US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है. 45 दिनों के युद्धविराम समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था. लेकिन समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद हालात फिर बिगड़ने लगे. इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने और क्षेत्र में तनाव बढ़ने की खबरों ने दुनिया की चिंता बढ़ा दिया. पाकिस्तान समेत कई देशों की मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्ष किसी स्थायी शांति समझौते पर नहीं पहुंच सके. इसी बीच खबर है कि अमेरिका और ईरान एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार शाम सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि मध्य-पूर्व के सहयोगी देशों की मध्यस्थता के बाद ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए एक संभावित समझौते की शर्तों पर सहमत हो गया है. ट्रंप ने कहा कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो वह पिछले पांच महीनों से जारी संघर्ष के बीच नए सैन्य हमलों के आदेश रोक देंगे.
ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तत्काल प्रभाव से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरे को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाना शामिल है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने में सफल रहते हैं, तो अमेरिका क्षेत्र में शांति, वैश्विक स्थिरता और समृद्ध ईरान के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोक सकता है. हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सब इस शर्त पर निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच जल्द ही औपचारिक समझौता हो जाए.
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बिन सलमान ने की थी फोन पर बातचीत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों में इजरायल और ईरान के बीच संभावित समाधान की दिशा में अमेरिका अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. उन्होंने दावा किया कि क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लगातार बातचीत जारी है ताकि तनाव कम किया जा सके. इससे पहले शनिवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से फोन पर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने ईरान के साथ संघर्ष और उसके और अधिक बढ़ने की आशंका पर चिंता जताई. यह बातचीत ऐसे समय हुई, जब ट्रंप कथित तौर पर ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहे थे. रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब को आशंका है कि यदि अमेरिका ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाता है, तो जवाबी कार्रवाई में तेहरान सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमला कर सकता है. इसी वजह से क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से ईरान के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई की प्रकृति और रणनीति को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि शनिवार को दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. हालांकि, अधिकारी ने बातचीत के विषय या उसके ब्योरे का खुलासा नहीं किया. बताया जा रहा है कि इसी सप्ताह सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया से जुड़े कथित लॉजिस्टिक और हथियार ठिकानों पर कार्रवाई में अमेरिका का सहयोग किया था. इसके अलावा ईरान से जुड़ी रणनीति पर चर्चा के लिए सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान को बुधवार को वॉशिंगटन भेजा गया, जहां उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अलग-अलग मुलाकात की.

नेतन्याहू ने की थी ट्रंप से मुलाकात
इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की. यह मुलाकात युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी आमने-सामने की पहली मुलाकात थी. इजरायली नेता ने ट्रंप से ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने का आग्रह किया. ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए अमेरिका की लगातार सैन्य कार्रवाई का असर नवंबर में होने वाले अहम मध्यावधि चुनावों में दिख सकता है. अब देखना है कि डोनाल्ड ट्रंप नवंबर से पहले ऐसा क्या करते हैं कि वह अमेरिकी जनता के बीच में एक लोकप्रिय नेता के रूप में प्रदर्शित कर सकते हैं. जानकार बता रहे हैं कि जब से वह ईरान युद्ध में कूदे हैं तब से उनकी लोकप्रियता में लगातार गिरावट आ रही है. साथ ही अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी हिलाकर रख दिया है. इस हफ्ते की शुरुआत में जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर ईरान के अचानक हमले को अमेरिकी सेना द्वारा नाकाम किए जाने के बाद राष्ट्रपति ने जवाबी कार्रवाई करने का संकल्प लिया है.
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क्या ईरान ने तोड़ा था समझौता?
ट्रंप ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता के दौरान कहा था कि वे ईरान के मामले में बस जीतना चाहते हैं और कहा कि अमेरिका ईरान पर ‘बहुत जोरदार’ हमला करेगा. दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने निराशा जाहिर की कि तेहरान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ युद्धविराम पर एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन फिर जल्द ही ‘इसे तोड़ दिया. उन्होंने आगे कहा कि ईरान ने कमर्शियल जहाजों पर गोलीबारी की और अमेरिकी सैनिकों की भी जान ले ली. अमेरिकी विदेश विभाग ने शनिवार को ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्र के 10 देशों में अमेरिकियों के लिए ज्यादा सावधानी बरतने के लिए नए सुरक्षा अलर्ट जारी किए. इन चेतावनियों में बहरीन, इजरायल, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. इनमें अमेरिकी नागरिकों से उड़ानें रद्द होने, अस्थायी रूप से हवाई क्षेत्र बंद होने और यात्रा में अन्य रुकावटों की संभावना के लिए तैयार रहने का आग्रह किया गया है.

क्या ईरानी नेतृत्व के बीच भी हैं मतभेद?
ईरान में नेतृत्व के भीतर इस बात को लेकर गहरे मतभेद हैं कि युद्ध का अंतिम परिणाम क्या होना चाहिए. एक तरफ कट्टरपंथी गुट अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत का विरोध करता है और युद्ध में पूरी जीत चाहता है. ‘पायदारी’ आंदोलन (फारसी में ‘स्थिरता’ का अर्थ) के नाम से जाने जाने वाले ये लोग पक्के विचारधारा वाले हैं जो समाज पर इस्लामिक गणराज्य का नियंत्रण लागू करना चाहते हैं. दूसरी तरफ वे लोग हैं जो राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ का बातचीत का समर्थन करते हैं. वे सैन्य दबाव को अमेरिका के साथ बातचीत के जरिए समझौता करने का एक तरीका मानते हैं. यह गुट युद्ध के कारण ईरान में हो रहे आर्थिक नुकसान और देश में सामाजिक बदलाव के अनुरूप ढलने की जरूरत को लेकर भी चिंतित हैं. गालिबाफ के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने गुरुवार को अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा कि बातचीत एक राजनीतिक उपकरण है और सैन्य कार्रवाई की पूरक है, जिसका उद्देश्य दुश्मन को मजबूर करना और वास्तविक रियायतें हासिल करना है.
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धार्मिक शासन वाले देश के नेतृत्व के भीतर यह खुली प्रतिद्वंद्विता ईरान के युद्ध-बाद के भविष्य पर नियंत्रण के लिए संघर्ष की ओर इशारा करती है. एक बड़ा सवाल यह है कि नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई का रुख क्या है. खबरों के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के कुछ ही मिनटों में उनके पिता की जान लेने वाले हमले में वे घायल हो गए थे. खामेनेई अभी भी छिपे हुए हैं और दोनों पक्षों ने उनके समर्थन का दावा किया है.
सीजफायर को जबरदस्त समर्थन
गालिबाफ और पेजेशकियान के लिए एक अच्छी बात यह रही कि अप्रैल में अमेरिका के साथ हुई सीजफायर डील को ईरान की सबसे बड़ी लीडरशिप बॉडी ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ का जबरदस्त समर्थन मिला. इसके 13 में से 12 सदस्यों ने इसे मंजूरी दी, जिनमें रिवोल्यूशनरी गार्ड और सेना के सीनियर अधिकारी भी शामिल थे. माना जाता है कि डील के खिलाफ एकमात्र वोट सईद जलीली का था, जो ‘पायदारी मूवमेंट’ के सबसे प्रमुख नेता हैं. लेकिन दोनों पक्षों के बीच हमले होने और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले रास्ते पर नियंत्रण की कोशिशों के कारण सीजफायर टूट गया. युद्ध से पहले दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था. ईरान इस बात से भी नाराज था कि डील के तहत किए गए वित्तीय वादे, जिनमें अरबों की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करना भी शामिल था. वहीं, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वाज ने कहा कि डील से कोई फायदा न होने के बावजूद, इस बात पर लीडरशिप में ‘कोई गंभीर मतभेद नहीं’ है कि आगे क्या किया जाएय़ वाज ने कहा कि उनका मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ‘सिर्फ ताकत की भाषा समझते हैं और इसलिए उनसे काम करवाने के लिए उन्हें मजबूत स्थिति में आना होगा.

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समझौते में गाजा भी बना मुद्दा
मध्य पूर्व में अन्य जगहों पर हुई घटनाओं में स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, रविवार को गाजा में इजरायली हमलों में कम से कम आठ फ़िलिस्तीनी मारे गए, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं. फिलिस्तीनियों ने बताया है कि पिछले कुछ दिनों में इस इलाके में इजरायली हमलों का दायरा बढ़ा है. दक्षिणी गाजा में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में एक परिवार के तीन सदस्य मारे गए, जिनमें उनका 4 साल का बच्चा भी शामिल था. शिफा अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गाजा शहर में भी एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में एक परिवार के तीन लोग मारे गए और कई अन्य लोग घायल हो गए. अस्पताल ने बताया कि मां छह महीने की गर्भवती थी. मध्य गाजा के मुख्य अस्पताल के अनुसार, मध्य गाजा में एक इज़राइली हमले में एक व्यक्ति और उसकी पत्नी की मौत हो गई और इलाके में चार अन्य लोग घायल हो गए.

युद्धविराम होने के बाद भी 1,222 की हुई मौत
इजरायली सेना का कहना है कि रात भर चले हमलों में हमास के सैन्य ऑपरेटिव्स को निशाना बनाया गया. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर में संघर्ष-विराम के बाद से कम से कम 1,222 फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें कम से कम 260 बच्चे शामिल हैं. इस दौरान पांच इजरायली सैनिक भी मारे गए हैं. हमास और इजरायल दोनों ही एक-दूसरे पर संघर्ष-विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं.
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