Nepal flood: नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार और यूपी को हाई अलर्ट पर रखा गया है. बिहार और उत्तर प्रदेश में बुधवार को हाई अलर्ट जारी किया गया, क्योंकि पड़ोसी देश नेपाल के कई ज़िले गंडक नदी में अचानक आई बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. अधिकारियों ने खतरे वाले इलाकों से लोगों को निकालने समेत आपातकालीन उपाय शुरू कर दिए हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बात की और नदी का जलस्तर बढ़ने से पैदा हो सकने वाले किसी भी संकट से निपटने के लिए केंद्र की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया.
आपात स्थिति से निपटने के लिए NDRF तैनात
शाह ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) को तैनात किया जा रहा है. सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भी 1,751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी सभी यूनिट्स को अलर्ट कर दिया है. राहत व बचाव कार्य शुरू करने के लिए 18 टीमें तैनात की गई हैं. बिहार में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के अलावा सीतामढ़ी और शिवहर जैसे संवेदनशील ज़िलों में भी विशेष सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए हैं. राज्य के अधिकारियों ने बताया कि हालात को काबू में करने के लिए गंडक नदी पर बने बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं. डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने बताया कि दोपहर के समय वाल्मीकि नगर में गंडक बैराज से लगभग 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया.
गंडक बैराज पर तकनीकी टीम मुस्तैद
उन्होंने कहा कि बैराज पर एक सुपरिटेंडिंग इंजीनियर की अगुवाई में एक टेक्निकल टीम तैनात की गई है. गंडक नदी बेसिन में आने वाले सभी जिलों को भी चेतावनी जारी कर दी गई है. विभाग के अधिकारियों ने कहा कि गंडक बैराज के 36 गेट खोलने से बाढ़ की स्थिति को काबू करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने बताया कि नेपाल में देवघाट गेज साइट पर नारायणी नदी का जलस्तर 4.77 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 9 मीटर और चेतावनी का स्तर 7.30 मीटर है. अगर नदी का जलस्तर और बढ़ता है, तो पानी के बहाव के लगभग 3.5 घंटे में गंडक बैराज तक पहुंचने की उम्मीद है. चौधरी ने कहा कि नेपाल में बाढ़ के बाद राज्य को अगले पांच-छह घंटों और पूरी रात अलर्ट पर रहने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि स्थिति पहले से ज़्यादा गंभीर है, लेकिन फिलहाल काबू में है.
स्थिति पर लगातार नजर रखेंः सम्राट चौधरी
तिब्बत से शुरू हुई अचानक आई ज़बरदस्त बाढ़ के कारण मध्य नेपाल के ज़िलों में 72 लोगों की मौत हो गई और लगभग 500 लोग (जिनमें 105 भारतीय भी शामिल हैं) लापता हो गए. अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ का पानी भोटे कोशी नदी से होते हुए तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धाडिंग ज़िलों तक पहुंच गया. इसके बाद यह धाडिंग, नुवाकोट और चितवन ज़िलों में फैल गया. बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सीमावर्ती ज़िलों के ज़िलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की. ज़िला प्रशासन को बचाव और राहत की सभी तैयारियां पूरी करने और स्थिति पर कड़ी नज़र रखने का निर्देश दिया गया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी स्थिति की समीक्षा की. अधिकारियों ने बताया कि सभी संबंधित लोगों को हाई अलर्ट पर रहने, समय रहते सभी ज़रूरी कदम उठाने और स्थिति पर लगातार नज़र रखने का निर्देश दिया गया है.
कुशीनगर में सुरक्षित स्थानों पर भेजे जा रहे लोग
उधर, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ पर चिंता जताई. उन्होंने महराजगंज और कुशीनगर ज़िलों को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाने के निर्देश दिए. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बाढ़ के कारण पड़ोसी ज़िलों में गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है. महराजगंज में ज़िला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और गंडक नदी की चौबीसों घंटे निगरानी के आदेश दिए हैं, क्योंकि पानी का बढ़ा हुआ बहाव भोटेकोशी-त्रिशूली नदी के ज़रिए निचले इलाकों को प्रभावित कर सकता है.
जिला मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने निर्देश दिया है कि वे ज़रूरत पड़ने पर संवेदनशील निचले इलाकों और नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित, ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करें. कुशीनगर में ज़िला प्रशासन ने मार्चहवा, शिवपुर और अन्य गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के आदेश दिए हैं. निवासियों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की जा रही है. ज़िला मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है.
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News Source: PTI
