Bakrid in Ranchi: आज 28 मई को पूरे देश में बकरीद का पर्व मनाया जा रहा है. इस बीच झारखंड और इसकी राजधानी रांची में भी बकरीद का जश्न दिखा है. जी हां, ईद-अल-अजहा यानी बकरीद के पावन अवसर पर जहां पूरे झारखंड में अमन, भाईचारे और कुर्बानी का संदेश गूंज रहा था. वहीं, सियासत ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में देर नहीं लगाई. बकरीद की नमाज अदा करने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने पहले पारंपरिक अंदाज में लोगों को मुबारकबाद दी. लेकिन यह माहौल ज्यादा देर तक सिर्फ त्योहार तक सीमित नहीं रह सका.
वोटर सूची से नाम हटाने की साजिश- मंत्री इरफान
मिली जानकारी के अनुसार, मुबारकबाद देने के तुरंत बाद मंत्री इरफान अंसारी ने SIR प्रक्रिया को लेकर नया सियासी मुद्दा खड़ा कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए आदिवासी, गरीब और अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम वोटर सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सतर्क रहें और अपने नाम का सत्यापन जरूर कराएं, ताकि उनका मताधिकार सुरक्षित रह सके.
मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इरफान अंसारी के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे भ्रामक और बेबुनियाद बताया. भाजपा का कहना है कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें किसी भी ‘जेनुइन’ मतदाता का नाम हटाने का कोई सवाल ही नहीं उठता.
भाजपा ने किया पलटवार
भाजपा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम फर्जी तरीके से या गलत दस्तावेजों के आधार पर वोटर सूची में जोड़े गए हैं, केवल उन्हीं की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है. पार्टी ने यह भी कहा कि इरफान अंसारी की चिंता इस बात को लेकर है कि अब तक वे कथित तौर पर ऐसे ही फर्जी वोटरों के सहारे राजनीतिक लाभ उठाते रहे हैं और अब सच्चाई सामने आने का डर उन्हें सता रहा है.
बकरीद जैसे पवित्र त्योहार के दिन जहां एक ओर कुर्बानी, इंसानियत और सामाजिक सौहार्द की बात होनी चाहिए थी, वहीं सियासी बयानबाजी ने माहौल को अलग दिशा दे दी. नमाज के बाद शुरू हुई आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ने यह संकेत दे दिया कि झारखंड में अब मुद्दों से ज्यादा मौकों पर सियासत हो रही है.
SIR जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को लेकर जिस तरह के आरोप और जवाबी हमले सामने आ रहे हैं, उससे आम मतदाता के मन में संशय की स्थिति पैदा होना स्वाभाविक है. असली सवाल यही है कि क्या मतदाता वास्तव में सुरक्षित हैं या फिर राजनीतिक बयानबाजी के बीच उनका भरोसा ही सबसे बड़ी कुर्बानी बनता जा रहा है. फिलहाल, इस पूरे मामले में सच्चाई क्या है, यह तो प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि बकरीद के दिन शुरू हुई यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है.
रिपोर्ट: विशाल भारद्वाज
‘मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं CM बनूंगा…’ इस्तीफा सौंपने के बाद बोले सिद्धारमैया
