Kaveri Dispute: कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच 130 साल से चले आ रहे कावेरी जल विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. कर्नाटक के किसानों ने सड़कों पर उतरने की धमकी दी है. ताजा तनाव तब शुरू हुआ जब कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया.
इस आदेश से कर्नाटक के किसान बेहद खफा हैं. किसानों का तर्क है कि अल-नीनो और कमजोर मानसून के कारण कर्नाटक के जलाशयों में पानी का प्रवाह सामान्य से करीब 60% कम है. ऐसी गंभीर स्थिति में खुद कर्नाटक के कई जिलों में सिंचाई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के लिए पीने के पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है.
13 अगस्त को कर्नाटक बंद का आह्वान
किसानों का कहना है कि जब उनके पास खुद की फसलों को बचाने और पीने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है, तो तमिलनाडु को पानी कैसे दिया जा सकता है. इस आक्रोश को देखते हुए किसान संगठनों ने 13 अगस्त को कर्नाटक बंद का आह्वान किया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे कर्नाटक के किसानों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और इस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय और प्राधिकरण के समक्ष अपील करेंगे. वहीं तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK तुरंत पानी छुड़वाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है.

शिवकुमार के आग्रह पर जोसेफ ने टाली यात्रा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि उनकी सरकार कावेरी मुद्दे पर राज्य के किसानों और लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही, उन्होंने संगठनों से राज्यव्यापी बंद के प्रस्ताव को वापस लेने की अपील की. उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर कावेरी जल विवाद को देखते हुए बेंगलुरु की अपनी यात्रा टालने पर सहमत हो गए हैं.
उन्होंने इस कदम को दोनों राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने में मददगार बताया. दोनों नेताओं को कावेरी मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार (3 अगस्त) को मिलना था, लेकिन शिवकुमार ने विजय से अपनी यात्रा टालने का आग्रह किया था ताकि बेहतर माहौल में बातचीत हो सके, क्योंकि इस सप्ताह की शुरुआत में अंतरराज्यीय विवाद को लेकर पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे.
पीने के पानी को प्राथमिकता
कन्नड़ समर्थक संगठनों ने 13 अगस्त को कर्नाटक बंद का आह्वान किया है. यह बंद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के गुरुवार के उस आदेश के विरोध में है, जिसमें कावेरी जल विनियमन समिति के उस आदेश को बरकरार रखा गया था, जिसके तहत तमिलनाडु को 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया था. रविवार को कावेरी मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद शिवकुमार ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि बारिश से हालात बेहतर हुए हैं और सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है, इसलिए ऐसे बंद से किसी को फ़ायदा नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कानूनी दायरे में रहकर फ़ैसले लेती रहेगी, पीने के पानी की ज़रूरतों को प्राथमिकता देगी. कानूनी और कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेगी और आगे कोई भी कदम उठाने से पहले पानी की बदलती स्थिति पर बारीकी से नज़र रखेगी.
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कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक सरकार किसानों के साथ
शिवकुमार ने कहा कि हमारी सरकार कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक के किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. यह बताते हुए कि वह खुद भी कावेरी बेसिन से आते हैं और एक किसान के बेटे हैं. शिवकुमार ने कहा कि राज्य के 7.5 करोड़ लोगों को कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही के बारे में अपनी कानूनी टीम से सलाह लेने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेगी. तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी DMK के सुप्रीम कोर्ट जाने का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए जवाब देगा.

मेकेदातु प्रोजेक्ट का तमिलनाडु कर रहा विरोध
शिवकुमार ने समझाया कि अदालत की कार्यवाही से निपटते समय हमें वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ उठाते हुए बहुत सावधानी से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने फिर से कहा कि मेकेदातु प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपना फ़ैसला सुना चुका है. यह प्रोजेक्ट राज्य में कावेरी नदी पर मेकेदातु में एक बैलेंसिंग रिज़र्वोयर बनाने के बारे में है और तमिलनाडु इसका विरोध कर रहा है. उसका कहना है कि अगर यह बांध बना तो उसके हितों को नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि कर्नाटक में अब तक सामान्य बारिश का सिर्फ़ 30 से 35 प्रतिशत ही पानी बरसा है और राज्य पर सूखे का खतरा बना हुआ है, इसलिए सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे वैज्ञानिक सलाह मिलने तक धैर्य रखें.
कर्नाटक को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने बताया कि CWRC और CWMA ने कर्नाटक को 15 दिनों के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था, जबकि तमिलनाडु ने 9 TMC पानी की मांग की थी. रिज़र्वोयर की ताज़ा स्थिति बताते हुए शिवकुमार ने कहा कि काबिनी में 24,000 क्यूसेक, KRS में 22,000 क्यूसेक, हेमावती में 11,884 क्यूसेक और हारंगी में 10,430 क्यूसेक पानी आ रहा है, जिससे कुल आवक लगभग 67,178 क्यूसेक हो गई है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कर्नाटक को पीने के पानी के लिए 40 TMC पानी सुरक्षित रखना होगा, जिसमें कम से कम 36 TMC ज़रूरी है और बाकी 4 TMC आपातकालीन स्थिति के लिए रखा जाएगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी सिर्फ़ पीने के पानी की सप्लाई वाली झीलों को भरने के लिए छोड़ा गया था, न कि सिंचाई के लिए. वहीं, पानी की आवक बढ़ने के बाद बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काबिनी से सीमित मात्रा में पानी छोड़ना ज़रूरी हो गया था. शिवकुमार ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विपक्ष के नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने सरकार की कोशिशों का एकमत से समर्थन किया और राज्य के हित में लिए गए फैसलों में साथ देने का भरोसा दिलाया.
विरोध प्रदर्शनों की कोई जरूरत नहीं
शिवकुमार ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सभी की यह राय थी कि बंद से कोई फायदा नहीं होगा. जब सरकार खुद लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है और प्रकृति भी हमारा साथ दे रही है, तो ऐसे विरोध प्रदर्शनों की कोई ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि वह खुद कन्नड़-समर्थक संगठनों से बात करेंगे, जबकि मंत्री भी किसानों और अन्य समूहों से बातचीत करके उन्हें बंद न करने के लिए मनाएंगे.

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कानूनी मोर्चे पर शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक कानूनी तरीकों से अपने हितों की रक्षा करना जारी रखेगा और कोई भी फैसला लेने से पहले वरिष्ठ विशेषज्ञों से सलाह लेगा. उन्होंने बताया कि CWRC और CWMA की बैठकें जनवरी तक हर 15 दिन में होने की उम्मीद है. तमिलनाडु के कानूनी कदमों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य अपनी कानूनी टीम से सलाह लेने के बाद अदालतों में उचित जवाब देगा.
किसानों के लिए 30 करोड़ से ज्यादा मंजूर
मुख्यमंत्री शुवकुमार ने यह भी कहा कि कृषि विशेषज्ञ और विश्वविद्यालय, सूखे की चेतावनी और बारिश की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए फसल के तरीकों के बारे में ज़िले के हिसाब से सलाह जारी करेंगे. साथ ही, कैबिनेट ने हाल ही में किसानों की मदद के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरी तकनीकों के इस्तेमाल के लिए 30 करोड़ रुपये से ज़्यादा मंज़ूर किए हैं. शिवकुमार ने कहा कि अभी सूखा घोषित करना जल्दबाज़ी होगी, क्योंकि मंत्री अभी भी ज़िलों का दौरा कर रहे हैं और ज़मीनी हालात की रिपोर्ट इकट्ठा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग संभालने वाले उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, कैबिनेट के सामने मामला रखने से पहले NDMA और NDRF के दिशा-निर्देशों के अनुसार रिपोर्ट का आकलन करेंगे.
झीलों को भरना पहली प्राथमिकता
मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वायर प्रोजेक्ट पर उन्होंने कहा कि बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इसे एक स्थायी समाधान बताया था और ज़ोर दिया था कि इस प्रोजेक्ट को बिना किसी देरी के आगे बढ़ाया जाना चाहिए. शिवकुमार ने कहा कि हमारी तुरंत प्राथमिकता पीने के पानी की सप्लाई के लिए बनी झीलों को भरना है. भले ही कल और पानी छोड़ा जाए, पीने का पानी हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी रहेगी.
उन्होंने किसानों से न घबराने की अपील की. कहा कि सरकार नुकसान कम करने के लिए वैज्ञानिक सलाह देगी. उन्होंने बताया कि बारिश में सुधार सिर्फ़ कोडगु और पड़ोसी वायनाड (केरल) के कुछ हिस्सों में ही हुआ है, जबकि मैसूरु, मांड्या और बेंगलुरु में अभी भी बारिश की कमी बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक कर्नाटक में सामान्य बारिश का सिर्फ़ 37 प्रतिशत ही हुआ है. अभी समय है. आइए इंतज़ार करें और देखें.

शिवकुमार ने की विजय की तारीफ
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के बेंगलुरु दौरे के प्रस्ताव पर शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने उनसे दौरा टालने का अनुरोध किया था क्योंकि कर्नाटक में लोगों की भावनाएं भड़की हुई हैं. शिवकुमार ने कहा कि मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं. भले ही वे राजनीति में नए हों, लेकिन वे एक साहसी नेता हैं. मैंने उनके साहसी फ़ैसले के लिए उन्हें बधाई दी. हमारे राजनीतिक मतभेद चाहे जो भी हों, वे कर्नाटक आना चाहते थे. मैंने बस यही अनुरोध किया कि हम बेहतर और ज़्यादा सौहार्दपूर्ण माहौल में मिलें क्योंकि मैं नहीं चाहता कि कोई मेरे दोस्तों के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करे. हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए. हमें साथ रहना है और साथ काम करना है. आख़िरकार, भारत एक है.
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