Home Latest News & Updates अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास रिहा, पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने की थी पेशी

अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास रिहा, पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने की थी पेशी

by Neha Singh 11 October 2026, 10:01 AM IST (Updated 11 October 2026, 10:09 AM IST)
11 October 2026, 10:01 AM IST (Updated 11 October 2026, 10:09 AM IST)
Abhijeet Dipke

Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं – अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रविवार को रिहा कर दिया गया है. पुलिस ने सुबह तीनों को गिरफ्तार किया था . पुलिस ने तीनों को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया. यह जानकारी CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने दी. उन्होंने एक्स पर लिखा कि अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा कर दिया गया है. उन्होंने ही पहले गिरफ्तारी की भी जानकारी दी थी.

फ्लाइट से हिरासत में लिया

अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार को दिल्ली में IGI एयरपोर्ट पर विमान के अंदर से ही हिरासत में लिया गया, जब वे विरोध प्रदर्शन के लिए मुंबई से दिल्ली आ रहे थे. अब उन तीनों को गिरफ्तारी के बाद रिहा कर दिया गया है. CJP ने अपनी लीगल हेड रत्ना सिंह का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि जब वह अपनी कार से घर से निकलने की कोशिश कर रही थीं, तभी उन्हें हिरासत में ले लिया गया. सिर्फ सीजेपी कार्यकर्ताओं को ही नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस ने 1000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था.

ध्रुव राठी रिहा

शनिवार को पुलिस ने यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी पुलिस ने गुरुग्राम से उनके आवास से हिरासत में ले लिया था. आज उन्हें भी रिहा कर दिया गया है. इतना ही नहीं, विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने आए कई बड़े नेताओं- जैसे आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के पूर्व सीएम पिनाराई विजयन, त्रिपुरा के माणिक सरकार और CPM नेता वृंदा करात को भी हिरासत में लिया गया. पुलिस ने पूरी दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया था. चप्पे पर नजर रखी जा रही थी. किसी को भी नई दिल्ली में घुसने की इजाजत नहीं थी.

रत्ना सिंह की याचिका खारिज

इससे पहले शनिवार को, दिल्ली की एक अदालत ने सिंह की ओर से दायर उस अर्जी को खारिज कर दिया था जिसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR या नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) दर्ज करने की मांग की गई थी. अदालत ने कहा कि अर्जी सुनवाई के लायक नहीं थी क्योंकि इसके साथ कोई उचित हलफनामा नहीं लगाया गया था और इसमें किसी खास सरकारी कर्मचारी का नाम नहीं था जिस पर आरोप लगाए गए हों. एक अर्जी में आरोप लगाया गया था कि रत्ना सिंह को गलत तरीके से हिरासत में रखा गया और 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोका गया. उन्होंने स्टेटस रिपोर्ट मंगाने का निर्देश देने की भी मांग की थी. उनकी तुरंत रिहाई की मांग करते हुए एक और अर्जी भी दायर की गई थी.

“आंतरिक मामलों में बेवजह दखल”, दिल्ली प्रदर्शन पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी का भारत ने दिया जवाब

News Source: ANI

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?