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भारत पर पड़ेगा पश्चिम एशिया संकट का असर, नीति आयोग की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

by Sachin Kumar
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NITI Aayog West Asia crisis impact India

NITI Aayog : मिडिल ईस्ट युद्ध दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाला है. यही वजह है कि भारत भी इससे अछूता नहीं रहा और मैक्रो इकोनॉमिक में स्थिरता का खतरा मंडराने लगा है.

NITI Aayog : पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब दुनिया भर देशों पर भी देखने को मिल रहा है. ईरान और अमेरिका युद्ध की वजह से तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है. अब इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है. इसी कड़ी में नीति आयोग ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दावा किया गया है कि व्यापार और आर्थिक स्थिरता का खतरा मंडरा रहा है. साथ ही मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर रहा है.

FTA कोई एकतरफा रास्ता नहीं

आयोग की तिमाही रिपोर्ट ‘Trade Watch Oct-Dec (Q3) FY 2025-26’ में आगे कहा गया है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता ने भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की गति धीमी कर दी है. आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि हम स्पष्ट कर दें कि FTA कोई एकतरफा रास्ता नहीं है और न ही उन्हें ऐसा करना चाहिए. बेरी ने इस बात पर जोर दिया कि मुश्किल हालात में भी भारत का माल व्यापार को मजबूत बना रहा है और कई आशंकाओं के बावजूद उलझनों से भरे 2025 में भी सेवा व्यापार खास तौर पर मजबूत रहा.

आयात का भी करना चाहिए स्वागत

सुमन बेरी ने कहा कि व्यापार अर्थशास्त्रियों के लिए निर्यात से ज्यादा आयात मायने रखता है. आयात ही आपको प्रतिस्पर्धी बनने पर मजबूर करता है. यही वजह है कि हमको आयात का भी उतना ही स्वागत करना चाहिए जितना हम बाजार तक पहुंच का करते हैं. नीति आयोग के वीसी ने बताया कि बीते 20 सालों में हमने 6 फीसदी की दर से बढ़ोतरी की है. वहीं, रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया गया है कि भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र को मध्यम-मूल्य वाले निर्यात से हटकर उच्च मूल्य वाले निर्यात की ओर बढ़ना चाहिए. हमें जिन वस्तुओं के निर्यात पर बढ़ना चाहिए उनमें डिज़ाइन-आधारित विनिर्माण, क्लस्टर R&D, और GI-ब्रांडेड उत्पाद शामिल हैं.

कर्ज देने की कही गई है बात

रिपोर्ट में वित्तीय पहुंच बढ़ाने और पूंजी की लागत करने की भी सलाह दी है. इसमें मुख्य रूप से बिना किसी गारंटी के कर्ज देना, क्रेडिट गारंटी, ब्याज में छूट, एक्सपोर्ट फैक्टरिंग और चेन फाइनेंस को बढ़ावा देना है. ऐसा करने से MSME मजबूत होगा. इसमें व्यापार करने में आसानी और डेटा सिस्टम में सुधार करने की भी बात कही गई. बता दें कि FTA पार्टनर भारत की वैल्यू चैन में व्यापार एकीकरण के मामले में एक मुख्य कारण बन गया है. व्यापार में लगातार उनकी हिस्सेदारी बढ़ रही है और यह बाजार में पहुंच को भी दर्शाता है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत रत्न और आभूषण क्षेत्र (HS 71) में एक वैश्विक खिलाड़ी बना हुआ है.

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News Source: PTI

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