Jauhar University Demolition: समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद और जेल में बंद सपा नेता आजम खान को बड़ा झटका लगा है. रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने खान के द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 इमारतों में से 38 पर बुलडोजर एक्शन का आदेश दिया है. मतलब कि आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर योगी सरकार का बुलडोजर चलेगा और 40 में से 38 इमारतें जमींदोज होंगी.
बता दें कि आजम खान मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के चांसलर और आजीवन अध्यक्ष रहे थे, जो यूनिवर्सिटी का संचालन करता था. हालांकि, 2026 की शुरुआत में, खान और उनका परिवार औपचारिक रूप से यूनिवर्सिटी के गवर्निंग ट्रस्ट से अलग हो गए थे. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
बिना मंजूरी की बनाई गईं इमारतें- अधिकारी
अधिकारियों ने बताया कि रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (RDA) ने बुधवार को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया है. जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान द्वारा स्थापित इस यूनिवर्सिटी की ये इमारतें बिल्डिंग प्लान की “मंजूरी के बिना” बनाई गई थीं. अधिकारियों ने बताया कि विस्तृत सुनवाई और अभिलेखों की जांच के बाद उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत विध्वंस आदेश जारी किया गया है.
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
रामपुर के जिला मजिस्ट्रेट अजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत निर्माणों के संबंध में क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद कार्रवाई शुरू की गई है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है. संस्था ने 8 जुलाई को अपना जवाब प्रस्तुत किया, जबकि विश्वविद्यालय और आरडीए दोनों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों और वकीलों की उपस्थिति में 15 जुलाई को एक व्यक्तिगत सुनवाई आयोजित की गई.
सुनवाई के दौरान, विश्वविद्यालय ने तर्क दिया कि सिंगांखेड़ा गांव, जहां कैंपस स्थित है, 27 सितंबर, 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं था, और इसलिए, आरडीए से भवन योजना की मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी.
इसमें यह तर्क भी दिया गया कि ये इमारतें बहुत पहले बनाई गई थीं और वर्तमान नियमों के तहत इन्हें अवैध घोषित नहीं किया जा सकता. हालांकि, आरडीए ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण के समय सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य था, भले ही बाद में उस क्षेत्र को विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में लाया गया हो या नहीं.
आदेश में क्या गया कहा?
आदेश के अनुसार, रामपुर जिला पंचायत से प्राप्त रिकॉर्ड से पता चला कि केवल मेडिकल कॉलेज भवन और शैक्षणिक ब्लॉक के लिए ही भवन निर्माण योजनाएं स्वीकृत थीं, जबकि शेष 38 भवनों के लिए कोई वैध स्वीकृति उपलब्ध नहीं थी. आदेश में आगे कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को मंजूरी की आवश्यकता के बारे में जानकारी थी, क्योंकि उसने दो भवनों के लिए जिला पंचायत से अनुमति प्राप्त कर ली थी, लेकिन बिना मंजूरी के अन्य संरचनाओं का निर्माण कार्य जारी रखा.
आरडीए ने माना कि इस प्रकार के निर्माण वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं और उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए उत्तरदायी हैं. इसने मास्टर प्लान, जोनल प्लान और अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर आधारित विश्वविद्यालय के कानूनी तर्कों को भी खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि किसी भी निर्माण की वैधता निर्माण के समय लागू कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त मंजूरी पर निर्भर करती है.
2006 में बनी थी यूनिवर्सिटी
मालूम हो कि यूपी के रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में की गई थी. यह उत्तर प्रदेश विधानमंडल के एक अधिनियम द्वारा बनाई गई थी. यूनिवर्सिटी रामपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित है.
यह संस्थान आजम खान की एक प्रमुख परियोजना थी, लेकिन तब से इसे भूमि अतिक्रमण और कथित पट्टा उल्लंघन को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयों का सामना करना पड़ा है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति के बड़े हिस्से को वापस ले लिया है.
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News Source: PTI
