Home धर्म पितरों की शांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है ज्येष्ठ अमावस्या, जानें तिथि, मुहूर्त और नियम

पितरों की शांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है ज्येष्ठ अमावस्या, जानें तिथि, मुहूर्त और नियम

by Neha Singh 14 May 2026, 3:26 PM IST (Updated 14 May 2026, 3:39 PM IST)
14 May 2026, 3:26 PM IST (Updated 14 May 2026, 3:39 PM IST)
Jyeshtha-Amavasya

Jyeshtha Amavasya Niyam: अमावस्या का दिन शनि दोष और पितृ दोष को कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन सही मुहूर्त में पूजा-पाठ और कुछ नियमों का पालन करना चाहिए .

16 May, 2026

हिंदू धर्म में पूर्णिमा, अमावस्या और एकादशी का बहुत महत्व होता है. व्रत और त्योहार भी इसी दिन पड़ते हैं. इसी तरह ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है. व्रत के अलावा भी ज्येष्ठ अमावस्या बहुत महत्वपूर्ण तिथि है. इस दिन पितरों की शांति और शनि देव की कृपा के पूजा की जाती है. अमावस्या के दिन सही मुहूर्त में पूजा-पाठ और कुछ नियमों का पालन करना चाहिए . कई लोगों को अमावस्या की तिथि, मुहूर्त और नियमों के बारे में जनकरी नहीं होती. इस खबर में आप जानेंगे ज्येष्ठ मास की अमावस्या कब है, शुभ मुहूर्त क्या है, इसका क्या महत्व है और इस दिन किन नियमों का पालन करना चाहिए.

कब है ज्येष्ठ अमावस्या

ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि की 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और 17 मई को देर रात 1 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगी. उदया तिथि के अनुसार, 16 मई को ज्येष्ठ मास की पूजा की जाएगी और वट सावित्री का व्रत रखा जाएगा.

ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व

शास्त्रों में ज्येष्ठ अमावस्या को पूर्वजों को याद करने और मन की शुद्धि करने का दिन माना गया है. इस दिन पितरों की शांति के लिए पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण और पिंडदान करने का विधान है. उनके नाम पर तर्पण करने और उन्हें याद करने से घर में सुख-शांति आती है और उनका आशीर्वाद मिलता है. जब पितृ खुश होते हैं, तो घर में आने वाले संकट भी टल जाते हैं और इससे पितृ दोष कम होता है.

इस दिन क्या करें

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इसके बाद पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं और शाम में सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इससे पितृ दोष और शनि दोष कम होता है.
  • इस दिन शनिवार भी है, तो आप शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए काली उड़द, काला तिल और तेल का दान कर सकते हैं.
  • इसके अलावा लोहे का दान करना भी शुभ माना जाता है.
  • हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनि दोष कम होता है.
  • अमावस्या के दिन काले कुत्ते और कौए को भोजन कराएं. चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालने से भी पुण्य मिलता है.

क्या न करें

  • लोहा न खरीदें- अमावस्या के दिन भूलकर भी लोहा नहीं खरीदना चाहिए.
  • तामसिक भोजन न खाएं- इस दिन भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. केवल सात्विक भोजन करना चाहिए.
  • बाल और नाखून न काटें- शास्त्रों में कहा गया कि अमावस्या के दिन बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए.
  • लड़ाई-झगड़े से बचें- इस दिन किसी भी तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाहिए. गुस्सा नहीं करना चाहिए.
  • अमावस्या के दिन सुनसान जगहों पर जाने से बचें, क्योंकि इस दिन नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है.

यह भी पढ़ें- 16 या 17 मई किस दिन रखा जाएगा वट सावित्री व्रत, जानें सुहागिन महिलाएं क्या करें और क्या न करें

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