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मिलान में हिंसा के बाद भारी सुरक्षा बल तैनात, सड़कों पर उतरेंगे 500 अतिरिक्त सैनिक, ड्रोन से निगरानी

by Sanjay Kumar Srivastava 24 October 2026, 9:36 PM IST (Updated 24 October 2026, 9:37 PM IST)
24 October 2026, 9:36 PM IST (Updated 24 October 2026, 9:37 PM IST)
मिलान में हिंसा के बाद भारी सुरक्षा बल तैनात, सड़कों पर उतरेंगे 500 अतिरिक्त सैनिक, ड्रोन से शुरू हुई निगरानी

Italy Violence: इटली की फैशन और वित्तीय राजधानी मिलान में लूटपाट और पुलिस के साथ हिंसक झड़पों के बाद सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है. शहर में फिर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होने की आशंका को देखते हुए प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मिलान में अतिरिक्त 500 सैनिकों को तैनात करने का फैसला किया है. यह कदम वहां पहले से मौजूद सैकड़ों सैनिकों और लगभग 5,000 पुलिसकर्मियों व कानून प्रवर्तन कर्मियों की मदद के लिए उठाया गया है.

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ड्रोन से की जा रही निगरानी

पुलिस ने बताया कि पिछले दिनों हुई हिंसा में नाबालिगों की बड़ी भूमिका थी, जिसके कारण प्रधानमंत्री मेलोनी ने नाबालिग अपराधियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान भी घोषित किया है. मिलान के मेयर ग्यूसेपे साला ने सप्ताहांत पर दोबारा हिंसा होने की चिंता जताते हुए सेना की इस अतिरिक्त तैनाती का समर्थन किया है. सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए अधिकारी ड्रोन से निगरानी रख रहे हैं, रेलवे स्टेशनों पर सघन जांच की जा रही है और रैपिड-रिस्पॉन्स यूनिट्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है. इसके अलावा, हिंसा भड़काने वाली ऑनलाइन सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी पैनी नज़र रखी जा रही है.

यूरोप के कई हिस्सों में अशांति का माहौल

इस समय यूरोप के कई हिस्सों में अशांति का माहौल है. भले ही फ्रांस के प्रदर्शनों ने वैश्विक ध्यान खींचा है, लेकिन पुर्तगाल से लेकर अल्बानिया और मिलान तक, यूरोप के कई शहरों में प्रदर्शनों का दौर जारी है. पिछले सप्ताहांत, दंगाई दुकानों में जबरन घुस गए थे. उन्होंने शहर के मुख्य ‘डुओमो स्क्वायर’ से जुड़ी सड़कों पर स्थित दुकानों को निशाना बनाया, जहां मुख्य रूप से स्नीकर्स, एथलेटिक कपड़े और खेल का सामान मिलता है. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था केवल शहर के केंद्र तक ही सीमित नहीं रहेगी, क्योंकि ऐसी आशंका है कि प्रदर्शनकारी भारी पुलिस तैनाती वाले इलाकों से बचकर दूसरे इलाकों में जा सकते हैं.

सैनिकों के पास जरूरी उपकरण नहीं

FSP पुलिस यूनियन के महासचिव वाल्टर मैज़ेट्टी ने बताया कि सैनिक तुरंत अतिरिक्त मदद तो दे सकते हैं, लेकिन वे पुलिस में कर्मचारियों की कमी को दूर नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों को संभालने के लिए पुलिस को विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है. रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि सैनिकों के पास सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़रूरी उपकरण नहीं हैं. उन्होंने बताया कि सैनिकों को हाल ही में प्लास्टिक के ‘रिस्ट्रेंट टाई’ (बांधने वाले बैंड) इस्तेमाल करने की अनुमति मिली है, और वह भी केवल रेलवे स्टेशनों के आसपास के इलाकों में, पूरे शहर में नहीं. उन्होंने कहा कि उन्हें पेपर स्प्रे या टेज़र (बिजली का झटका देने वाले उपकरण) रखने की भी अनुमति नहीं है.

हिंसा में शामिल 45 गिरफ्तार

मिलान पुलिस का कहना है कि पिछले हफ्ते हुई हिंसा और लूटपाट में लगभग 2,000 बहुत युवा प्रदर्शनकारी शामिल थे. इनमें से बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जो ‘दूसरी पीढ़ी के इतालवी’ (जिनके माता-पिता बाहर से आकर इटली में बस गए थे) थे, साथ ही कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे. दो दिनों के दौरान पुलिस ने 45 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से 34 नाबालिग थे.

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मिलान के कल्याण पार्षद लैम्बर्टो बर्टोले ने बताया कि लूटपाट में शामिल युवाओं की पृष्ठभूमि और उनके इरादों को समझने के लिए और अधिक जांच की जरूरत है. सेंटर-लेफ्ट डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य बर्टोले ने कहा कि कई युवाओं में अपनापन महसूस करने की भावना और भविष्य की संभावनाएं कम होती जा रही हैं. सामाजिक और आर्थिक असमानताओं के बीच, हमारे समाज का एक हिस्सा खुद को अलग-थलग महसूस करता है.

रोम में भी सुरक्षा कड़ी

रोम में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. यहां अधिकारियों ने लग्जरी शॉपिंग वाली सड़कों को बंद कर दिया है और ‘सर्कस मैक्सिमस’ तथा ‘पियाज़ा डेल पोपोलो’ के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी है. ऐसा संभावित प्रदर्शनों को देखते हुए किया गया है, जिनमें दक्षिणपंथी छात्रों द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन भी शामिल है. मध्य ‘पियाज़ा डेला रिपब्लिका’ से युद्ध-विरोधी मार्च शुरू होने वाला है. इस दौरान हिंसक समूहों के घुसपैठ करने की आशंका जताई जा रही है. आयोजकों ने खुद को संभावित उपद्रव से दूर रखने की कोशिश की है. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे अपने चेहरे न ढकें और अपने हाथ खुले रखें. रोम और मिलान के अलावा, कम से कम सात अन्य शहरों में भी प्रदर्शनों का आह्वान किया गया है. हाल ही में बने ‘अक्टूबर 17 मूवमेंट’ ने, छात्र संघों, स्थानीय ट्रेड यूनियनों और युद्ध-विरोधी गठबंधनों के साथ मिलकर, इन प्रदर्शनों में मुख्य भूमिका निभाई है.

तिराना में भी विरोध-प्रदर्शन

अल्बानिया की राजधानी तिराना में भी विरोध-प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है. पिछले एक हफ्ते से ज़्यादा समय से, प्रदर्शनकारी पुलिस पर पत्थर, फ्लेयर्स, फायरबॉम्ब और आतिशबाज़ी फेंक रहे हैं. इसके जवाब में पुलिस ने शहर के केंद्र में हुई झड़पों के दौरान लाठियों, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया है. हाई स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र ट्यूशन फीस कम करने और शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. साथ ही, वे शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार का भी विरोध कर रहे हैं. वे सरकार विरोधी एक बड़े आंदोलन में शामिल हो गए हैं, जिसमें समाजवादी प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग की जा रही है.

किराए और घरों की कीमतें बढ़ने से लोग परेशान

स्पेन की राजधानी मैड्रिड में सेवानिवृत्त लोगों और अन्य लोगों के विरोध-प्रदर्शन करने की उम्मीद है. उनकी मांग है कि सार्वजनिक पेंशन व्यवस्था से कोई छेड़छाड़ न की जाए. अगले महीने होने वाले अचानक चुनावों से पहले ये लोग एकजुट हो गए हैं. प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ की सोशलिस्ट पार्टी ने विपक्षी कंजर्वेटिव ‘पॉपुलर पार्टी’ की आलोचना की है, क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक पेंशन के निजीकरण का संकेत दिया था. इस पतझड़ के मौसम में स्पेन में आवास के मुद्दे को लेकर भारी विरोध-प्रदर्शन हुए हैं.

हाल के वर्षों में किराए और घरों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि कई स्पेनिश नागरिकों के लिए उन्हें वहन करना मुश्किल हो गया है. स्पेन के शहरों में आवास की कमी और गंभीर हो गई है. इसके पीछे पर्यटन, आप्रवासन और अल्पकालिक किराए (शॉर्ट-टर्म रेंटल) की बढ़ती संख्या के कारण हुई जनसंख्या वृद्धि एक बड़ा कारण है. सितंबर में मैड्रिड में 87 वर्षीय एक महिला को उसके किराए के अपार्टमेंट से निकाले जाने की घटना के बाद, राजधानी और अन्य जगहों पर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए. यह आंदोलन मुख्य रूप से एक टेंट कैंप के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जो राजधानी के ‘पुएर्ता डेल सोल’ चौक पर लगभग एक महीने से लगा हुआ है.

लिस्बन में भी सस्ते आवास के लिए प्रदर्शन

स्पेन के लोगों से प्रेरित होकर, लिस्बन में किफायती आवास की मांग को लेकर इकट्ठा हो रहे प्रदर्शनकारी पूरे शहर में मार्च निकालने वाले हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो की सरकार द्वारा हाल ही में घोषित किए गए कदमों की भी आलोचना की है. इन कदमों में सालाना किराया वृद्धि की सीमा को आसान बनाना और किराया न चुकाने वाले किरायेदारों को घर से निकालना आसान करना शामिल है. मोंटेनेग्रो इन कदमों का बचाव करते हुए कहते हैं कि इनका उद्देश्य किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच विश्वास को मजबूत करना और किराये के बाजार को बढ़ावा देना है. वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये कदम संतुलित नहीं हैं और इनसे किरायेदारों की स्थिति और भी कमजोर हो जाएगी.

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