Trump Tariff Plan: अमेरिका द्वारा भारत समेत दुनिया के कई देशों पर अभी 10 फीसदी का टैरिफ लगता है. अमेरिकी कोर्ट के आदेश के अनुसार इस 10 फीसदी टैरिफ का मियाद 24 जुलाई 2026 तक है. मतलब कि भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर ट्रंप प्रशासन 10 फीसदी का टैक्स वसूलता है, लेकिन इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से टैरिफ को लेकर दुनिया को झटका देने की तैयारी कर ली है. हालांकि, अभी यह बात अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों के द्वारा सामने आई है.
मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका में भारत, चीन समेत 54 देशों पर 12.5 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ/ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव सामने आया है. इस खबर से आज भारतीय शेयर मार्केट में 900 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
12.5% अतिरिक्त ड्यूटी क्यों?
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (US Trade Representative) ने जबरन श्रम (बंधुआ मजदूरी) से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफल रहने के लिए भारत सहित 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है. यह कार्रवाई उन 60 देशों के खिलाफ शुरू की गई जांच के बाद की गई है, जिनके बारे में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वे जबरन श्रम से बने आयात पर प्रतिबंध लगाने और प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर ने एक बयान में कहा, “हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने में विफलता अस्वीकार्य है. इससे एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जहां अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है.”
10% और 12.5% का अतिरिक्त टैरिफ
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि भारत, चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब सहित 54 देश जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं. इसमें आगे कहा गया है कि छह अर्थव्यवस्थाएं – कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय यूनियन, इंडोनेशिया, मैक्सिको और पाकिस्तान – जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर मौजूदा प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही हैं.
जिन अर्थव्यवस्थाओं ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाया है, या जिन्होंने पारस्परिक व्यापार समझौते के माध्यम से इस तरह के प्रतिबंध को लागू करने और उसे प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, या जिन अर्थव्यवस्थाओं ने कुछ जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने के लिए आंशिक व्यवस्था लागू की है, उनके लिए अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (यूएसटीआर) ने 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित किया है. वहीं, बयान में आगे कहा गया है, “अन्य सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिए, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि 12.5 प्रतिशत की अतिरिक्त शुल्क दर का प्रस्ताव करता है.”
वहीं, भारत ने जबरन श्रम संबंधी धारा के तहत लगे आरोपों का खंडन किया है. भारत ने अमेरिका से जांच समाप्त करने का आग्रह करते हुए कहा है कि ऐसे मामलों को चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के ढांचे के भीतर ही निपटाया जाना चाहिए.
भारत-अमेरिका टैरिफ कहानी
बीते साल अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी तक का टैरिफ लगा दिया था. इसमें 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल था, जो भारत पर रूस से तेल की खरीदारी करने पर लगाया गया था. इस वजह से भारतीय सामानों को अमेरिका में भेजने पर काफी अधिक टैक्स देना पड़ता था. लेकिन 2 फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील और बातचीत के बाद 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया गया था और मूल टैरिफ को घटाकर मात्र 18 फीसदी कर दिया गया था.
उसके बाद 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ आदेश के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में ट्रंप के टैरिफ वाले आदेश को असंवैधानिक करार दिया गया. इसके बाद अमेरिका के द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर 10 से 15 फीसदी का नया और अस्थायी ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया है. भारत पर यह 10 फीसदी का है.
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News Source: PTI
