Jagannath Rath Yatra : गुजरात की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली श्री जगन्नाथजी मंदिर की 149वीं ऐतिहासिक रथयात्रा 16 जुलाई, 2026 को पारंपरिक मार्ग से निकलेगी. रथयात्रा को लेकर मंदिर ट्रस्ट, प्रशासन और पुलिस ने सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं. शहर के पुलिस आयुक्त ने ट्रस्ट की ओर से दी गई आवेदन को मंजूरी देते हुए रथयात्रा की अनुमति प्रदान कर दी है. इस वर्ष भी रथयात्रा भक्ति, एकता, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति का संदेश लेकर निकलेगी.
भव्य तरीके से निकलेगी यात्रा
रथयात्रा में इस बार 18 सजे-धजे गजराज, 101 भारतीय संस्कृति की झांकी प्रस्तुत करती ट्रक, 30 अखाड़े, 18 भजन मंडलियां और 3 बैंड आकर्षण का केंद्र होंगे. वहीं करीब 1000 से 1200 खलासी भाई भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ को खींचेंगे. देशभर के विभिन्न तीर्थस्थलों जैसे हरिद्वार, अयोध्या, नासिक, उज्जैन, जगन्नाथ पुरी और सौराष्ट्र सहित कई स्थानों से लगभग 2500 साधु-संत भी इस ऐतिहासिक रथयात्रा में शामिल होंगे. रथयात्रा का शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पारंपरिक ‘पहिंद विधि’ के साथ किया जाएगा.
कई दिनों से प्रसाद बनाने में जुटी महिलाएं
इससे पहले सुबह मंगला आरती, भगवान को विशेष खिचड़ी का भोग, आदिवासी नृत्य और रास-गरबा जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसके बाद सुबह करीब सात बजे भगवान जगन्नाथ नगर भ्रमण के लिए अपने भक्तों के बीच निकलेंगे. रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और प्रसाद वितरण का भी महापर्व है. मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिलाएं कई दिनों से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद तैयार करने में जुटी हुई हैं. इस वर्ष हजारों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मात्रा में मूंग का प्रसाद तैयार किया जा रहा है. इसके अलावा जामुन, आम, ककड़ी और दाड़म यानी अनार का प्रसाद भी वितरित किया जाएगा. साथ ही लाखों श्रद्धालुओं को उपरणे भी भेंट किए जाएंगे.
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भव्य रथ पूरी तरह सजकर तैयार
भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के तीनों भव्य रथ पूरी तरह सजकर तैयार हो चुके हैं. पारंपरिक शैली में तैयार किए गए इन रथों को रंग-बिरंगे वस्त्रों, धार्मिक प्रतीकों और आकर्षक सजावट से अलंकृत किया गया है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इन रथों के दर्शन करने पहुंचते हैं और इस बार भी बड़ी संख्या में भक्तों के आने की संभावना है. इस बार रथयात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का विशेष उपयोग किया जा रहा है. यात्रा में शामिल होने वाले हाथियों पर GPS डिवाइस और विशेष कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों की लाइव फीड सीधे पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी. पुलिस कंट्रोल रूम से हाथियों की लोकेशन, उनकी गति और पूरे रूट पर उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी. इससे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करना संभव होगा.
पुलिस व्यवस्था की गई चाक-चौबंद
इसके अलावा पूरे रथयात्रा मार्ग पर व्यापक पुलिस बंदोबस्त और निगरानी की व्यवस्था की गई है. रथयात्रा से पहले भी मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी रहेगा. 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की रत्नवेदी प्रतिष्ठा, नेत्रोत्सव और ध्वजारोहण का आयोजन होगा. वहीं, 15 जुलाई को भगवान के स्वर्ण वेश के दर्शन, तीनों रथों की पूजा और गजराजों का पूजन किया जाएगा. शाम को विशेष पूजा और महाआरती का भी आयोजन रखा गया है. करीब डेढ़ शताब्दी पुरानी यह रथयात्रा केवल धार्मिक आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि गुजरात की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक मानी जाती है. अब पूरे अहमदाबाद की निगाहें 16 जुलाई की सुबह पर टिकी हैं, जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे और पूरा शहर एक बार फिर भक्ति के रंग में रंग जाएगा.
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