Delhi Electricity Rate Hike: दिल्ली सरकार अगले महीने से बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को तीन बिजली डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को ₹38,000 करोड़ बकाया देने के निर्देश दिए हैं.
23 March, 2026
दिल्लीवासी पहले से ही LPG गैस की परेशानी का सामना कर रहे हैं. अब उन्हें बिजली का भी झटका लगने वाला है. दिल्ली सरकार अब बिजली की दरें बढ़ाने की योजना बना रही है. अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली सरकार तीन बिजली डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMs) को ₹38,000 करोड़ से ज्यादा का बकाया देने की तैयारी कर रही है, जिसकी भरपाई बिजली की दरे बढ़ाकर की जाएगी. इसलिए, अप्रैल से आपका बिजली की बिल ज्यादा आ सकता है. हालांकि, सरकार आम जनता पर पड़ने वाले असर को कम करने की भी कोशिश कर रही है. इसके लिए, कंज्यूमर्स पर बोझ कम करने के लिए बढ़ी हुई बिजली दरों पर सब्सिडी देने की योजना पर काम चल रहा है.
दिल्ली सरकार को चुकाने हैं ₹38,552 करोड़
असल में, पिछले साल अगस्त में, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि दिल्ली की तीन प्राइवेट DISCOMs- BRPL, BYPL और TPDDL सात साल के अंदर “रेगुलेटरी एसेट्स” के तहत बकाया रकम चुकाया जाए. रेगुलेटरी एसेट्स का मतलब उन खर्चों से है जिन्हें कंपनियां अभी रिकवर नहीं कर सकती हैं, लेकिन भविष्य के बिजली बिलों से रिकवर करने की उम्मीद करती हैं. दिल्ली में पिछले 10 सालों से बिजली की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं, जिससे बकाया रकम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. कुल रकम अब लगभग ₹38,552 करोड़ तक पहुंच गई है.
कंज्यूमर्स से वसूला जाएगा पैसा
इसमें BRPL के लगभग ₹19,174 करोड़, BYPL के ₹12,333 करोड़ और TPDDL के ₹7,046 करोड़ शामिल हैं. रिकवरी में काफी देरी के कारण इस रकम पर ब्याज (कैरिंग कॉस्ट) भी जमा हो गया है. इससे कुल बकाया रकम और बढ़ गई है. दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरी रकम बिजली सप्लाई पर किए गए जायज खर्च का हिस्सा है, जिसे कंपनियां अभी तक कंज्यूमर्स से वसूल नहीं कर पाई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने DERC को यह भी निर्देश दिया है कि वह इस बात के लिए एक साफ प्लान बनाए कि यह पैसा कैसे और कितने समय में वसूला जाएगा. इस देरी के कारणों की जांच के लिए एक डिटेल्ड ऑडिट करने का भी आदेश दिया गया है.
सब्सिडी से मिल सकती है राहत
यह बकाया रकम अगले सात सालों में बिजली बिलों में “रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज” जोड़कर वसूल की जाएगी. इसका मतलब है कि यह पैसा कंज्यूमर्स के बिलों में अतिरिक्त चार्ज जोड़कर धीरे-धीरे वसूला जाएगा. दिल्ली के पावर मिनिस्टर आशीष सूद ने पिछले साल मार्च में कहा था कि डिस्कॉम को रेगुलेटरी एसेट्स के तौर पर जमा हुए 27,000 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार दिया गया है, कुल मिलाकर बिजली की कीमतें बढ़ सकती हैं, लेकिन सरकार सब्सिडी के जरिए जनता को राहत देने की कोशिश करेगी. हालांकि सब्सिडी किस तरह से दी जाएगी, इसकी कोई जानकारी अभी सामने आई है.
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News Source: PTI
