Bhavnagar Court: भ्रष्टाचार के मामले में भावनगर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए एसीबी केस में आरोपी को 4 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है. आरोपी की पहचान किशोरभाई बावनजीभाई धोराजिया के रूप में हुई है, जो गारियाधार तालुका पंचायत कार्यालय में अधिक सहायक अभियंता वर्ग-3 के पद पर कार्यरत था. आरोपी के खिलाफ वर्ष 2014 में भावनगर एसीबी पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. मामला सरकारी काम के बिल से जुड़ा हुआ था.
मांगा था 3 प्रतिशत हिस्सा
शिकायतकर्ता के भूगर्भीय योजना के तहत काम मंजूर हुआ था. वर्क ऑर्डर मिलने के बाद मजदूरी का काम शिकायतकर्ता को सौंपा गया. काम पूरा होने के बाद मजदूरी की राशि का कुल 9 लाख 28 हजार 842 रुपये का बिल तैयार किया गया और इसे गारियाधार तालुका पंचायत कार्यालय में भेजा गया था. बिल पर अभिप्राय देने के मामले में आरोपी ने कथित तौर पर रिश्वत की मांग की थी. आरोपी ने बिल की राशि के 3 प्रतिशत के हिसाब से 28 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी. बाद में बातचीत और समझौते के बाद रिश्वत की रकम 21 हजार रुपये तय हुई. रिश्वत की मांग की शिकायत मिलने के बाद भावनगर एसीबी पुलिस स्टेशन की टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई.
21 हजार रुपये लेते रंगेहाथ पकड़ाया
एसीबी ने 25 अप्रैल 2014 को आरोपी किशोरभाई बावनजीभाई धोराजिया को 21 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया. मामले की सुनवाई भावनगर की नामदार चौथी एडिशनल सेशंस जज श्रीमती हेतलबेन दवे की अदालत में चली. लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 7 अगस्त 2026 को अदालत ने आरोपी को 4 वर्ष की सख्त कैद की सजा सुनाई. इस मामले में ट्रैपिंग अधिकारी के तौर पर भावनगर एसीबी पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर एके परमार ने कार्रवाई की थी. वहीं मामले की जांच पुलिस इंस्पेक्टर एए सैयद ने की. जांच अधिकारी अमरेली एसीबी पुलिस स्टेशन से जुड़े थे. पूरे मामले की निगरानी एसीबी जूनागढ़ यूनिट, जूनागढ़ के सहायक निदेशक आरएस चौधरी के सुपरविजन में की गई.
2014 में हुई थी गिरफ्तारी, 2026 में आया फैसला
यह मामला वर्ष 2014 का है. सरकारी काम के बिल से जुड़े मामले में रिश्वत की मांग के बाद एसीबी ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को 21 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था. करीब 12 वर्ष बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को 4 वर्ष की सख्त कैद की सजा सुनाई है. एसीबी की इस कार्रवाई और अदालत के फैसले से सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई एक बार फिर सामने आई है. अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के बाद यह मामला भावनगर क्षेत्र में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कार्रवाई के तौर पर सामने आया है.
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