UP Politics: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समाज को साधने की कवायद तेज कर दी है. इसी रणनीति के तहत लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में ब्राह्मण समाज के नेताओं की अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक में जनेश्वर मिश्र जयंती को बड़े स्तर पर मनाने, ब्राह्मण समाज के मुद्दों को उठाने और पीडीए के दायरे को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. वहीं भाजपा ने सपा के इस अभियान को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि ब्राह्मण समाज भाजपा और सनातन विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ा है.
ब्राह्मणों को साधने में जुटी सपा
2027 के चुनावी रण से पहले समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों को साधने में जुट गई है. इसी कड़ी में सपा मुख्यालय में ब्राह्मण समाज के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. सपा सांसद सनातन पांडेय के नेतृत्व में हुई इस बैठक की अध्यक्षता विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माताप्रसाद पांडेय ने की. बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. विधायक, पूर्व विधायक, सांसद और पूर्व सांसदों ने भी भाग लिया. बैठक में 5 अगस्त को समाजवादी विचारक जनेश्वर मिश्र की जयंती को बड़े स्तर पर मनाने और उसके जरिए ब्राह्मण समाज को जोड़ने की रणनीति पर चर्चा की गई.
ब्राह्मण समाज उपेक्षित: अमिताभ
बैठक के बाद सपा विधायक अमिताभ वाजपेयी ने कहा कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है और कई स्थानों पर उसके साथ अन्याय व उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की गई है. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी 5 अगस्त को जनेश्वर मिश्र जयंती के माध्यम से ब्राह्मण समाज की पीड़ा और उसके मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी.
सपा नेताओं का कहना है कि पीडीए केवल पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हर वह वर्ग शामिल है जो सम्मान और भागीदारी चाहता है. पार्टी का दावा है कि ब्राह्मण समाज भी पीडीए परिवार का हिस्सा है और समाजवादी पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है. हालांकि भाजपा ने सपा की इस कवायद पर सवाल उठाए हैं.
सनातन हमारे साथ: चौधरी
भाजपा प्रवक्ता संजय चौधरी का कहना है कि ब्राह्मण समाज हमेशा संस्कृति, संस्कार और सनातन मूल्यों के साथ खड़ा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का राजनीतिक चरित्र और उसकी विचारधारा ब्राह्मण समाज की सोच से मेल नहीं खाती. भाजपा का दावा है कि ब्राह्मण समाज का भरोसा भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर कायम है, इसलिए सपा का यह प्रयास सफल नहीं होगा.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक हमेशा प्रभावशाली माना जाता रहा है. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी जहां ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा अपने पारंपरिक समर्थन आधार को बरकरार रखने का दावा कर रही है. अब देखना होगा कि जनेश्वर मिश्र जयंती के बहाने शुरू हुई यह राजनीतिक कवायद चुनावी समीकरणों पर कितना असर डालती है.
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