Farooq Abdullah: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पाकिस्तान पर दिए गए अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं. शिवसेना और बीजेपी ने उनके बयान पर निशाना साधा है. शिवसेना नेता शायना एनसी ने रविवार को इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला पर पाकिस्तान के बयानों को दोहराने का आरोप लगाया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर में किसी जिम्मेदार पद पर रहने के योग्य हैं?
उन्हें जिम्मेदार पद पर रहने का अधिकार नहीं
शायना एनसी ने कहा कि जब फारूक अब्दुल्ला जैसे वरिष्ठ नेता कहते हैं कि पाकिस्तान हमें बचा रहा है. उन्हें कश्मीर में नेतृत्व करने या किसी जिम्मेदार पद पर रहने का क्या अधिकार है? वे बस पाकिस्तान की सोच को ही दोहरा रहे हैं. उन्होंने अब्दुल्ला पर गांधी और नेहरू का नाम लेते हुए असल में मुहम्मद अली जिन्ना के एजेंडे को जिंदा रखने का आरोप लगाया. शायना ने कहा कि वे गांधी-नेहरू की बात करते हैं लेकिन वह भूल जाते हैं कि जिन्ना का एजेंडा क्या था और अब वे उसी एजेंडे को जिंदा रखे हुए हैं. शायना ने आगे कहा कि अगर आप (फारूक अब्दुल्ला) भारत की विचारधारा और सोच से सहमत नहीं है तो आपको भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है.
पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाया
वहीं, हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने भी रविवार को फारूक अब्दुल्ला के बयानों की आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि अब्दुल्ला भारत से ज्यादा पाकिस्तान से प्यार करते हैं और जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर देश का एक अभिन्न अंग है. उन्होंने आगे कहा कि उनका चरित्र तो देश में सभी को पता है. वे भारत से ज्यादा पाकिस्तान से प्यार करते हैं. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया है और अब यह क्षेत्र अन्य राज्यों के बराबर आ गया है. मैं उनसे कहना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का हिस्सा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर उस विशेष दर्जे को खत्म कर दिया है, जिसे कभी कांग्रेस ने उनको दिया था.
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कोई भी हमला सफल नहीं होगा
विज ने कश्मीर में जी-20 बैठकों और अंतरराष्ट्रीय मैचों के आयोजन का जिक्र किया. साथ ही कुछ लोगों पर इस क्षेत्र में लगातार हमले करने की कोशिश का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आज वहां जी-20 की बैठक हो रही है. वहां अंतरराष्ट्रीय मैच भी होते हैं. कुछ गुमराह लोग लगातार वहां हमला करने की कोशिश करते रहते हैं. उनका कोई भी हमला सफल नहीं होगा. उन्होंने आगे कहा कि कुछ भी बुरा नहीं हुआ है. शनिवार को एक कार्यकर्ताओं सम्मेलन को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि क्या कश्मीरी लोग दिल्ली से न्याय की उम्मीद कर सकते हैं. उन्होंने स्थानीय लोगों से अपनी पहचान के लिए खड़े होने और संघर्ष करने का आह्वान किया.
दिल्ली से क्या उम्मीद कर सकते हैं?
बता दें कि लोगों को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने कहा था कि आप दिल्ली से क्या उम्मीद कर सकते हैं? आपमें उनके सामने खड़े होने और लड़ने का साहस होना चाहिए. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपका अस्तित्व ही मिट जाएगा. आपका नाम और पहचान खत्म हो जाएगी. कोई आपको याद भी नहीं रखेगा. हमारा पड़ोसी लगातार उनके पीछे पड़ा है. वह हर जगह जाकर कहता है कि कश्मीर मुद्दा अभी तक सुलझा नहीं है. वह हमारी रक्षा कर रहा है. वरना, उनके इरादे अच्छे नहीं हैं. वे कहते कुछ हैं और करते कुछ और ही हैं. इसके अलावा अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल कार्यालय के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेश पर नई दिल्ली की प्रशासनिक पकड़ को भी निशाना बनाया. उन्होंने एक लंबित प्रशासनिक नियम का जिक्र किया, जिसके तहत मेडिकल स्नातकों (MBBS, MD, MS) को स्थानीय ग्रामीण अस्पतालों में दो साल की अनिवार्य सेवा पूरी करनी होगी.
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News Source: ANI
