Home Top News India-US Trade Deal के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच! समझौते से अन्नदाताओं को कितना फायदा?

India-US Trade Deal के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच! समझौते से अन्नदाताओं को कितना फायदा?

by Amit Dubey 21 July 2026, 3:54 PM IST (Updated 21 July 2026, 6:18 PM IST)
21 July 2026, 3:54 PM IST (Updated 21 July 2026, 6:18 PM IST)
Farmer Protest Against India US Deal

Farmer Protest Against India US Deal: बीते कई महीनों से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को पूरा करने के लिए दोनों पक्षों की ओर से वार्ता जारी है. इस डील के पहले चरण को पिछले साल ही पूरा कर लेना था, लेकिन अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा भारत पर 50 फीसदी के टैरिफ थोपने के बाद से दोनों देशों के बीच रिश्ते में कटुता आ गई थी, हालांकि इस साल की शुरुआत में पीएम मोदी और प्रेसिडेंट ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद भारत पर टैरिफ को घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया था. उसके बाद यूएस कोर्ट के आदेश ने ट्रंप को झटका दिया और फिर भारत समेत कई देशों पर टैरिफ मात्र 10 फीसदी का हो गया.

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ का मामला शांत होते ही एक बार फिर से दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को पूरा करने पर जोर दिया. अब यह समझौता अपने अंतिम चरण में है और कभी भी इसे पूरा होने की घोषणा हो सकती है.
इस बीच भारत के कुछ किसानों व इनके संगठनों ने इस ट्रेड डील का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने भारत और अमेरिका के इस व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताया और सरकार से इस डील को पूरा न करने की मांग की. किसानों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए दिल्ली समेत इसके बॉर्डर इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए. कई स्थानों पर किसानों को आगे बढ़ने से रोका गया. किसान शंभू बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर के पास पहुंच गए थे.

अब हम यहां बात किसानों के साथ भारत और अमेरिका की उस ट्रेड डील की करने जा रहे हैं, जिसका किसान विरोध कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता क्या है और इससे किसानों को क्या फायदा होगा. शुरुआत हम आज की घटना से करेंगे, जिसमें हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की ओर कूच करते हुए दिखे.

ट्रेड डील के विरोध में किसानों की दिल्ली कूच

आज 21 जुलाई को किसानों का सैलाब देश की राजधानी दिल्ली की ओर कूच कर दिया. पंजाब और हरियाणा समेत अन्य राज्यों के किसान आज दिल्ली के किसान घाट पर प्रस्तावित इंडिया-यूएस ट्रेड डील के खिलाफ आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे. यह महापंचायत “देश बचाओ मोर्चा” के बैनर तले बुलाई गई थी. मिली जानकारी के अनुसार, हरियाणा पुलिस ने मंगलवार सुबह शंभू सीमा चौकी पर बैरिकेड्स लगाए और सीमेंट के ब्लॉक रखे. पंजाब के किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने नायब सिंह सैनी सरकार पर आरोप लगाया कि वह उन्हें प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसान महापंचायत में भाग लेने के लिए दिल्ली जाने से रोक रही है.

पंजाब के विभिन्न स्थानों से किसान अपने संगठनों के झंडे लिए सुबह सीमा चौकी पर इकट्ठा हुए और राष्ट्रीय राजधानी की ओर चल पड़े. दिल्ली के किसान घाट पर “देश बचाओ मोर्चा” के बैनर तले एक दिवसीय “किसान महापंचायत” के आयोजन का ऐलान किया गया था. वहीं, पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू सीमा बिंदु पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था और किसानों को रोकने के लिए घग्गर नदी पर बने पुल के चारों ओर बाड़ लगा दी गई थी.

किसान नेताओं ने पहले कहा था कि पंजाब और हरियाणा सहित कई स्थानों के किसान महापंचायत में भाग लेंगे. इस योजना के तहत, पंजाब भर से सैकड़ों किसानों ने बसों से दिल्ली जाने की योजना बनाई थी. पंधेर ने कहा कि वे शांतिपूर्वक दिल्ली जाना चाहते थे, लेकिन हरियाणा सरकार उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोक रही थी. उन्होंने आगे कहा कि किसान प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को पूरी तरह से रद्द करवाना चाहते हैं. भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के नेता तेजवीर सिंह ने कहा कि हरियाणा पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के शंभू सीमा चौकी को सील कर दिया है.

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भारत-यूएस ट्रेड डील पर किसानों ने क्या किए दावे?

न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का कड़ा विरोध किया है. उनका दावा है कि इससे देश के कृषि क्षेत्र पर बुरा असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से भारत में सस्ते कृषि उत्पादों का आयात संभव हो सकेगा, जिससे घरेलू किसानों की आय और देश की कृषि अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. उन्होंने कहा कि इससे किसानों, कृषि मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म उद्योगों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.

किसानों ने कहा कि प्रस्तावित समझौता कुछ ही वस्तुओं तक सीमित नहीं होगा, बल्कि कृषि, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवा क्षेत्र सहित कई वस्तुओं को कवर करेगा. केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए किसानों ने उससे प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द करने और किसानों व आम जनता के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया.

2025 में BTA की हुई थी घोषणा

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की घोषणा फरवरी 2025 में हुई थी. यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान वाशिंगटन में की गई थी. तब प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त रूप से इसका ऐलान किया था.

इस व्यापार डील का उद्देश्य साल 2030 तक अपने ट्रेड को 500 अरब अमेरिकी डॉलर (“मिशन 500”)पहुंचाना है. इन दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को 2025 के अंत तक पूरा करने का टारगेट किया था, लेकिन ट्रंप टैरिफ की वजह से यह पूरा नहीं हो पाया था. अब जल्द ही दोनों देशों के बीच ट्रेड डील होने की संभावना है.

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भारत और अमेरिका व्यापार डील ऐतिहासिक- कृषि मंत्री

फरवरी 2026 में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को ऐतिहासिक बताया था. उन्होंने भोपाल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि यह डील दुनिया को संदेश देती है कि भारत की नीति कमिटमेंट की है, कॉम्प्रोमाइज की नहीं. हम आत्मविश्वास के साथ देश के हित में निर्णय लेते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलित और सकारात्मक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है. हम सौदेबाजी की राजनीति नहीं करते, बल्कि संतुलित रणनीति अपनाकर सकारात्मक संवाद में विश्वास रखते हैं. यही वजह है कि आज भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और मजबूत साझेदार के रूप में उभर रहा है.

अब आइए जानते हैं कि इस डील से किसानों को क्या फायदा होने वाला है और अन्नदाताओं को लेकर कृषि मंत्री ने क्या कहा था.

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यूएस किसानों के उत्पादों को भारत में छूट नहीं- कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि भारतीय किसानों के कई कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात किया जाएगा. लेकिन, अमेरिकी किसानों के कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में यह छूट नहीं मिली है. भारत के कृषि और डेयरी के हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कृषि क्षेत्र के कई उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती की है. कई कृषि उत्पादों पर जो टैरिफ पहले 50 प्रतिशत तक था, उसे अमेरिका ने घटाकर शून्य कर दिया है. इसमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, सुपारी, काजू, वनस्पति वैक्स, एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम और कुछ अनाज भी शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि, वर्ष 2024-25 में भारत का कृषि निर्यात 4.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. मसाला निर्यात में 88 प्रतिशत की वृद्धि हुई. अब इस ट्रेड डील के बाद हमारे मसालों को अमेरिका में भी नया और बड़ा बाजार मिलेगा. कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय बाजार की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ है. अगर विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय कृषि बाजार में आते हैं, तो उन्हें टैरिफ देना होगा. हमारे किसानों को पूरी छूट और पूरा संरक्षण प्राप्त है. यही इस ट्रेड डील की सबसे बड़ी ताकत है.

किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया- कृषि मंत्री

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि और कृषि उत्पादों के मामले में भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है और ऐसा कोई भी उत्पाद समझौते में शामिल नहीं है, जिससे किसानों को नुकसान हो.

उन्होंने बताया कि सभी संवेदनशील वस्तुओं को समझौते से बाहर रखा गया है. कृषि मंत्री ने कहा कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी भी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई है.

इन अमेरिकी सामानों की भारत में नो एंट्री

कृषि मंत्री ने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की थी कि हमारे प्रमुख अनाज सुरक्षित रहने चाहिए और मैं गर्व से कह सकता हूं कि वो सभी पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं. कृषि मंत्री ने कहा कि प्रमुख अनाज, प्रमुख फल और डेयरी उत्पादों के लिए अमेरिका के लिए कोई द्वार नहीं खोला गया है. उन्होंने कहा कि कई अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में प्रवेश नहीं कर पाएंगे. छिलका रहित अनाज, आटा, गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा, आलू, प्याज, मटर, बीन्स, खीरा, मशरूम, दलहनी उत्पाद, फ्रोजन सब्जियां, संतरे, अंगूर, नींबू, स्ट्रॉबेरी और मिक्स्ड डिब्बाबंद सब्जियां भारत नहीं आएंगी.

डेयरी उत्पादों को लेकर भी उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादों में लिक्विड मिल्क, पाउडर, क्रीम, योगर्ट, बटर मिल्क, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर, इनमें से किसी को भी भारत में एंट्री नहीं मिलेगी. कृषि और डेयरी के अलावा भारत, अमेरिका से काली मिर्च, लौंग, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवाइन, मेथी, केसिया, सरसों, राई, भूसी और अन्य पाउडर मसाले नहीं मंगवाएगा. मतलब साफ है हमारे मसाले और हमारे किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं.

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी उत्पाद ट्रेड डील में शामिल नहीं है. उन्होंने कहा कि ट्रेड डील किसानों, महिलाओं और युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा.

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