Ahmedabad Municipal Corporation: अहमदाबाद में मानसून की दस्तक से पहले ही अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) का एक आदेश चर्चा और विवाद का विषय बन गया है. नगर निगम ने सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि बारिश के दौरान किसी अंडरपास में पानी भरा हो, बैरिकेड लगाए गए हों या रास्ता बंद किया गया हो और इसके बावजूद कोई व्यक्ति वहां से गुजरता है, तो किसी भी दुर्घटना, नुकसान या जनहानि के लिए AMC जिम्मेदार नहीं होगी. इस आदेश के सामने आने के बाद शहर में बहस छिड़ गई है कि आखिर नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है. अहमदाबाद में हर साल मानसून के दौरान कई अंडरपास जलभराव की समस्या से जूझते हैं.
AMC की नई चेतावनी पर छिड़ी बहस
भारी बारिश के बाद अंडरपासों में पानी भर जाने से वाहन फंस जाते हैं, ट्रैफिक जाम लग जाता है और कई बार लोगों की जान तक खतरे में पड़ जाती है. बीते वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब वाहन चालक चेतावनी के बावजूद पानी से भरे अंडरपास में उतर गए और बीच रास्ते में फंस गए. कुछ मामलों में राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन को अतिरिक्त संसाधन भी लगाने पड़े. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए AMC ने मानसून एक्शन प्लान के तहत शहर के 25 अंडरपासों को लेकर विशेष व्यवस्था की है. निगम की ओर से जारी सार्वजनिक चेतावनी में कहा गया है कि जलभराव की स्थिति में अंडरपासों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे, बैरिकेडिंग की जाएगी और जरूरत पड़ने पर रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति बैरिकेड हटाकर या चेतावनी को नजरअंदाज कर अंडरपास में प्रवेश करता है, तो उससे होने वाले नुकसान के लिए निगम जिम्मेदार नहीं होगा.
विपक्ष का हमला
इस आदेश को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. विपक्ष के उपनेता नीरव बख्शी ने आरोप लगाया है कि नगर निगम अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है. उनका कहना है कि शहरवासियों से टैक्स वसूलने वाला प्रशासन यदि हर साल अंडरपासों में होने वाले जलभराव को रोकने में विफल रहता है, तो उसकी जिम्मेदारी नागरिकों पर नहीं डाली जा सकती. विपक्ष का तर्क है कि अंडरपासों की नियमित सफाई, ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करना और बारिश के पानी की निकासी सुनिश्चित करना प्रशासन का दायित्व है. दूसरी ओर AMC का कहना है कि यह आदेश जिम्मेदारी से हाथ खड़े करने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को सतर्क करने के लिए जारी किया गया है.
AMC की सफाई
म्यूनिसिपल कमिश्नर बंचानिधि पानी ने स्पष्ट किया है कि हर साल मानसून से पहले इस प्रकार की चेतावनी जारी की जाती है. उनका कहना है कि कई बार लोग बैरिकेडिंग और चेतावनी के बावजूद जोखिम उठाते हैं और अंडरपास में प्रवेश कर जाते हैं. ऐसे में हादसों की आशंका बढ़ जाती है. इसी वजह से लोगों को पहले से सावधान किया जा रहा है. AMC के अनुसार इस बार कई संवेदनशील अंडरपासों पर ऑटोमैटिक बूम बैरियर भी लगाए गए हैं. जैसे ही पानी का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंचेगा, ये बैरियर स्वतः बंद हो जाएंगे और वाहनों की आवाजाही रोक दी जाएगी. इसके अलावा जलस्तर की लगातार निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जाएगा.
स्थायी समाधान कब?
आम नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. कुछ लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन चेतावनी देता है और लोग उसे नजरअंदाज करते हैं, तो जिम्मेदारी उनकी भी बनती है. वहीं कई नागरिकों का कहना है कि हर साल एक जैसी समस्या सामने आने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है. फिलहाल यह मुद्दा केवल एक चेतावनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नागरिक सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और शहरी बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी सवाल खड़े कर रहा है. अब देखना होगा कि मानसून के दौरान यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या शहर के अंडरपास इस बार जलभराव की समस्या से बच पाते हैं या नहीं.
