Home Top News ‘मृत्युदंड हो भ्रष्टाचार की सजा…’, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में इलाहाबाद HC का सख्त सुझाव

‘मृत्युदंड हो भ्रष्टाचार की सजा…’, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में इलाहाबाद HC का सख्त सुझाव

by Neha Singh 22 July 2026, 10:14 AM IST (Updated 22 July 2026, 10:53 AM IST)
22 July 2026, 10:14 AM IST (Updated 22 July 2026, 10:53 AM IST)
Allahbad HC on Ram Mandir Theft (1)

Allahabad HC on Corruption: अयोध्या में राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा है कि जो लोग इस घटनाक्रम से बेफिक्र हैं, उन्हें कोई भी चीज शर्मिंदा नहीं कर सकती. उत्तर प्रदेश सरकार की हालिया बुलडोजर कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए, जस्टिस श्रीधरन ने भारतीय संस्थानों में फैले व्यवस्थित भ्रष्टाचार की आलोचना की और कहा कि राम मंदिर में दान की हालिया चोरी भारतीयों की ईमानदारी के सबसे निचले स्तर को दिखाती है.

दोषियों के लिए मौत की सजा का सुझाव

जज ने कहा कि एक आम भारतीयों ने भ्रष्टाचार को आम बात मान लिया है और अब जब तक दोषी पकड़ा न जाए, वह इसे गलत नहीं मानता. उन्होंने आगे कहा “यह बात भी हमें शर्मिंदा नहीं करती कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2025 रिपोर्ट में 182 देशों में भारत 91वें स्थान पर है.” दान-चोरी विवाद का जिक्र करते हुए, जस्टिस श्रीधरन ने कहा “राम मंदिर में दान की चोरी से जुड़ा हालिया विवाद, ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनका है. राम मंदिर में चोरी से बेपरवाह लोगों को कोई शर्मिंदा नहीं कर सकता, जो भारतीयों की ईमानदारी के सबसे निचले स्तर को दिखाता है.” जज ने यहां तक ​​कहा कि राज्य को दोषियों के लिए मौत की सजा लाने के लिए भ्रष्टाचार रोकथाम एक्ट, 1988 में बदलाव करने पर विचार करना चाहिए.

बुलडोजर एकशन पर सरकार को फटकार

जस्टिस श्रीधरन की 51 पेज की राय में ये तीखी बातें कही गईं, “बुलडोजर जस्टिस” के बारे में कहा गया. इन तोड़-फोड़ का संदर्भ बताते हुए, जज ने कहा कि किसी जुर्म के तुरंत बाद घर तोड़ना केवल समाज की “कथित खून की प्यास” को शांत करने के लिए है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद, तोड़-फोड़ बिना किसी सजा के जारी है “जैसे कि ये फैसले हैं ही नहीं या राज्य को यकीन है कि देश की सबसे बड़ी अदालत द्वारा बनाए गए कानून की अवहेलना का कोई बुरा नतीजा नहीं होगा.”

इसके अलावा, यह देखते हुए कि बिना इजाजत के स्ट्रक्चर कैसे बनते हैं, जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि कोई भी रहने की जगह रातों-रात नहीं बनती. उन्होंने कहा, “जिन अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे यह पक्का करें कि ऐसे स्ट्रक्चर न बनें, वे जानबूझकर बिल्डर को मिले पॉलिटिकल या ब्यूरोक्रेटिक सपोर्ट या बेईमानी की वजह से अपनी आंखें बंद कर लेते हैं.” कोर्ट ने आगे कहा कि नियमों का पालन न करने वाले घरों को बेईमान अधिकारी बनाने में मदद करते हैं जो बिल्डरों से रिश्वत लेते हैं और आखिरी खरीदार को दशकों बाद अचानक बेदखली का सामना करने के लिए छोड़ देते हैं.

भ्रष्टाचार रोकथाम एक्ट, 1988 में बदलाव करे सरकार

इस मामले में, जस्टिस श्रीधरन ने साफ तौर पर कहा कि इन इमारतों को पानी और बिजली जैसी सरकारी सुविधाएं देकर सरकार भी नियमों को तोड़ने में साथी बन जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि यह “सामूहिक ईमानदारी की कमी” डेवलपमेंट अथॉरिटीज समेत हर संस्था पर असर डालती है. जस्टिस श्रीधरन ने चेतावनी दी कि देश में बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार से कुछ लोगों के हाथों में पैसा गैर-कानूनी तरीके से जमा हो जाएगा, जिससे “अमीरों और गरीबों के बीच की खाई और बढ़ेगी” और आने वाले दिनों में नागरिक अशांति की कहानी तय होगी.

जस्टिस श्रीधरन ने सरकार से कहा कि “अगर सरकार भ्रष्टाचार को कम करने और भारत को बेईमानी और ईमानदारी की पूरी कमी के दलदल से निकालने के लिए गंभीर है, तो उसे भ्रष्टाचार रोकथाम एक्ट, 1988 में बदलाव करने पर विचार करना चाहिए, ताकि भ्रष्टाचार के दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान हो सके.”

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News Source: PTI

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