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हिमंता सरमा का छात्र राजनीति से उदय और असम आंदोलन से मिली पहचान, ऐसे रहा राजनीतिक सफर

by Sanjay Kumar Srivastava
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हिमंता सरमा का छात्र राजनीति से उदय और असम आंदोलन से मिली पहचान, ऐसे रहा राजनीतिक सफर की शुरुआत

Himanta Biswa Sarma: हिमंता बिस्वा सरमा का एक छात्र नेता से असम के मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी पारी (2026) तक का सफर भारतीय राजनीति की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक है. 12 मई 2026 को उन्होंने लगातार दूसरी बार राज्य की कमान संभाली, जो उनकी रणनीतिक कुशलता और जनता के बीच लोकप्रिय छवि का परिणाम है. हिमंता ने अपना करियर छात्र राजनीति से शुरू किया. 1 फरवरी 1969 को जोरहाट में जन्मे हिमंता बिस्वा सरमा की शिक्षा असम के प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज (अब कॉटन यूनिवर्सिटी) से हुई. उन्होंने यहां से राजनीति विज्ञान में स्नातक (1990) और स्नातकोत्तर (1992) की डिग्री ली. इसके बाद उन्होंने गुवाहाटी के सरकारी लॉ कॉलेज से LLB किया और गुवाहाटी विश्वविद्यालय से PhD की उपाधि प्राप्त की.

  • कॉटन कॉलेज छात्रसंघ के तीन बार रहे महासचिव
  • कांग्रेस में दो दशक और बीजेपी में प्रवेश
  • प्रथम कार्यकाल के लोकप्रिय फैसले और 2026 की जीत
  • शैक्षिक सुधार के रूप में पहचान
  • प्रचंड बहुमत हासिल कर रचा इतिहास
  • जालुकबारी बना अजेय गढ़
  • शैक्षणिक हब के रूप में विकास
  • स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण
  • पेयजल और स्वच्छता
  • पवन खेड़ा और सरमा विवाद
  • हाईकोर्ट से सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई
  • खेड़ा ने हिमंता को बताया दोस्त

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कॉटन कॉलेज छात्रसंघ के तीन बार रहे महासचिव

हिमंता की राजनीति की नींव 1980 के दशक के प्रसिद्ध असम आंदोलन के दौरान पड़ी. छात्र जीवन में वे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और कॉटन कॉलेज छात्रसंघ के महासचिव के रूप में तीन बार चुने गए, जो उस समय एक रिकॉर्ड था. हिमंता शर्मा को राज्य स्तर पर असली पहचान असम आंदोलन (1979-1985) से मिली, जो अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाया गया एक ऐतिहासिक आंदोलन था. इसी आंदोलन के दौरान उन्होंने असम की क्षेत्रीय अस्मिता और जनसांख्यिकीय बदलाव की चुनौतियों को करीब से समझा, जो आज भी उनकी राजनीति का मुख्य केंद्र है.

कांग्रेस में दो दशक और बीजेपी में प्रवेश

बीजेपी में आने से पहले हिमंता बिस्वा सरमा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक कद्दावर नेता थे. उन्होंने लगभग 20 साल कांग्रेस में बिताए. वह पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाते थे. हालांकि, राहुल गांधी के साथ मतभेदों और गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को तरजीह दिए जाने के कारण उन्होंने 2015 में कांग्रेस छोड़ दी. अगस्त 2015 में वे बीजेपी में शामिल हो गए और अपनी सांगठनिक क्षमता से न केवल असम, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में बीजेपी की जड़ें मजबूत कीं. नेडा के संयोजक के रूप में उन्होंने क्षेत्र के अन्य राज्यों में भी बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकारें बनाने में अहम भूमिका निभाई.

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लोकप्रिय फैसले और 2026 की जीत

मई 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके प्रशासन और सख्त फैसलों ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. उनके कार्यकाल के कुछ प्रमुख फैसलों ने 2026 में उनकी जीत की राह आसान बना दी. अपराध और घुसपैठ पर जमकर प्रहार किया. अवैध घुसपैठ और ड्रग्स तस्करी के खिलाफ उन्होंने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई. भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और स्थानीय लोगों को भूमि अधिकार दिलाने के लिए चलाया गया यह अभियान बेहद सफल रहा. इसके अलावा ग्रामीण महिलाओं के लिए माइक्रोफाइनेंस कर्ज माफी योजना ने उन्हें महिला वोट बैंक के बीच हीरो बना दिया.

शैक्षिक सुधार के रूप में पहचान

सरकारी अनुदान प्राप्त मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदलने के उनके फैसले ने सांस्कृतिक और शैक्षिक सुधार के रूप में पहचान दिलाई. आम जनता के बीच सरल छवि के साथ वे एक ऐसे सुलभ मुख्यमंत्री के रूप में उभरे जो सीधे लोगों की समस्याओं को सुनते थे. हिमंता शर्मा को राज्य स्तर पर असली पहचान असम आंदोलन (1979-1985) से मिली, जो अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाया गया एक ऐतिहासिक आंदोलन था. उन्होंने एक किशोर कार्यकर्ता के रूप में AASU के बड़े नेताओं के साथ काम किया और संदेशवाहक की भूमिका निभाई. इसी आंदोलन के दौरान उन्होंने असम की क्षेत्रीय अस्मिता और जनसांख्यिकीय बदलाव की चुनौतियों को करीब से समझा, जो आज भी उनकी राजनीति का मुख्य केंद्र है.

प्रचंड बहुमत हासिल कर रचा इतिहास

2026 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन (NDA) ने 126 में से 102 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिसमें हिमंता बिस्वा सरमा का व्यक्तिगत प्रभाव और शासन का ‘रिपोर्ट कार्ड’ सबसे बड़ी वजह रहा. असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया है. इस ऐतिहासिक जीत के महानायक रहे मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, जिन्होंने अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से रिकॉर्ड छठी बार जीत दर्ज की है. उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस की बिदिशा नियोग को 89,434 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी. कांग्रेस प्रत्याशी बिदिशा नियोग को महज 37,717 वोटों से संतोष करना पड़ा.

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जालुकबारी बना अजेय गढ़

जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पकड़ कितनी मजबूत है, यह 2026 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है. सरमा इस सीट से लगातार 2001 से चुनाव जीतते आ रहे हैं. उन्होंने पहले तीन बार कांग्रेस के टिकट पर और फिर बीजेपी में शामिल होने के बाद लगातार तीन बार (2016, 2021 और 2026) यहां से जीत का परचम लहराया है. मुख्यमंत्री सरमा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र जालुकबारी को राज्य के एक रोल मॉडल निर्वाचन क्षेत्र के रूप में विकसित किया है. उनके नेतृत्व में इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं.

शैक्षणिक हब के रूप में विकास

जालुकबारी क्षेत्र को असम और पूरे पूर्वोत्तर का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र माना जाता है. सरमा के प्रयासों से गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम इंजीनियरिंग कॉलेज और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) जैसे बड़े संस्थानों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया गया है. साथ ही कई सरकारी स्कूलों को ‘पीएम श्री’ योजना के तहत अपग्रेड किया गया है.

स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण

निर्वाचन क्षेत्र के भीतर सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गुवाहाटी के चालू होने और जालुकबारी से इसकी बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में उनकी अहम भूमिका रही है, जिससे स्थानीय निवासियों को विश्वस्तरीय इलाज मिल रहा है. ब्रह्मपुत्र नदी पर नए पुलों के निर्माण और सड़कों के चौड़ीकरण से जालुकबारी में ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिली है. सड़कों के जाल और फ्लाईओवर निर्माण ने इस क्षेत्र को राज्य के अन्य हिस्सों से बेहद सुगम तरीके से जोड़ दिया है.

पेयजल और स्वच्छता पर काम

‘जल जीवन मिशन’ के तहत जालुकबारी के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के हर घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है. जलभराव की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम तैयार किए गए हैं. क्षेत्र में ‘ओरुनोडोई’ योजना जैसी कल्याणकारी पहलों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, जिससे हजारों गरीब परिवारों की महिलाओं को सीधी वित्तीय सहायता मिल रही है. स्वयं सहायता समूहों को मजबूत कर स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा किए गए हैं. इस शानदार जीत के बाद हिमंता बिस्वा सरमा का असम और देश की राजनीति में कद और मजबूत हो गया है.

पवन खेड़ा और सरमा विवाद

असम विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बीच गरमाया विवाद देश के राजनीतिक और कानूनी हलकों में भारी चर्चा का विषय बना रहा. चुनाव प्रचार के चरम पर शुरू हुआ ये विवाद सीधे कोर्ट तक पहुंच गया. विवाद की मुख्य वजह अप्रैल 2026 में शुरू हुई, जब कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर विदेशी संपत्तियों में कथित निवेश और फर्जी दस्तावेज और कई पासपोर्ट रखने के गंभीर आरोप लगाए.

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कांग्रेस ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया और इसे मुख्यमंत्री का भ्रष्टाचार बताया. इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने असम में पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और एक निर्दोष महिला को राजनीति में घसीटा. इसके बाद असम पुलिस की टीम जांच के सिलसिले में दिल्ली पहुंची और दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित खेड़ा के फ्लैट पर छापेमारी की. पवन खेड़ा पर धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और मानहानि समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गईं.

हाईकोर्ट से सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई

इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि राजनीतिक फायदे के लिए किसी महिला को विवाद में घसीटना गलत है और जांच जरूरी है. इसके बाद खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. मई 2026 की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को पूरी तरह से राजनीतिक लड़ाई बताया और कहा कि चुनाव के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अशोभनीय टिप्पणियां की गईं, इसलिए हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है.

खेड़ा ने हिमंता को बताया दोस्त

हालांकि, कोर्ट ने शर्त रखी कि खेड़ा को असम पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मई 2026 में पवन खेड़ा असम पुलिस की अपराध शाखा के सामने पेश हुए और अपने दावों से जुड़े दस्तावेज सौंपे. राजनीतिक मोर्चे पर हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया कि खेड़ा की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उल्टी पड़ गई. उनके मुताबिक, इन बेबुनियाद आरोपों से असम के लोगों की भावनाएं आहत हुईं, जिससे वोट बीजेपी की तरफ चले गए और पार्टी को चुनाव में बड़ा फायदा मिला. वहीं, चुनाव खत्म होने के बाद राजनीतिक नरमी भी देखने को मिली, जब पवन खेड़ा ने बयान दिया कि चुनाव के दौरान जो कुछ भी हुआ वह खत्म हो गया है और वह हिमंता बिस्वा सरमा को अपना दोस्त मानते हैं.

हिमंता ने अपना करियर छात्र राजनीति से शुरू किया. 1 फरवरी 1969 को जोरहाट में जन्मे हिमंता बिस्वा सरमा की शिक्षा असम के प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज (अब कॉटन यूनिवर्सिटी) से हुई. उन्होंने यहां से राजनीति विज्ञान में स्नातक (1990) और स्नातकोत्तर (1992) की डिग्री ली. इसके बाद उन्होंने गुवाहाटी के सरकारी लॉ कॉलेज से LLB किया और गुवाहाटी विश्वविद्यालय से PhD की उपाधि प्राप्त की.

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