- हजारीबाग से जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट
Jharkhand News: झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज इन दिनों बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है. करोड़ों रुपये का बजट, बड़े-बड़े जेनरेटर और सोलर सिस्टम होने के बावजूद अस्पताल में बिजली कटते ही मरीज उमस गर्मी में तड़पने को मजबूर हैं. भीषण गर्मी में मरीजों के लिए अस्पताल का पंखा नहीं, बल्कि घर से लाया गया हाथ वाला पंखा ही सहारा बन गया है. सवाल यह भी उठने लगा है कि जब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के दावे कर रहे हैं, तब हजारीबाग का सबसे बड़ा अस्पताल आखिर इतनी बदहाली क्यों झेल रहा है.
बड़े-बड़े जेनरेटर और सोलर सिस्टम बने शोपीस
शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज और उनके परिजन इन दिनों गर्मी और बिजली संकट से बेहाल हैं. अस्पताल के कई वार्डों में घंटों बिजली गुल रहने से मरीज पसीने में तरबतर हो रहे हैं. आलम यह है कि मरीजों को राहत देने के लिए परिजन घर से टेबल फैन और हाथ से चलने वाले पंखे लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. अस्पताल में भर्ती मरीजों का कहना है कि गर्मी के कारण मरीजों की हालत और बिगड़ रही है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन इस ओर गंभीर नजर नहीं आ रहा है. मरीजों के परिजनों का आरोप है कि एक वार्ड में 14 से 15 बेड लगाए गए हैं, लेकिन वहां केवल 2 या 3 सीलिंग फैन लगे हैं, जिनमें से कई खराब पड़े हैं. हैरानी की बात यह है कि अस्पताल परिसर में करोड़ों की लागत से बड़े-बड़े जेनरेटर और सोलर सिस्टम लगाए गए हैं, बावजूद इसके बिजली कटते ही पूरा अस्पताल अंधेरे और उमस में डूब जाता है.
शिकायत के बाद भी सुधार नहीं
परिजनों का कहना है कि हर साल अस्पताल को करोड़ों रुपये का बजट मिलता है. अस्पताल में 263 KVA, 163 KVA और 63 KVA क्षमता के तीन बड़े जेनरेटर मौजूद हैं, साथ ही सोलर सिस्टम भी लगाया गया है. इसके बावजूद अगर मरीज गर्मी से बिलबिलाने को मजबूर हों, तो यह सीधे तौर पर लचर प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है. परिजनों ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है. इस पूरे मामले पर जब शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज के डीएस डॉ. राजकिशोर से बात की गई, तो उन्होंने बिजली कटौती और डीजल की कमी का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि अस्पताल के कई वार्डों में पंखे खराब हैं, जिनकी मरम्मत की प्रक्रिया चल रही है. साथ ही यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल में लगे सोलर सिस्टम फिलहाल खराब पड़े हैं, जिसे लेकर वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया है.
स्वास्थ्य मंत्री का दावा हवा-हवाई
हालांकि सवाल यह है कि जब अस्पताल को हर साल करोड़ों का फंड मिलता है, तो फिर मरीजों को इस भीषण गर्मी में बुनियादी सुविधा तक क्यों नहीं मिल पा रही है? हजारीबाग में इन दिनों तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी राज्य में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन हजारीबाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल की यह तस्वीर उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. करोड़ों का बजट, बड़े जेनरेटर और सोलर सिस्टम होने के बावजूद मरीज अगर गर्मी और अंधेरे में तड़पने को मजबूर हों, तो यह केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता मानी जाएगी. अब देखना यह होगा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस बदहाल व्यवस्था पर कब संज्ञान लेते हैं, ताकि अस्पताल में भर्ती मरीजों को कम से कम बुनियादी सुविधाएं तो मिल सके.
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