Nepal Flood: तिब्बत सीमा के पास बुधवार को नेपाल के ज़िलों में अचानक आई बाढ़ की चपेट में आने से 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 400 पर्यटक लापता हो गए. लापता लोगों में 105 भारतीय भी शामिल हैं. उधर नेपाल के हालात को देखते हुए बिहार के छह जिलों में अलर्ट जारी किया गया है. इस संबंध में गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्य मंत्री सम्राट चौधरी से बात की. इस आपदा की घड़ी में भारत और चीन ने मदद की बात कही है. अचानक बाढ़ से कई गांव बह गए. लोगों को भागने का मौका तक नहीं मिला.
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टोल फ्री नंबर जारी
बुधवार को तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा ज़िले में अचानक बाढ़ आ गई. नदी के किनारे बसे इलाकों में भारी तबाही हुई और एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा. अधिकारियों के अनुसार, सुबह करीब 9 बजे (स्थानीय समय) तिब्बत की ओर से भोते कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से सटे रसुवा और धाडिंग ज़िले और काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट ज़िला प्रभावित हुआ. नेपाल पर्यटन बोर्ड (NTB) के एक बयान के अनुसार, रसुवा में आई बाढ़ के कारण कुल 384 यात्री, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं, लापता हो गए हैं. इन यात्रियों में 105 भारतीय पर्यटक, 37 NRI और बाकी पर्यटक अमेरिका, मलेशिया, यूके, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड से थे. नेपाल पर्यटन बोर्ड ने मदद के लिए एक टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 भी जारी किया है.

रसुवा जिले में भारी तबाही
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि रसुवा में बारिश के कारण बाढ़ नहीं आई, संभवतः तिब्बत की तरफ भारी बारिश या हिमस्खलन के कारण ऐसा हुआ. हालांकि सही कारण का अभी पता नहीं चल पाया है. रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन सहित कई निचले इलाकों वाले ज़िलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है, जबकि अधिकारियों ने नेपाल सेना की मदद से प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया है. नेपाल सेना ने एक बयान में कहा कि पानी के अचानक बढ़ने से रसुवा ज़िले के तिमुरे और पास के स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी तबाही हुई, जिसमें गाड़ियां, सामान और अन्य संपत्तियां बह गईं.
नदी किनारे रहने वाले लोगों को किया सतर्क
सबसे ज़्यादा प्रभावित रसुवा ज़िला है, जो काठमांडू से लगभग 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में तिब्बत सीमा के पास स्थित है. बागमती प्रांत पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पीटीआई को बताया कि अचानक आई बाढ़ के बाद नुवाकोट ज़िले की बिदुर नगर पालिका से तीन पुरुषों और एक महिला के शव बरामद किए गए. उन्होंने कहा कि बाढ़ के तुरंत बाद उनके शव त्रिशूली नदी के पास पड़े मिले. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRM) ने एक बयान में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में नदी के किनारे रहने वाले लोगों से हाई अलर्ट पर रहने और अगली सूचना तक सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा है.
बारिश की वजह से बाढ़ नहींः मौसम विभाग
हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में बारिश की वजह से नहीं आई थी. विभाग के सूचना अधिकारी दिनकर कायस्थ के मुताबिक, ऐसा नहीं लगता कि यह बाढ़ रसुवा में ही हुई भारी बारिश के कारण आई थी. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह किसी नए ग्लेशियर के बनने या पुराने ग्लेशियर के फटने की वजह से हुआ हो. उन्होंने कहा कि हम अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं, इसलिए असली वजह अभी पता नहीं चली है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तिब्बत की तरफ से बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है, इसलिए हमें सावधान रहने की ज़रूरत है.
तिब्बत-चीन को जोड़ने वाला पुल बहा
‘द हिमालयन टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पानी के अचानक बढ़ने की वजह का पता लगाने के लिए जांच चल रही है. अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की वजह से हुआ या किसी और कारण से. रसुवा के असिस्टेंट चीफ़ डिस्ट्रिक्ट ऑफ़िसर ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ का दायरा बहुत बड़ा था और दो बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है. रसुवा के चीफ़ कस्टम्स ऑफ़िसर राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि कस्टम्स परिसर में रखे कई वाहन और सामान बह गए. हाल ही में बना एक पुल भी टूट गया. यह वह जगह है जहां से तिब्बत, चीन को जोड़ने वाले नेपाल के व्यापारिक यातायात का संचालन होता है.
आठ पनबिजली परियोजनाएं तहस-नहस
इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (IPPAN) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ ने नुवाकोट और रसुवा ज़िलों में चल रही आठ पनबिजली परियोजनाओं (कुल क्षमता 354 MW) और निर्माणाधीन पांच परियोजनाओं को काफी नुकसान पहुंचाया है. बाढ़ से प्रभावित प्रमुख चालू पनबिजली परियोजनाओं में रसुवागढ़ी पनबिजली परियोजना (111 MW), संजेन खोला पनबिजली परियोजना (78 MW) और अपर त्रिशूली 3A (60 MW) शामिल हैं. ‘द काठमांडू पोस्ट’ ने उत्तरगया ग्रामीण नगर पालिका की डिप्टी चेयरपर्सन चमेली गुरुंग के हवाले से बताया कि स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मैलुंग, सल्लेतार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खालती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बत्तार सहित लगभग एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं.

प्रधानमंत्री बालेनद्र शाह ने लिया जायजा
हालात का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री बालेनद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है. अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए नेपाल सेना ने 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए. नेपाल सेना के बयान के अनुसार, रसुवा ज़िले के स्याफ्रुबेसी से छह लोगों, मैलुंग से दो लोगों और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया. बयान में कहा गया है कि नेपाल सेना ने त्रिशूली में मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर नंबर 1 में एक इलाज केंद्र भी बनाया है, जहां सेना के मेडिकल कर्मचारी प्रभावित लोगों को इमरजेंसी मेडिकल इलाज दे रहे हैं. इसमें यह भी कहा गया कि इमरजेंसी मेडिकल रेस्क्यू टीम के साथ सेना का एक हेलीकॉप्टर (MI17) भी त्रिशूली के ज़िला अस्पताल भेजा गया.
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आर्म्ड पुलिस फोर्स के चार जवान लापता
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में नेपाल पुलिस के प्रवक्ता एबी नारायण काफ्ले के हवाले से कहा गया है कि तिमुरे में एरिया पुलिस ऑफिस, स्याफ्रुबेसी में पुलिस पोस्ट और रसुवागढ़ी में पुलिस पोस्ट को भी नुकसान पहुंचा है. आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स (पैरामिलिट्री) के प्रवक्ता नेत्र बहादुर कार्की ने बताया कि अचानक आई बाढ़ के बाद रसुवा से आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के चार जवान लापता हो गए हैं. घायलों के इलाज के लिए रसुवा के प्रभावित इलाके में 16 स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम भेजी गई है, जिसमें पांच डॉक्टर शामिल हैं. इस भयानक बाढ़ ने धाडिंग ज़िले के गजुरि में एक पुल को बहा दिया है. बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए पांच ड्रोन तैनात किए गए हैं. लापता लोगों का पता लगाने के लिए प्रभावित इलाके में तीन स्निफर डॉग भी भेजे गए हैं. पिछले साल भी भोटेकोशी में दो भयानक बाढ़ आई थीं, जिससे रसुवा में भारी तबाही हुई थी और 10 लोगों की मौत हो गई थी.
शी जिनपिंग ने बचाव और राहत कार्य के दिए आदेश
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्बत में चीन-नेपाल सीमा के पास गांवों में अचानक आई बाढ़ से लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हर संभव मदद करने का आदेश दिया है. इस घटना में कई लोगों की जान गई है. आपातकालीन बचाव कार्यों में मदद के लिए ‘पीपल्स आर्म्ड पुलिस’ की शिगाज़े (Xigaze) टुकड़ी से कुल 145 अधिकारियों और जवानों को मडस्लाइड से प्रभावित सीमावर्ती इलाके में भेजा गया है. चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा नेपाल के साथ लगभग 1,400 किलोमीटर तक लगती है. बुधवार को गिरोंग पोर्ट (Gyirong Port) के पास अचानक बाढ़ आई. चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन फुटेज में पोर्ट पर कुछ इमारतें मलबे में दबी हुई दिखाई दीं.
नेपाल में चीनी दूतावास हुआ सक्रिय
सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने बताया कि सरकार ने आपदा प्रभावित इलाके में कर्मचारियों को भेजा है, जहां संचार व्यवस्था ठप हो गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को उत्तरी नेपाल में गिरोंग-रासुवा सीमावर्ती इलाके में अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के बाद नेपाल में चीनी दूतावास ने अपना आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय कर दिया. दूतावास ने प्रभावित इलाके में चीनी नागरिकों और कंपनियों की स्थिति का जायजा लिया और नेपाल सरकार तथा संबंधित एजेंसियों से बचाव कार्य करने का आग्रह किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि दूतावास ने नेपाल में मौजूद चीनी नागरिकों और संस्थानों के लिए सुरक्षा संबंधी नई एडवाइजरी भी जारी की.

SSB ने राहत के लिए भेजीं 18 टीमें
पड़ोसी देश में अचानक आई ज़बरदस्त बाढ़ के बाद सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने 1,751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी सभी यूनिट्स को अलर्ट कर दिया है. SSB के अधिकारी ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए बल की 18 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें से सात टीमें रिजर्व पर हैं. अधिकारियों के अनुसार, SSB का यह अलर्ट कोसी और नारायणी नदी बेसिन में पानी का बहाव बढ़ने और नेपाल की छोटी नदियों में भी अचानक बाढ़ आने की संभावना के बीच जारी किया गया है. उन्होंने बताया कि अर्धसैनिक बल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घाघरा/करनाली और महाकाली नदी प्रणालियों के किनारे बसे संवेदनशील ज़िलों पर भी नज़र रख रहा है. तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा ज़िले में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ से कई गांव बह गए और ज़रूरी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा.
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