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राष्ट्र के नाम संबोधन में बोले PM मोदी- विपक्ष को चुकानी होगी महिला विरोधी रुख की कीमत

by Sanjay Kumar Srivastava
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विपक्ष को चुकानी होगी महिला विरोधी रुख की कीमत, राष्ट्र के नाम संबोधन में बोले PM मोदी

PM Modi: प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के पक्ष में मतदान नहीं करके बड़ी गलती की है. इसका समर्थन नहीं करने की कीमत चुकानी होगी.

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस और अन्य दलों को महिला आरक्षण के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए विधेयक का समर्थन नहीं करने की कीमत चुकानी होगी. प्रधान मंत्री ने 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने के लिए अपनी सरकार के समर्थन और प्रतिबद्धता की पुष्टि की. मोदी शनिवार रात 8.30 बजे महिला आरक्षण पर राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे. कहा कि नारी शक्ति की उड़ान को रोका गया. स्वार्थ की राजनीति का नुकसान देश की करोड़ों महिलाओं को उठाना पड़ा है. कांग्रेस जैसी परिवारवादी पार्टियों ने नारी के सम्मान पर चोट पहुंचाई.  भारत की ‘नारी-शक्ति’ देख रही थी कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल महिलाओं के अधिकारों को छीनने पर किस तरह खुशी से झूम रहे थे. कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी की स्वार्थी राजनीति महिलाओं को नुकसान पहुंचा रही है. कांग्रेस नकारात्मक राजनीति करती है. कांग्रेस देशहित में लिए गए फैसलों का भी विरोध करती है.

नारी अपना अपमान कभी नहीं भुलेगी

कहा कि जब बिल गिरा तो मुझे बहुत दुख हुआ, इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं. नारी अपना अपमान कभी नहीं भुलेगी. बिल गिरने पर कांग्रेस जश्न मना रही है, जो उसकी महिला विरोधी रुख को उजागर करता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के पक्ष में मतदान नहीं करके बड़ी गलती की है. इसका समर्थन नहीं करने की कीमत चुकानी होगी. कहा कि विधेयक का विरोध विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता को उजागर करता है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि लोकसभा में इस तरह के रुख के बाद विपक्षी दल अब इसे सही ठहराने और अपनी कार्रवाई पर पर्दा डालने के तरीके ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. भारत की जनता ने देखा कि नारी-शक्ति के सपने कैसे चकनाचूर हो गए; मैं सभी माताओं और बहनों से माफी मांगता हूं.

महिलाओं को बढ़ता देख द्रमुक, कांग्रेस को परेशानी

मोदी ने कहा कि आम महिलाओं को आगे बढ़ता देख द्रमुक, कांग्रेस को परेशानी क्यों होती है. उन्होंने व्यक्तिगत रूप से विपक्षी दलों से विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी और यहां तक ​​कि उन्हें इसका श्रेय देने की भी पेशकश की थी क्योंकि मैं केवल यही चाहता था कि सामान्य परिवारों की बहनें अच्छी संख्या में संसद, विधानसभाओं में आएं. उन्होंने कहा कि लेकिन दुर्भाग्य से यह नेक प्रयास पटरी से उतर गया. द्रमुक, कांग्रेस और उनके सहयोगियों ने इसे नफरत और क्षुद्र राजनीति का निशाना बना दिया. कहा कि अगर यह बिल पास हो जाता तो सामान्य परिवारों की कई महिलाएं सांसद और विधायक बन गई होतीं. उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर तमिलनाडु को लोकसभा में इतनी अधिक सीटें मिलने वाली थीं, लेकिन स्पष्ट रूप से द्रमुक ऐसा नहीं चाहती थी. उन्होंने कांग्रेस और द्रमुक पर आरोप लगाया कि आम महिलाओं को आगे बढ़ता देख द्रमुक, कांग्रेस को परेशानी क्यों होती है? ये एक परिवार की पार्टियां चाहती हैं कि सत्ता उनके अपने परिवार तक ही सीमित रहे.

परिसीमन में नहीं होगा भेदभाव

परिसीमन प्रक्रिया को लेकर कुछ राज्यों, खासकर दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्रों के डर को दूर करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कदम के तहत किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा. मोदी ने कहा कि अतीत में महिलाओं को यह अधिकार देने में जिन लोगों ने विरोध किया था, उन्हें इस देश की महिलाओं ने माफ नहीं किया है, उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ा है. उन्होंने कहा कि मैं आज आपसे अपील करने आया हूं कि इसे राजनीतिक तराजू पर मत तौलिए. यह देशहित में फैसला है. देश और दुनिया भर की महिलाएं हमें देख रही हैं, हमारे फैसले देखेंगी. लेकिन फैसले से ज्यादा वे हमारी मंशा को परखेंगी. अगर हमारी मंशा में कोई खोट है तो इस देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी. भारत के लोगों ने देखा कि कैसे ‘नारी-शक्ति’ के सपनों को रोका गया.

विपक्ष ने पारित नहीं होने दिया बिल

विधेयक के तहत, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए मौजूदा लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 किया जाना था. महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जानी थीं. महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन संख्या नहीं जुटा सका. शुक्रवार रात लोकसभा में बिल पर मतदान के दौरान 298 सदस्यों ने इसके समर्थन में वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट किया. मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी.

ये भी पढ़ेंः संविधान संशोधन विधेयक गिरना नारी शक्ति के साथ विश्वासघात, लखनऊ में जलाए सपा और कांग्रेस के झंडे

News Source: PTI

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