Operation Joker: हमारे देश में गैंबलिंग, सट्टेबाजी और ऑनलाइन मनी गेम्स रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं. इस मामले में पकड़े जाने पर जेल के साथ जुर्माने का भी प्रावधान है. लेकिन, नोएडा और गाजियाबाद में इन नियमों की धज्जियां उड़ायी जा रही है. यहां पोकर की आड़ में खुलेआम जुए का खेल चल रहा है. इसका खुलासा हमने स्टिंग ऑपरेशन- Operation Joker में किया है.
नोएडा, गाजियाबाद समेत यूपी के कई शहरों में पोकर क्लब की आड़ में जुए के अड्डे चल रहे हैं, जबकि देश में जुआ खेलना, खिलाना और ऑनलाइन मनी गेम्स पूरी तरह से बैन और गैरकानूनी हैं. केंद्र सरकार ने इसके खिलाफ कड़ा कानून बनाया है. ऑनलाइन सट्टेबाजी और ड्रीम-11, लूडो जैसे मनी गेम्स भी बैन कर दिए गए हैं.
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2024 में पोकर और रमी को स्किल गेम माना और पोकर क्लबों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. उसके बाद नोएडा-गाजियाबाद में जगह-जगह पोकर क्लब खुल गए. लेकिन , इनके आड़ में यहां गैंबलिंग हो रहा है. पुलिस और प्रशासन की आंखों में एक तरह से धूल झोंका जा रहा है. हमने अपने स्टिंग ऑपरेशन में क्लबों में चल रहे जुए के अड्डों को एक्सपोज किया है. हमने एक दो नहीं बल्कि 5-6 पोकर क्लबों का स्टिंग किया है, जहां खुलेआम चिप्स या टोकन से जुआं खेला जा रहा है. यहां 10 से 15 हजार के टोकन खरीदकर जुआ होता है. वहीं, हाई कोर्ट ने अपने आदेश में ये बिल्कुल नहीं कहा है कि पोकर-रमी में पैसा लगाकर खेला जा सकता है. हमने अपने स्टिंग में दिखाया है कि कैसे पोकर क्लब को जुए का अड्डा बना दिया गया हैं. आइए अब इस स्टिंग ऑपरेशन (Operation Joker) के खुलासे को जानते हैं.
स्किल गेम्स की आड़ में जुए का गोरखधंधा
लाइव टाइम्स ने जो स्टिंग ऑपरेशन किया है और क्लब संचालकों का जो खेल अपने खुफिया कैमरे में कैद किया है, वो बेहद चौंकाने और दंग कर देने वाला है. नोएडा और गाजियाबाद जैसे पॉश शहरों में पोकर की आड़ में खुलेआम जुए के अड्डे चलाए जा रहे हैं. हमें पता चला कि स्किल गेम्स की आड़ में जुए का गोरखधंधा नोएडा के कई पोकर क्लब में धड़ल्ले से चल रहा है. कानून को ताक पर रखकर यहां मनी गेम्स होते हैं यानी कि जुआ खेला और खिलाया जा रहा है.
इसकी पड़ताल के लिए लाइव टाइम्स के अंडर कवर रिपोर्टर ने नोएडा के सेक्टर 16A फिल्म सिटी का रुख किया. यहां पोकर क्लब में जुए का खुला खेल चल रहा था. हमारे अंडर कवर रिपोर्टर ने अपने खुफिया कैमरे में क्लब के अंदर का जो सच कैद किया है, उससे साफ है कि क्लब मालिक और मैनेजर कितना बेखौफ होकर जुए के अड्डे चला रहे हैं. उन्हें पुलिस प्रशासन का कोई डर नहीं है.
मतलब ये है कि नोएडा की पॉश सोसाइटीज और इंडस्ट्रियल एरिया के बीच एक संगीन क्राइम फल-फूल रहा है, जो हजारों युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहा है. उन्हें जुआ के दलदल में धकेल रहा है. हमारे स्टिंग में दिखा कि सेक्टर 16बी में चल रहे पोकर क्लब में क्या कुछ हो रहा है. आप इससे समझ सकते हैं कि क्या ये स्किल गेम है या फिर गैंबलिंग. हमने इस लेख में कुल तीन वीडियो लगाए हैं, जिन्हें आप देख कर यह जान सकते हैं कि पोकर की आड़ में नोएडा और गाजियाबाद में क्या चल रहा है.

पोकर क्लबों के पास कानून का तोड़?
कानून के मुताबिक, अगर कोई जगह गैंबलिंग के लिए इस्तेमाल होती है तो उसे गैंबलिंग हाउस माना जाता है. वहीं, ऐसे केस में मालिक, मैनेजर और खिलाड़ी सभी पर केस चलता है. सभी को सजा हो सकती है. क्लब में बड़ी तादाद में कैश ट्रांजैक्शन होते हैं, मतलब मामला कैश के अवैध लेन-देन का भी बनता है जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी केस चल सकता है.
अगर कोई क्लब अपनी कमाई छिपा रहा है और कैश ट्रांजैक्शन नहीं दिखा रहा है तो इनकम टैक्स और जीएसटी की कार्रवाई भी बनती है, लेकिन नोएडा के तमाम पोकर क्लबों ने कानून का तोड़ निकाल लिया है. ये कैश की जगह चिप्स या टोकन का इस्तेमाल करते हैं और अपनी कमाई को हॉस्पिटैलिटी में दिखाते हैं. ऐसे में अगर पुलिस रेड भी करेगी तो उसे पोकर टेबल से कैश बरामद नहीं होगा और पैसों के ट्रांजैक्शन का भी पता नहीं चलेगा. हमें मालूम हुआ कि इन क्लबों में 10 से 15 हजार के टोकन खरीदकर जुआ होता है, जबकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ये बिल्कुल नहीं कहा है कि पोकर-रमी में पैसा लगाकर खेला जा सकता है.

नोएडा की इन जगहों पर गैंबलिंग
लाइव टाइम्स का मकसद नोएडा में चल रहे तमाम अवैध गैंबलिंग कारोबार को बेपर्दा करना है, लेकिन गेमिंग की आड़ में गैंबलिंग का ये कारोबार बहुत तेजी से फल-फूल रहा है. इंडस्ट्रियल सिटी के हजारों युवा इसके चंगुल में फंसते जा रहे हैं, जबकि सरकार ने गैंबलिंग, सट्टेबाजी और ऑनलाइन मनी गेम्स रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं. वहीं, शातिरों ने स्किल गेम्स की आड़ में कसीनो टाइप गैंबलिंग के अड्डे खोल लिए हैं. नोएडा सेक्टर 16ए और 25ए के बाद हमारी टीम पहुंची सेक्टर-137 भी पहुंची थी, जहां हमें पारस मॉल में चल रहे एक बड़े पोकर क्लब के बारे में जानकारी मिली थी. हमने यहां भी पोकर क्लब की आड़ में चल रहे नेटवर्क का पर्दाफाश किया.
पोकर क्लब्स खुलेआम सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हैं, गैंबलिंग के लिए लोगों को व्हाट्सएप पर इनविटेशन भेजते हैं, लेकिन उन्हें पकड़े जाने का जरा सा भी डर नहीं है. मतलब कुछ तो बात है जो ये सब कुछ खुलेआम हो रहा है.

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अंडर कवर रिपोर्टर ने खुद लगाया पैसा
पोकर क्लब में चल रहे जुए के अड्डों की और पड़ताल के लिए हमारा अंडर कवर रिपोर्टर एक बार फिर पहुंचा पारस मॉल में चल रहे द वॉल्ट पोकर रूम में. वहां वह खुद पैसे लगाकर जुआ खेला ताकि आपको समझ में आए कि असल में क्लब किस तरह से सिंडिकेट चला रहे हैं और कैसे कानून को ताक पर रखकर युवाओं को जुए के जाल में फंसाया जा रहा है.
ऑपरेशन जोकर के जरिए हमारी कोशिश अपने दर्शकों और पाठकों को नोएडा का वो स्याह सच दिखाने की है जो चकाचौंध भरी लाइफ और हाई प्रोफाइल सोसाइटीज के पीछे छिपा है. हमारे अंडर कवर रिपोर्टर ने अपनी जान जोखिम में डालकर ये पूरा स्टिंग ऑपरेशन कैमरे में कैद किया है जो कि बेहद मुश्किल काम है. लेकिन, सच सामने लाने के लिए हमने ये जोखिम लिया है ताकि ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो सके और नोएडा में चल रहे हाई प्रोफाइल जुए के अड्डे तुरंत बंद हों.
पोकर क्लबों में जारी गैरकानूनी कारनामों का सच और बारीकी से कैद करने के लिए हमारा अंडर कवर रिपोर्टर एक बार फिर गोल्डन ऐसेस क्लब पहुंचता है जो गाजियाबाद के वसुंधरा में है. इस बार हमारा रिपोर्टर बाकायदा 10 हजार रुपये के टोकन लेकर पोकर खेलता है ताकि पूरा सच आपके सामने आ सके. यहां भी मैनेजर ने बताया कि हर पॉट से 5 फीसदी रैक कटती है. हमारे इस स्टिंग ऑपरेशन में दिखा कि कैसे गोल्डन ऐसेस क्लब में पैसा लगता है.
हमारे स्टिंग ऑपरेशन से आपने जाना कि कैसे यूपी की आर्थिक राजधानी नोएडा को गैंबलिंग का अड्डा बनाया जा रहा है. कैसे व्हाइट कॉलर लोग पॉश इलाकों में पोकर क्लब्स खोलकर जुए के अड्डे चला रहे हैं. हमने आपको ये भी बताया कि ये पूरी तरह से गैरकानूनी है. स्किल गेम्स को लेकर हाई कोर्ट के आदेश में ये बिल्कुल नहीं कहा गया कि पोकर क्लब की आड़ में कैश गेम्स खेल सकते हैं. लेकिन, प्रशासन की नाक के नीचे ये सब कुछ हो रहा है. वो भी खुलेआम धड़ल्ले से.
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क्लब खोलने के लिए जिला प्रशासन से परमीशन
अब सवाल यह है कि क्या ये संभव है कि पोकर क्लब्स के अंदर चल रही अवैध गतिविधियों की जानकारी प्रशासन को नहीं होगी? क्या ये संगीन अपराध नहीं है? कैसे यूपी की इंडस्ट्रियल सिटी और आर्थिक कैपिटल में ये खुला खेल चल रहा है? क्या ये सबकुछ मिलीभगत से हो रहा है? ऐसे में सवाल ये है कि क्या पुलिस प्रशासन को इन पोकर क्लब्स की जानकारी नहीं है या फिर मामला सेटिंग का है?
हमने जब पुलिस से बात की तो नोएडा के दो थानों के SHO साफ मना कर रहे हैं कि हमारे यहां से कोई परमीशन नहीं ली गई है. पुलिस पोकर क्लब के लिए लाइसेंस नहीं देती है. ये काम डीएम ऑफिस से होता है. अब सवाल ये है कि आखिर फिर से सबकुछ कैसे हो रहा है?
क्लब खोलने से सबसे पहले जिला प्रशासन से परमीशन लेनी होती है. इसके लिए डीएम ऑफिस में एक एप्लिकेशन देना होता है. डीएम ऑफिस, एप्लिकेशन को NOC के लिए पुलिस और जीएसटी ऑफिस के पास भेजता है. दोनों जगहों से NOC मिलने के बाद लाइसेंस जारी हो जाता है. लाइसेंस मिलने के बाद पोकर क्लब के लिए कंपनी का रजिस्ट्रेशन करना होता है जो आसान प्रक्रिया है. इसके बाद जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना होता है. वो भी आसानी से हो जाता है. इसके बाद नोएडा अथॉरिटी से ट्रेड लाइसेंस लेना होता है जो कि आसानी से मिल जाता है. इसके बाद पोकर क्लब खोल सकते हैं.
पुलिस की NOC जरूरी होती है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि नोएडा में बिना पुलिस की परमीशन के लिए ये क्लब चल रहे हैं! या ये भी हो सकता है कि पुलिस को पैसा जाता हो? जैसा कि हमारे स्टिंग ऑपेरशन में एक क्लब के मैनेजर ने दावा भी किया है.

सारा सच हमारे कैमरे में कैद
हमने इस लेख के आखिरी में भी ऑपरेशन जोकर का वीडियो लगाया है. आप इसमें देख सकते हैं कि कैसे पोकर क्लब्स में स्किल गेमिंग की आड़ में गैंबलिंग हो रहा है. कैसे जुआ रोकने के लिए बने कानूनों को शातिरों ने जोकर बना दिया गया है. स्किल गेम्स की आड़ में पोकर क्लबों में जो कुछ हो रहा है वो असल में गैंबलिंग है. ये हमारे स्टिंग ऑपरेशन में साफ-साफ साबित हो रहा है.
कैश का लेन-देन, कैश देकर चिप्स खरीदना, फिर चिप्स से पोकर और रमी खेलना, बाद में कैश चेक आउट करना और हर पॉट यानी बाजी से क्लब का कमीशन लेना. ये सारा सच हमारे कैमरे में कैद है. इसके साथ क्लब चलाने वाले मैनेजर और कर्मचारियों के तमाम बयान, जो कैमरे में भी कबूल कर रहे हैं कि ये गैंबलिंग है, लेकिन कुछ नहीं सब मैनेज हो जाएगा.
स्किल गेम्स और गैंबलिंग में अंतर
स्किल गेम्स क्लब
- खिलाड़ियों से एंट्री फीस वसूलते हैं.
- सालाना या मंथली क्लब चार्ज होता है.
- एंट्री फीस से ही खिलाड़ियों को इनाम देते हैं.
- टोकन या चिप्स के बदले पैसा नहीं लेते हैं.
बेटिंग या गैंबलिंग क्लब
- खिलाड़ियों को ओपन एंट्री देते हैं.
- 10 या 20 हजार के चिप्स बेचकर गेम खिलाते हैं.
- बिना रिकॉर्ड कैश ट्रांजैक्शन करते हैं.
- हर बाजी यानी रेक में कमीशन लेते हैं.
यूपी में 3 तरह के चल रहे क्लब
1- क्लीन क्लब
- मेंबरशिप फीस लेते हैं.
- घंटे के हिसाब से चार्ज.
- कोई कैश गेम नहीं होता.
2- ग्रे क्लब
- मेंबरशिप चार्ज लेते हैं.
- कभी-कभी कैश एक्टिविटी.
3- कैसीनो मॉडल क्लब
- क्लब रैक यानी कमीशन लेता है.
- हर बाजी से अपना हिस्सा लेता है.
- कैश ट्रांजैक्शन छिपाकर करते हैं.
- पोकर-रमी की आड़ में जुआ होता है.
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