LIC Employees Census Duties: देश में जनगणना का कार्य जारी है. इस जनगणना के लिए सरकार अपने कर्मचारियों को ड्यूटी में लगा रही है. इस बीच सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी के कर्मचारियों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एलआईसी के कर्मचारियों को जनगणना का कार्य सौंपने के निर्देश का समर्थन किया है. इसके साथ ही कोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें LIC के कर्मचारियों को जनगणना की ड्यूटी से छूट देने की अपील की गई थी. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
याचिका में क्या कहा गया था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एलआईसी के कर्मचारियों को जनगणना का कार्य सौंपने के संबंध में संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों को बरकरार रखा है. इसके साथ ही कोर्ट ने उत्तर मध्य जोन बीमा कर्मचारियों द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि प्राधिकरण/जोनल अधिकारी ने कोई त्रुटि या अवैधता नहीं की है. याचिकाकर्ता ने जनगणना कार्य के लिए एलआईसी के कर्मचारियों को नियुक्त करने के निर्णय को रद्द करने की मांग की थी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4-ए के तहत, केवल स्थानीय प्राधिकरणों के कर्मचारियों को ही जनगणना कर्तव्यों को गणनाकर्ता/पर्यवेक्षक के रूप में करने के लिए नियुक्त किया जा सकता है. उन्होंने आगे कहा कि एलआईसी के कर्मचारी सामान्य खंड अधिनियम, 1897 की धारा 3(31) के तहत परिभाषित “स्थानीय प्राधिकरणों” की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आते हैं. इसलिए, जनगणना कर्तव्यों को उन्हें सौंपना कानून की दृष्टि से “पूरी तरह से अस्थिर” है.
कोर्ट ने खारिज की रिट याचिका
रिट याचिका को खारिज करते हुए जज दिनेश पाठक ने कहा, “कोर्ट का राय है कि अधिकृत प्राधिकारी/क्षेत्रीय अधिकारी ने प्रत्यायोजित शक्ति का प्रयोग करते हुए एलआईसी के कर्मचारियों को जनगणना कार्यों को सुगम बनाने के लिए गणनाकर्ताओं/पर्यवेक्षकों के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन करने का निर्देश देने वाले आदेश जारी करने में कोई त्रुटि या अवैधता नहीं की है.” उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, रिट याचिका में केवल जनगणना कार्य के लिए एलआईसी के कर्मचारियों को नियुक्त करने के निर्णय को रद्द करने की अस्पष्ट प्रार्थना की गई है और किसी विशेष आदेश को कोई विशिष्ट चुनौती नहीं दी गई है.”
कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील ने क्या कहा?
वहीं, केंद्र सरकार के वकील ने तर्क दिया कि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4-ए को अलग से नहीं पढ़ा जा सकता है और इसे अधिनियम, 1948 की धारा 6 (1) (ई) और 7 (सी) के साथ संयुक्त रूप से समझा जाना चाहिए, जो विशेष रूप से जनगणना कार्य के लिए कारखानों, फर्मों और प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों की नियुक्ति की परिकल्पना करता है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एलआईसी एक ‘वाणिज्यिक प्रतिष्ठान’ के दायरे में आता है और इसलिए, जनगणना कार्यों के लिए इसके कर्मचारियों की नियुक्ति अधिनियम, 1948 के दायरे में आती है. आगे यह तर्क दिया गया कि जनगणना नियम, 1990 का नियम 3 उन अधिकारियों की श्रेणियों को निर्धारित करता है जिन्हें जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जा सकता है.
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News Source: PTI
