Delhi HC: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की लापरवाही पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने एक गड्ढे में गिरने से जान गंवाने वाले 37 वर्षीय युवक के परिवार को 30 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है. जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि सरकारी विभागों की ढिलाई के कारण पीड़ितों को अदालतों के चक्कर काटने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
मुश्किल में है परिवारः कोर्ट
उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि ऐसी घटनाओं में पीड़ितों को तुरंत अंतरिम आर्थिक सहायता देने के लिए एक ठोस नीति (पॉलिसी) तैयार की जाए. जस्टिस कौरव ने कहा कि मृतक की पत्नी, मां और तीन नाबालिग बच्चे 2019 में हुई घटना के बाद से ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. हालांकि पॉलिसी बनाना कार्यपालिका का काम है, फिर भी कोर्ट इससे आंखें नहीं मूंद सकता.
सरकारी अधिकारियों की बढ़ेगी जवाबदेही
जज ने कहा कि ऐसी घटनाएं अचानक या अनहोनी नहीं होतीं, बल्कि ये प्रशासनिक लापरवाही और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के कामों के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपायों को लागू न करने का नतीजा होती हैं. मृतक के परिवार वालों की याचिका पर 29 मई को दिए गए फैसले में कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था न सिर्फ़ पीड़ित परिवारों की मुश्किलों को कम करेगी, बल्कि पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने की ज़िम्मेदारी संभालने वाले सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ाएगी. कोर्ट ने आदेश दिया कि इसलिए संबंधित अधिकारियों से गुज़ारिश है कि वे इस बारे में एक सही पॉलिसी बनाने की संभावना पर विचार करें, ताकि ज़रूरतमंद मामलों में समय पर, मानवीय और सही तरीके से मुआवज़ा दिया जा सके.
बाइक से जाते समय गड्ढे में गिरा था युवक
मालूम हो कि 17 और 18 अप्रैल 2019 की रात मृतक अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था और ढिचौं कलां में DJB के दफ़्तर के सामने पाइपलाइन की मरम्मत के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर गया. अगली सुबह मृतक गड्ढे में पड़ा मिला और कुछ दिनों बाद चोटों के कारण उसकी मौत हो गई. DJB का तर्क था कि खुदाई का काम एक थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर ने किया था और गड्ढे के चारों ओर बैरिकेड लगाए गए थे, इसलिए हो सकता है कि हादसे में मृतक की अपनी गलती भी रही हो, क्योंकि सामने से आ रहे ट्रक की हेडलाइट की वजह से वह अपनी बाइक नहीं रोक पाया होगा.
कोर्ट ने DJB के दावे को किया खारिज
कोर्ट ने DJB के इस दावे को खारिज कर दिया कि मरने वाले व्यक्ति की भी लापरवाही थी. कोर्ट ने कहा कि यह बोर्ड की ज़िम्मेदारी थी कि वह यह पक्का करे कि सार्वजनिक सड़क पर की गई खतरनाक खुदाई वाली जगह पर लगातार निगरानी, अच्छी रोशनी और तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स की व्यवस्था हो. अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता 30 लाख रुपये की एकमुश्त राशि पाने के हकदार हैं.वे इस फैसले के तीन महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं को मुआवजे के तौर पर 29,50,000 रुपये की एकमुश्त राशि का भुगतान करें. साथ ही दुर्घटना की तारीख से लेकर भुगतान मिलने की तारीख तक छह प्रतिशत सालाना की दर से साधारण ब्याज भी देना होगा.
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News Source: PTI
