Home राज्यDelhi बिहार से राजस्थान तक चौकन्ना हुईं सुरक्षा एजेंसियांः पाक बॉर्डर पर घुसपैठ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’

बिहार से राजस्थान तक चौकन्ना हुईं सुरक्षा एजेंसियांः पाक बॉर्डर पर घुसपैठ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’

by Kamlesh Kumar Singh 28 May 2026, 6:43 PM IST (Updated 28 May 2026, 6:44 PM IST)
28 May 2026, 6:43 PM IST (Updated 28 May 2026, 6:44 PM IST)
बिहार से राजस्थान तक चौकन्ना हुईं सुरक्षा एजेंसियांः पाकिस्तान बॉर्डर पर घुसपैठ और ड्रग्स तस्करी के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस'

Demographic Change: केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर बिहार के बाद राजस्थान के सीमावर्ती जिलों विशेषकर पाकिस्तान से सटे इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां अवैध संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और जनसांख्यिकीय बदलाव की जांच करने में जुट गईं हैं. राजस्थान के साथ-साथ यह प्रकिया धीरे-धीरे पूरे देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में लागू की जायेगी. इस सिलसिले में देश के सीमावर्ती राज्यों में केंद्र सरकर के निर्देश के बाद सुरक्षा एजेंसीयां चौकन्ना हो गई हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने इन इलाकों के संवेदनशील क्षेत्रों में घुसपैठ और अवैध निर्माण की रेकी शुरू कर दी है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिहार के किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर) में भारत-पाकिस्तान सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में चल रहे सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने और सघन जांच शुरू कर दिया है.

अवैध निर्माण होंगे ध्वस्त

एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि घुसपैठ, रेकी और ड्रग्स तस्करी पर रोक लगाने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी. जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध संपत्ति की जांच के लिए सीमा सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियां संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन, फर्जी दस्तावेजों (जैसे फर्जी आधार कार्ड) और जमीन की खरीद-फरोख्त पर पैनी नजर रख रही है. हाल ही में सीमावर्ती इलाकों (जैसे जैसलमेर और बीकानेर) में सरकारी जमीनों के फर्जी आवंटन और अवैध संपत्तियों के मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा कई अधिकारियों पर मुकदमे भी दर्ज किए गए है. सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध ढांचे गिराए जा रहे हैं. संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखी जा रही है. जनसांख्यिकीय और भौगोलिक संतुलन पर भी खास नजर रख रही जा रही है.

जिला मजिस्ट्रेटों को मिले और अधिकार

केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों को साफ निर्देश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में हुए किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाए. केंद्रीय एजेंसियों को ऐसे सभी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर उन्हें तुरंत ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं. गौरतलब है कि बिहार के सीमांचल में भी इसी तरह की कार्रवाई के बाद 1.22 लाख से अधिक अवैध निर्माण गिराए जा चुके हैं, जिसे अब अन्य सीमावर्ती राज्यों में भी लागू किया जा रहा है. इस काम में सीमा सुरक्षा बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो , CBDT और राज्य सरकार की एजेंसियों सहयोग कर रही हैं. घुसपैठ, नार्कोटिक्स तस्करी, आतंक वित्तपोषण और अतिक्रमण जैसे सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एक एकीकृत रणनीति तैयार की गई है. साथ ही, सीमावर्ती जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों की भूमिका को विस्तार देते हुए उन्हें वित्तीय गतिविधियों की निगरानी और तस्करी पर नियंत्रण की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है.

साइबर हेल्पलाइन के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने और देश में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया. इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित डेमोग्राफी बदलाव से जुड़ी समिति इस राज्यों में जाकर अध्ययन करेगी , ताकि इन क्षेत्रों में जनंसख्या में बड़े बदलाव का अध्य्यन किया जा सके. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा को अभेद्य बनाने, घुसपैठ रोकने और वहां के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई बहु-आयामी कार्यक्रम चलाने शुरू कर दिया है.

गुजरात, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल में भी चलेगा अभियान

राष्ट्रीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए इस तरह का अभियान बिहार और राजस्थान के बाद गुजरात, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल में चलाया जायेगा. इसके साथ ही सरकार द्वारा गठित डेमोग्राफी कमेटी उन इलाकों का भी अध्ययन करेगी ,जहां जनसंख्या का घनत्व जरूरत के लिहाज से काफी ज्यादा है. जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया में SIR से जुड़ी जानकारी काफी मददगार साबित हो सकती है. गौरतलब है विशेष मतदाता पुनरीक्षण के दौरान बिहार, पश्चिम बंगाल में से बड़ी संख्या में ऐसे लोग मिले है जिनके पास वैलिड कागजात नहीं था, या फिर दो दो या दो से अधिक जगह मतदाता सूची में नाम था. इसी वजह से केंद्र ने अवैध घुसपैठ और असामान्य जनसंख्या बदलावों को लेकर एक समिति का गठन कर दिया. गृह मंत्रालय के मुताबिक अवैध प्रवास के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय बदलाव अब केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं है , बल्कि उनका असर शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक गलियारों, आदिवासी इलाकों और सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच चुका है.

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