिप एडवाइजरी फर्म ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस (GCS) हर साल अपनी ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) लिस्ट जारी करती है. ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स पासपोर्ट को न सिर्फ इंटरनेशनल ट्रैवल की आसानी के आधार पर रैंक करता है, बल्कि दूसरे देशों में रहने, काम करने और इन्वेस्ट करने के फायदों के आधार पर भी रैंक करता है.
इसके अलावा हेनली पासपोर्ट इंडेक्स और आर्टन कैपिटल पासपोर्ट इंडेक्स भी पासपोर्ट रैंकिंग लिस्ट जारी करते हैं. हेनली पासपोर्ट इंडेक्स वीज-फ्री यात्रा को मापकर रैंकिंग लिस्ट बनाता है, तो वहीं आर्टन कैपिटल पासपोर्ट इंडेक्स ‘ग्लोबल मोबिलिटी स्कोर’ को रियल-टाइम ट्रैक करता है. हेनली पासपोर्ट इंडेक्स में भारत की रैंक 80 है और आर्टन कैपिटल में 66.
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स का क्राइटेरिया क्या हैं
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स तैयार करने के लिए कई तरह के क्राइटेरिया को देखा जाता है. यह इंडेक्स सिर्फ ट्रैवल फ्रीडम को ही नहीं मापता, बल्कि तीन मुख्य और उनके अंदर 14 इंडिकेटर पर आधारित होता है.
एन्हांस्ड मोबिलिटी इंडेक्स (EMI)
एन्हांस्ड मोबिलिटी इंडेक्स जरूरी हिस्सा है, जो किसी देश के नागरिकों की ग्लोबल ट्रैवल फ्रीडम को मापता है. रैंकिंग तय करने में इसका 50 प्रतिशत वेटेज होता है. यह उन देशों की संख्या गिनता है जहां पासपोर्ट होल्डर बिना वीजा, वीजा-ऑन-अराइवल या ई-वीजा के साथ जा सकते हैं. इंडेक्स सिर्फ देशों की संख्या नहीं गिनता बल्कि वहां का जीवन स्तर भी नापता है. उदाहरण के लिए, अगर कोई पासपोर्ट किसी ऐसे देश में वीजा-फ्री एंट्री देता है जहां का जीवन स्तर अच्छा है, तो उसे पूरा 1 पॉइंट मिलता है. वहीं अगर उस देश के नागरिकों को राजनीतिक रूप से अस्थिर देश में वीजा-फ्री एंट्री मिलती है, तो उसे सिर्फ 1/3 पॉइंट मिलता है.
इन्वेस्टमेंट इंडेक्स
यह क्राइटेरिया उस देश का पासपोर्ट रखने से ग्लोबल ट्रेड और इन्वेस्टमेंट के मौकों का अनुमान लगाता है. इसका 25 प्रतिशत वेटेज होता है. इसके लिए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) और वर्ल्ड बैंक के डेटा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके मुख्य इंडिकेटर्स में देश की GDP, ग्रोथ रेट और मार्केट साइज, इनोवेशन की संभावना, प्रोडक्ट और लेबर मार्केट की हालत, पर्सनल टैक्स रेगुलेशन और इन्वेस्टर-फ्रेंडली पॉलिसी शामिल हैं. अगर पासपोर्ट सभी क्राइटेरिया पूरे करता है, तो उस देश को ज्यादा पॉइंट मिलते हैं. मजबूत और बढ़ती इकॉनमी वाले देशों को ज्यादा स्कोर मिलते हैं.
क्वालिटी ऑफ लिविंग इंडेक्स (QLI)
क्वालिटी ऑफ लिविंग इंडेक्स नागरिकता मिलने पर जीवन स्तर और जीवन की सुरक्षा का आकलन करता है. इसका वेटेज भी 25 प्रतिशत होता है. इसके लिए सस्टेनेबल डेवलपमेंट रिपोर्ट और UNDP के डेटा का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पता चल सके कि किस देश में जीवन स्तर अच्छा है. इसके छह क्राइटेरिया हैं- सस्टेनेबल डेवलपमेंट और एनवायरनमेंटल परफॉर्मेंस, कॉस्ट ऑफ लिविंग. वेल-बीइंग का लेवल, पर्सनल फ्रीडम, माइग्रेंट्स की स्वीकृति, हेल्थकेयर, स्टेबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर.
एन्हांस्ड मोबिलिटी इंडेक्स, इन्वेस्टमेंट इंडेक्स और क्वालिटी ऑफ लिविंग इंडेक्स, तीनों क्राइटेरिया को कैलकुलेट करके हर देश को 1 से 197 देशों के बीच एक स्कोर दिया जाता है.
भारत की रैंक
इस साल भारत 197 देशों की लिस्ट में 125वें स्थान पर है. भारत से ठीक ऊपर नामीबिया 124वें स्थान पर है. भारत से ठीक नीचे अजरबैजान 126वें स्थान पर है. पिछले पांच सालों में भारत की स्थिति में बहुत मामूली सुधार हुआ है. साल 2021 से 2023 तक भारत लगातार 127वें स्थान बना हुआ था. इसके बाद साल 2025 में आर्थिक सुधारों और बेहतर नीतियों के कारण भारत 3 पायदान ऊपर उछलकर 124वें स्थान पर पहुंच गया था और इस साल एक पायदान नीचे खिसक कर 125वें स्थान पर आ गया है. इस इंडेक्स की सबसे दिलचस्प बात यह है कि रैंकिंग में 1 स्थान नीचे जाने के बावजूद, भारत का ओवरऑल कम्पोजिट स्कोर सुधरकर 45.1 हो गया है, जो पिछले 5 सालों में इसका सबसे ज्यादा स्कोर है.
वहीं तीनों क्राइटेरिया में, भारतीय पासपोर्ट लेटेस्ट रैंकिंग में क्वालिटी ऑफ लिविंग इंडेक्स में 118वें स्थान पर रहा, जो पिछले साल के 129वें स्थान से 11 स्थान ऊपर है. इन्वेस्टमेंट इंडेक्स में भारत 94वें स्थान पर रहा, जो पिछले साल के 97वें स्थान से तीन ऊपर है. एन्हांस्ड मोबिलिटी इंडेक्स में भारत 136वें स्थान पर है, जो पिछले साल की रैंकिंग से एक स्थान नीचे है.

भारत की पासपोर्ट रैंकिंग नीचे होने के कारण
भारत की इकोनॉमी लगातार बढ़ रही है, इसके बावजूद इंटरनेशनल पासपोर्ट रैंकिंग में, खासकर हेनले पासपोर्ट इंडेक्स और ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स में भारत की रैंकिंग काफी कम बनी हुई है. ऐसा सिर्फ वीजा नियमों की वजह से ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे डिप्लोमैटिक रिलेशन, आर्थिक स्थिति, सुरक्षा और ग्लोबल भरोसे जैसे कई कारण हैं. हालांकि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन भारतीय नागरिकों को सभी देशों में आसानी से वीजा-फ्री एंट्री नहीं मिलती है.
पहला कारण वीजा रेसिप्रोसिटी है. भारत ने टूरिज्म और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 150 से ज़्यादा देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा सुविधाएं शुरू कर रखी हैं. हालांकि, बहुत कम देशों ने भारतीय नागरिकों को इसी तरह का वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल एक्सेस दिया है. रैंकिंग तय करते समय यह भी देखा जाता है कि आपका देश किन देशों को बिना वीजा के एंट्री देता है. यही वजह है कि भारतीय पासपोर्ट एन्हांस्ड मोबिलिटी इंडेक्स बहुत नीचे है.
दूसरा बड़ा कारण गैर-कानूनी माइग्रेशन का डर है. कई विकसित देशों को चिंता है कि कुछ लोग, जो टूरिस्ट या दूसरे वीजा पर यात्रा करते हैं, वे बिना इजाजत के ज्यादा समय तक रुक सकते हैं या काम कर सकते हैं. ऐसे मामले पहले सामने भी आए हैं. इसलिए, वे भारतीय नागरिकों के लिए काफी सख्त वीजा नियम बनाए रखते हैं.
तीसरा कारण प्रति व्यक्ति आय है. भारत की इकोनॉमी दुनिया की छठी सबसे बड़ी इकोनॉमी है, लेकिन इसकी आबादी पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है, जिसकी वजह से प्रति व्यक्ति आय कई विकसित देशों के मुकाबले काफी कम है. कुछ देश वीजा पॉलिसी बनाते समय आने वाले टूरिस्ट की इकॉनमिक कैपेसिटी और खर्च करने की क्षमता पर भी विचार करते हैं.
इसके अलावा, ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स न सिर्फ ट्रैवल फ्रीडम, बल्कि क्वालिटी ऑफ लाइफ, ह्यूमन डेवलपमेंट और इनवेस्टमेंट के मौके जैसे फैक्टर्स पर भी विचार करता है. भारत अभी इन एरिया में कई विकसित देशों से पीछे है, जिसका असर इसकी ओवरऑल रैंकिंग पर पड़ता है. इसके साथ ही सुरक्षा और दस्तावेजों की विश्वसनीयता भी देखी जाती है. अगर किसी देश के पासपोर्ट या वीजा से जुड़े फ्रॉड या वायलेशन की घटनाएं रिपोर्ट होती हैं, तो दूसरे देश वीजा पॉलिसी बनाते समय ज्यादा सावधानी बरतते हैं. इन सभी फैक्टर्स के मिले-जुले कैलकुलेशन के कारण भारतीय पासपोर्ट की इंटरनेशनल रैंकिंग काफी कम है.

भारतीयों के लिए वीजा- फ्री देशों की लिस्ट
- भूटान
- बारबाडोस
- हैती
- मालदीव
- मॉरिशस
- नेपाल
- समोआ
- सेनेगल
ये देश भारतीयों को ऑफर करते हैं ई-वीजा सुविधा
- मलेशिया
- कंबोडिया
- वियतनाम
- जॉर्जिया
- अजरबैजान
- ताइवान
- केन्या
- सिंगापुर
ये देश देते हैं वीजा ऑन अराइवल की सुविधा
- बोलीविया
- इंडोनेशिया
- जमैका
- जॉर्डन
- लाओस
- मेडागास्कर
- कतर
टॉप 10 देश और उनके आगे रहने का कारण
दुनिया भर में सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट वाले टॉप-10 देशों में स्वीडन, स्विट्जरलैंड, फिनलैंड, डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड, सिंगापुर, आयरलैंड, नॉर्वे और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं. यह सभी विकसित देश हैं. टॉप-10 रैंकिंग मिलने का मतलब है कि इन देशों के नागरिकों को बिना वीजा के बिना दुनिया भर के सबसे अधिक देशों की यात्रा करने की आजादी है, क्योंकि इन विकसित देशों में जीवन स्तर पहले से ही बहुत ऊंचा है, अन्य अंतरराष्ट्रीय सरकारों को अपने नागरिकों द्वारा अवैध प्रवास या वीजा अवधि से अधिक समय तक रहने का कोई जोखिम नहीं होता है, जिससे उन्हें आसानी से वीजा- मुक्त प्रवेश मिल जाता है.
इन देशों की रैंकिंग मुख्य रूप से उनकी मजबूत अर्थव्यवस्थाओं, प्रति व्यक्ति बहुत अधिक आय और बेहतर जीवन स्तर के कारण है, जो उन्हें वैश्विक निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और सबसे अट्रैक्टिव डेस्टीनेशन में से एक बनाती हैं.
सबसे कमजोर 10 देश
दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों की लिस्ट में यमन, इरिट्रिया, सूडान, नॉर्थ कोरिया, फिलिस्तीन, सोमालिया, लीबिया, पाकिस्तान, इराक और अफगानिस्तान शामिल हैं, जिसमें अफगानिस्तान सबसे आखिर में आता है. इन देशों की रैंकिंग कम होने का मुख्य कारण सिविल वॉर, आतंकवाद, मिलिट्री तानाशाही और बहुत ज्यादा पॉलिटिकल अस्थिरता है. इंटरनेशनल सिक्योरिटी एजेंसियां इन देशों के नागरिकों को सुरक्षा के लिहाज से “हाई-रिस्क” कैटेगरी में रखती हैं. विकसित देशों ने इन देशों के नागरिकों पर बहुत कड़े वीजा बैन लागू किए गए हैं.
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