Indian Army: अंतर सेवा सहयोग को सुदृढ़ करने और संयुक्तता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय सेना और नौसेना ने 14 मई को ‘संबद्धता पर समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए. इस अवसर पर सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ और नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन भी उपस्थित रहे.
Indian Army: अंतर सेवा सहयोग को सुदृढ़ करने और संयुक्तता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय सेना और भारतीय नौसेना ने 14 मई को ‘संबद्धता पर समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए. इस समझौता ज्ञापन पर भारतीय सेना की ओर से एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक तथा भारतीय नौसेना की ओर से चीफ ऑफ पर्सनल वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह ने हस्ताक्षर किए. इस अवसर पर सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ और नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन भी उपस्थित रहे.
समुद्री और आर्थिक हितों की सुरक्षा पर बल
गुरचरण सिंह ने कहा कि आज के जटिल और निरंतर बदलते सुरक्षा परिवेश में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न केवल क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा आवश्यक है, बल्कि भारत के समुद्री और आर्थिक हितों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. जहां भारतीय नौसेना देश के समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा तथा निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, वहीं भारतीय सेना भारतीय उपमहाद्वीप की रक्षा, स्थिरता और सुरक्षा का प्रमुख आधार बनी हुई है. भविष्य के सैन्य अभियानों में त्वरित निर्णय क्षमता, बहु क्षेत्रीय समन्वय और पारस्परिक संचालन क्षमता की आवश्यकता और अधिक बढ़ेगी, जिससे सेनाओं के बीच निर्बाध तालमेल अनिवार्य हो जाता है. यह समझौता ज्ञापन अंतर सेवा सहयोग को संस्थागत रूप देने, आपसी समझ बढ़ाने, परिचालन समन्वय को मजबूत करने तथा भारतीय सेना और भारतीय नौसेना की विभिन्न संरचनाओं, रेजिमेंटों, संस्थानों, प्रतिष्ठानों और युद्धपोतों के बीच स्थायी पेशेवर सौहार्द को प्रोत्साहित करने का प्रयास है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखाई दिया आपसी समन्वय
इस प्रकार के एकीकरण की प्रासंगिकता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहां तीनों सेनाओं के समन्वित प्रयासों ने उल्लेखनीय परिचालन सफलता सुनिश्चित की. यह समझौता भविष्य में अंतर-सेवा अफिलिएशन के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा तथा भारतीय सेना और भारतीय नौसेना के बीच अफिलिएशन गतिविधियों के संचालन हेतु व्यापक दिशा-निर्देश निर्धारित करेगा. इन अफिलिएशनों के माध्यम से पेशेवर आदान-प्रदान, एक-दूसरे की कार्यप्रणाली से परिचय, संयुक्त गतिविधियों तथा परस्पर भूमिकाओं और क्षमताओं की बेहतर समझ के लिए संरचित अवसर उपलब्ध होंगे. यह समझौता ज्ञापन सशस्त्र बलों के बीच अधिक संयुक्तता, एकीकरण और तालमेल स्थापित करने की दिशा में जारी प्रयासों का एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो भविष्य के लिए तैयार, एकीकृत और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों की आवश्यकताओं के अनुरूप है.
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