Delhi Water Crisis : दिल्ली के रंगपुरी इलाके और महिपालपुर इलाके में पानी की बनी हुई है. हालात ऐसे हैं कि लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. इधर टैंकर माफिया खूब एक्टिव है. वह मनमानी दामों पर लोगों को पानी बेच रहे हैं. यह सब कुछ सरकारी व्यवस्था की आंखों के सामने हो रहा है, लेकिन शासन और प्रशासन आंखें बंद किए पड़ा है. राजधानी दिल्ली में रंगपुरी और महिपालपुर ऐसे इलाके हैं जहां बरसों से पानी की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है.
विधायक के आग्रह पर पहुंचा टैंकर
लाइव टाइम्स की टीम जब इन इलाकों में पहुंची तो उन्हें सबसे पहले दिल्ली सरकार की पानी का टैंकर दिखा. इसके बाद वहां पर टीम रुक गई और टीम ने रिकॉर्ड किया कि टैंकर एक घर के अंदर वॉटर टैंक में पानी भर रहा था. फिर पूछने पर पता चला कि विधायक से स्पेशल रिक्वेस्ट पर यह पानी का टैंकर आया हुआ है.
इलाके में होती है बोरिंग के पानी की सप्लाई
रंगपुरी के लोगों का कहना है कि पानी का पाइपलाइन बिछा हुआ है. इलाके में बोरिंग के पानी की सप्लाई होती है. बोरिंग के आसपास कुछ घरों में पानी तू जाता है लेकिन बड़ी तादाद में लोग प्यासे रह जाते हैं. ऐसे में टैंकर माफिया खुलकर उगाही करते हैं. एक टैंकर माफिया को पकड़ा हमारी कैमरा ने देखी कैसे यह बता रहा है कि गाड़ियों का पानी लेकर यह कहां-कहां जाता है. महिपालपुर इलाके में भी यही हाल है. घरों के सामने आप देखिए कैसे लोगों ने गैलन बाल्टी डब्बे सब कुछ रखे हैं लेकिन पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है.
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महिपालपुर इलाके में 5 साल पहले सोनिया विहार बोर्ड से पाइपलाइन डाली गई थी लेकिन इस पाइपलाइन में पानी आज तक नहीं आया है. ऐसे में अब हर तीन दिन पर प्राइवेट टैंकरों से एक परिवार पानी का टैंकर मंगाता है. एक टैंकर की कीमत करीब 1500 रुपये होती है. ऐसे में एक परिवार को एक महीने 15000 रुपये तक खर्च करने पड़ जाते है.
कई बार खरीदना पड़ता है बोतलबंद पानी
पीने के लिए लोगों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है. इससे जेब पर अतिरिक्त भार पड़ता है. वहीं, टीडीएस के उच्च स्तर की वजह से घरों में लगे आरओ और फिल्टर हर दो-तीन महीने में खराब हो जाते हैं, जिसपर अलग खर्च होता है. पानी की परेशानी को लेकर अभी तक मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक सहित डीडीए और जल बोर्ड से कई शिकायतें हो चुकी हैं लेकिन समाधान नहीं हुआ. दिसंबर 2019 में महिपालपुर क्षेत्र में 60 लाख लीटर क्षमता वाले यूजीआर का उद्घाटन हुआ था, जो अभी तक चालू नहीं है.
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