Home Top News ट्रेड डील को एक बार फिर से बड़ा झटका! ट्रंप भारत पर क्यों लगाएंगे 100% का टैरिफ? जानें पूरी प्लानिंग

ट्रेड डील को एक बार फिर से बड़ा झटका! ट्रंप भारत पर क्यों लगाएंगे 100% का टैरिफ? जानें पूरी प्लानिंग

by Amit Dubey 8 August 2026, 4:06 PM IST (Updated 8 August 2026, 4:07 PM IST)
8 August 2026, 4:06 PM IST (Updated 8 August 2026, 4:07 PM IST)
Tariff on India

Tariff on India: अमेरिका के साथ भारत की द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (BTA) पूरी होने के अपने अंतिम चरण में ही थी कि प्रेसिडेंट ट्रंप ने इसे एक बड़ा झटका दे दिया है. ट्रंप प्रशासन की ओर से अमेरिकी सीनेट (संसद) में एक ऐसा बिल पेश किया गया, जिसके जरिए राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर 50 फीसदी नहीं बल्कि 100 फीसदी का टैरिफ लगा सकते हैं. इस बिल को अमेरिकी सीनेट में भारी बहुमत से पास कर दिया गया है. इसके पास होते ही अब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक बार फिर से टकराव बढ़ने की आशंका है. हालांकि, यह बिल अब 31 अगस्त को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी के लिए जाएगा जब वह फिर से बैठेगी.

मालूम हो कि बीते साल अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया था. उसके बाद भारत और यूएस के व्यापार रिश्ते में केवल खटास ही नहीं आई थी बल्कि द्विपक्षीय व्यापार वार्ता भी बीच में अटक गई थी. अब एक बार फिर से ट्रंप ने टैरिफ हथियार का इस्तेमाल किया है.

मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सीनेट (संसद) में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित किया गया और इस बिल को भारी बहुमत से मंजूरी भी मिल गई है. इसके तहत भारत और चार अन्य देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान है. बता दें कि अभी तक अमेरिका भारत पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाते आ रहा है, लेकिन इस बिल के पास होने से टैरिफ में ट्रंप की मनमर्जी से बढ़त होने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है. अब आइए जानते हैं कि क्या है ट्रंप के इस कदम की पूरी प्लानिंग. शुरुआत हम भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार वार्ता से करेंगे.

फरवरी 2025 में शुरू हुई BTA की बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की घोषणा फरवरी 2025 में हुई थी. यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान वाशिंगटन में की गई थी. तब प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त रूप से इसका ऐलान किया था. इस व्यापार डील का उद्देश्य साल 2030 तक अपने ट्रेड को 500 अरब अमेरिकी डॉलर (“मिशन 500”)पहुंचाना है. इन दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को 2025 के अंत तक पूरा करने का टारगेट किया था, लेकिन ट्रंप टैरिफ की वजह से यह पूरा नहीं हो पाया.

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ट्रंप ने भारत पर थोपा था 50% का टैरिफ

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते में अभी तक देरी अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप के द्वारा थोपे गए 50 फीसदी के टैरिफ की वजह से हो रही थी. बीते साल अगस्त में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया था, जिसमें 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल था. अमेरिकी प्रेसिडेंट ने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ यह कहते हुए लगाया था कि भारत, रूस के साथ तेल की खरीदारी करता है. इससे मिलने वाले पैसों का रूस, यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल करता है.

हालांकि, तब ट्रंप और अमेरिका का परवाह किए बगैर पीएम मोदी ने रूस के साथ तेल की खरीदारी को जारी रखा. बीते साल भारत आए रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा था कि बिना किसी दबाव और रुकावट के रूस, भारत को तेल भेजने की सप्लाई को जारी रखेगा. उन्होंने संकेत दिए थे कि भारत रूस से पहले के मुकाबले और भी अधिक मात्रा में तेल की खरीदारी करेगा.

भारत पर 10% का टैरिफ

बीते साल अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी तक का टैरिफ लगा दिया था. इसमें 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल था, जो भारत पर रूस से तेल की खरीदारी करने पर लगाया गया था. इस वजह से भारतीय सामानों को अमेरिका में भेजने पर काफी अधिक टैक्स देना पड़ता था. लेकिन इस साल 2 फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील पर बातचीत के बाद 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया गया था और मूल टैरिफ को घटाकर मात्र 18 फीसदी कर दिया गया था.

उसके बाद 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ आदेश के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में ट्रंप के टैरिफ वाले आदेश को असंवैधानिक करार दिया गया. कोर्ट ने आदेश दिया कि 24 जुलाई 2026 तक सभी देशों पर 10 फीसदी का टैरिफ लागू रहेगा. लेकिन अब ट्रंप भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने जा रहे हैं.

भारत समेत इन 5 देशों पर 100% का टैरिफ

अब अमेरिका, भारत समेत 5 देशों पर 100 फीसदी का टैरिफ लगाने की तैयारी कर ली है. न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूएस सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के मुख्य खरीदारों, जैसे चीन और भारत को सजा देने वाले बिल को भारी वोटिंग से मंजूरी दे दी है. सीनेट का दावा है कि इस तरह के ट्रेड से यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिलता है. इस बिल का नाम बदलकर लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) कर दिया गया है. इसे सीनेट ने 86-11 वोटों से मंजूरी दी है.

इससे प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकते हैं जो रूसी तेल और गैस के टॉप पांच इंपोर्टर हैं. अभी चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस के टॉप पांच इंपोर्टर हैं.

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इस बिल में और क्या?

रूस पर बैन के अलावा, यह बिल ईरान सैंक्शन्स एक्ट ऑफ 1996 की एक्सपायरी डेट 2031 तक बढ़ा देगा, जो ईरान के एनर्जी सेक्टर में इन्वेस्ट करने वाली कंपनियों पर सजा देता है. इस बिल का समर्थन रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जिनका 11 जुलाई को निधन हो गया, और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल ने किया था.

कीव की यात्रा के बाद ग्राहम की अचानक मौत के बाद, सभी पार्टियों के नेताओं ने बिल पास कराने और यूक्रेन के सहयोगी के तौर पर दिवंगत सीनेटर की विरासत का सम्मान करने के लिए नए जोश के साथ काम किया. दिवंगत सीनेटर की बहन डार्लिन ग्राहम, जिन्हें उनकी मौत के बाद उनकी सीट पर नियुक्त किया गया था, ने कहा, “यह बिल रूस की अर्थव्यवस्था को चलाए रखने वाले मुख्य देशों को एक आसान लेकिन जरूरी चुनाव करने के लिए मजबूर करता है – अमेरिका के साथ बिजनेस करने या सस्ती रूसी एनर्जी खरीदने के बीच चुनाव.”

इसमें रूसी नेताओं और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की भी कोशिश की गई है, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमीर लोगों और फाइनेंशियल संस्थानों को निशाना बनाया गया है.

हमने जो किया है, उस पर गर्व- सीनेटर ब्लूमेंथल

वोट के बाद, सीनेटर ब्लूमेंथल ने रिपोर्टर्स से कहा कि ग्राहम को “हमने जो किया है, उस पर गर्व होगा.” ब्लूमेंथल ने कहा, “ये बड़े पैमाने पर लगाए गए बैन और टैरिफ उन सभी को रोक देंगे जो बहादुर आजाद लोगों के खिलाफ इस जानलेवा, क्रिमिनल लड़ाई में शामिल हैं.” कुछ डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी है कि यह बिल ट्रंप को ऐसे समय में नए टैरिफ पावर देगा जब उन्होंने ऐसे लेवी को अपनी ट्रेड पॉलिसी के सेंटर में रखा है. यह बिल अब 31 अगस्त को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी के लिए जाएगा जब वह फिर से बैठेगी.

बिल की आलोचना

वहीं, डेमोक्रेट कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने इस बिल की आलोचना करते हुए कहा है कि यह “बड़े पैमाने पर नए टैरिफ अथॉरिटीज बनाता है जिनका इस्तेमाल प्रेसिडेंट बिना किसी रोक-टोक के हथियार के तौर पर कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पहले भी कई बार किया है.”

दोनों नेताओं ने कहा, “हम यूक्रेन को सपोर्ट करने और रूस को उसके लगातार गैर-कानूनी युद्ध के लिए सजा देने के लिए अपने सीनेट के साथियों की तुरंत कोशिश का स्वागत करते हैं, लेकिन यह बिल उन लक्ष्यों को हासिल नहीं करेगा. इसके बजाय, यह प्रेसिडेंट ट्रंप को रूस को जिम्मेदार ठहराने से बचने और अपने नुकसान पहुंचाने वाले ट्रेड वॉर में और ज्यादा टैरिफ लगाने का मौका देगा, जिससे अमेरिकियों को बिल भरना पड़ेगा.”

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भारत पर क्यों लगेगा 100 फीसदी का टैरिफ?

बीते पांच साल से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है. इन दोनों देशों के बीच इस संघर्ष और युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन और रूस के प्रेसिडेंट से अलग-अलग मीटिंग भी की थी. इसके बावजूद भी यूक्रेन और रूस का युद्ध नहीं थमा है. इस बीच एक बार फिर से ट्रंप ने रूस से तेल की खरीदारी करने वाले देशों पर निशाना साधते हुए अब 100 फीसदी टैरिफ लगाने की प्लानिंग कर ली है.

अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि रूस से तेल की खरीदारी करने वाले देशों से मॉस्को को जो कमाई होती है, उसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के साथ युद्ध में करता है. इसी को देखते हुए बीते साल ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, लेकिन अब वे 100 फीसदी का टैरिफ लगाने जा रहे हैं. इसी को लेकर अमेरिकी सीनेट (संसद) में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित किया गया गया और इस बिल को भारी बहुमत से मंजूरी भी मिल गई. इसके तहत भारत, चीन समेत अन्य तीन देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान है क्योंकि ये देश रूस से सबसे अधिक तेल की खरीदारी करते हैं. रूस से तेल की खरीदारी करने के मामले में चीन पहले स्थान पर है, वहीं, भारत दूसरे स्थान पर है.

संसदीय समिति ने सरकार को क्या दिया था सुझाव?

बीते दिनों न्यूज एजेंसी पीटीआई की 6 अगस्त की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक संसदीय समिति ने सरकार को सुझाव दिया कि वह भारत के हितों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द से जल्द पूरा करे. वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की ‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन’ रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को भविष्य में अमेरिका द्वारा अप्रत्याशित रूप से बढ़ाए जाने वाले टैरिफ से भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों जैसे जेनेरिक दवाओं, महत्वपूर्ण खनिजों और स्मार्टफोन के लिए पूर्ण छूट प्राप्त करने के लिए बातचीत करनी चाहिए.

इसमें सुझाव दिया गया कि वाणिज्य विभाग को वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देकर, निवेश को प्रोत्साहित करके, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाकर, आपूर्ति श्रृंखला में सुधार करके और भारतीय निर्यातकों द्वारा सामना की जाने वाली टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करके मिशन 500 पहल के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक समयबद्ध रोडमैप भी तैयार करना चाहिए.

रूस से कच्चे तेल के आयात में 34% की बढ़ोतरी

बीते दिनों पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत समेत दुनिया के कई देशों की एनर्जी सप्लाई के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया था. इससे कच्चे तेल के आयात पर काफी प्रभाव पड़ा और इनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई थी. इस बीच भारत ने खाड़ी देशों के अलावा अमेरिका की सख्त निगरानी के बावजूद भी रूस से कच्चे तेल की खरीदारी को जारी रखा. नई दिल्ली ने मास्को से रिकॉर्ड स्तर पर तेल की खरीदारी की है. बीते दिनों सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की आई एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस के कुल तेल निर्यात राजस्व में गिरावट के बावजूद, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात जून में रिकॉर्ड हाई स्तर पर पहुंच गया, जो मई की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक था.

सीआरईए की रिपोर्ट में कहा गया, “जून 2026 में भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था, जिसने कुल 5.5 अरब यूरो मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया. कच्चे तेल की भारत की कुल खरीद का 83 प्रतिशत हिस्सा था, जो 4.5 अरब यूरो के बराबर था.” इसमें आगे कहा गया, “तेल उत्पाद (488 मिलियन यूरो) और कोयला (444 मिलियन यूरो) उनके मासिक रूसी आयात का शेष हिस्सा थे.” बता दें कि रूसी जीवाश्म ईंधन का पहला यानी कि शीर्ष खरीदारी चीन है.

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