Home Top News जेल में रहेंगे उमर-शरजील, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी दिल्ली दंगों के मामले में जमानत; 5 को मिली राहत

जेल में रहेंगे उमर-शरजील, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी दिल्ली दंगों के मामले में जमानत; 5 को मिली राहत

by Sachin Kumar 5 January 2026, 12:09 PM IST (Updated 22 January 2026, 1:25 PM IST)
5 January 2026, 12:09 PM IST (Updated 22 January 2026, 1:25 PM IST)
SC Verdict on Umar Khalid Sharjeel Imam

Delhi Riots : हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी उमर खालिद और शरजील इमाम को झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने दोनों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन इस दौरान 5 आरोपियों को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है.

Delhi Riots : 2020 में दिल्ली दंगों में आरोपी स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया. लेकिन 5 लोगों को जमानत दे दी है, जिसमें एक्टिविस्ट गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद शामिल हैं. वहीं, सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था पर विचार करते समय, ट्रायल शुरू होने से पहले आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रखने के मामले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिसएन. वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया है.

पांच लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत

वहीं, बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि ट्रायल शुरू होने से पहले ही आरोपियों को जेल में रहते हुए 5 साल हो गए हैं और उनको जमानत मिलनी चाहिए. शीर्ष अदालत ने 10 दिसंबर को आरोपियों और दिल्ली पुलिस की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और अब पांच लोगों को जमानत दे दी. हालांकि, इस दौरान शरजील इमाम और उमर खालिद को इससे राहत नहीं मिली. ये सभी आरोपी 2020 के दिल्ली दंगों में अपनी कथित भूमिका के लिए पांच साल से जेल में हैं. साथ ही इन दोनों के अलावा अन्य आरोपी जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ जाएंगे. बता दें कि इन सभी आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था.

12 शर्तों के अधीन मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद समीर खान, शादाब अहमद और शिफाउर रहमान को मिली जमानत से उनके ऊपर लगे आरोपों में किसी प्रकार की नरमी नहीं आती है. उन्हें करीब 12 शर्तों के साथ जमानत दी गई है. अगर इन शर्तों में से एक का भी उल्लंघन पाया जाता है तो ट्रायल कोर्ट आरोपियों पर सुनवाई करने के बाद जमानत याचिका को रद्द करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है.

सभी के साथ नहीं किया जा सकता एक-सा व्यवहार

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट कर दिया कि प्रत्येक एक व्यक्ति के मामले में फैसला उनकी अलग-अलग भूमिकाओं को लेकर दिया गया है. अदालत ने यह भी कहा कि सभी अपीलकर्ताओं को दोषसिद्धि के मामले में समान दर्जा नहीं दिया जा सकता है. साथ ही कुछ आरोपियों का अपराध सहायक के रूप में प्रतीत हुआ है. साथ ही सभी आरोपियों की भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए और सभी के साथ समान व्यवहार भी नहीं किया जा सकता है.

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